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TISS: छात्रों का अनोखा विरोध, स्टेज पर जाकर भी नहीं लेते डिग्री

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के छात्र अपनी डिग्री ना लेकर विरोध कर रहे हैं. छात्र आर्थिक और सामाजिक रुप से पिछड़े छात्रों की छात्रवृत्ति स्कीम वापस लेने का विरोध कर रहे हैं.
TISS: छात्रों का अनोखा विरोध, स्टेज पर जाकर भी नहीं लेते डिग्री स्टेज पर डिग्री लेने से मना करते हुए छात्र
aajtak.in [Edited By: मोहित पारीक]नई दिल्ली, 09 May 2018

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज के छात्र अपनी डिग्री ना लेकर विरोध कर रहे हैं. छात्र आर्थिक और सामाजिक रुप से पिछड़े छात्रों की छात्रवृत्ति स्कीम वापस लेने का विरोध कर रहे हैं. विरोध का ये नया तरीका अपनाते हुए दो दिन में तीन छात्रों ने डिग्री लेने से मना कर दिया है. हालांकि छात्रों का कहना है कि अभी तक 9 छात्रों ने डिग्री लेने से इनकार किया है.

मुंबई में टीआईएसएस के छात्रों ने पिछले दो दिन से हो रहे दीक्षांत समारोह में स्टेज पर ही डिग्री लेने से मना कर दिया. बता दें कि छात्र संस्थान के उस नोटिफिकेशन का विरोध कर रहे हैं, जिसमें 2018-2020 बैच के एससी-एसटी और ओबीसी नॉन क्रिमी स्टूडेंट्स को फीस के एक हिस्से का अग्रिम भुगतान करने के लिए कहा गया था.

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डिग्री लेने से मना करने वाले छात्रसंघ के सचिव फहद हुसैन का कहना है 'हम गुंडे नहीं और गलियों में विरोध-प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं. समझदारों के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है. इसलिए डिग्री लेने से मना करना ही हमारा विरोध करने का तरीका है.' उन्होंने ये भी कहा कि हम लंबे समय से विरोध कर रहे हैं, लेकिन हमारी मांग पूरी नहीं की गई है.

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फहद का कहना है कि क्या हमें भी जिन्ना की तस्वीर लगानी होगी, जिससे कोई हमारी बात सुनें. हम शिक्षा, छात्रवृत्ति के निजीकरण की बात कर रहे हैं और हम यह पूछना चाहते हैं कि कैसे एक सकारात्मक कार्रवाई की जा सकती है. साथ ही उन्होंने कहा कि ये सवाल ही मुझे डिग्री ना लेने के लिए ताकत देते हैं.

बता दें कि इस साल की शुरुआत में संस्थान ने घोषणा की थी कि डाइनिंग और हॉस्टल की फीस स्टूडेंट से ही वसूल की जाएगी, जिसमें भारत सरकार की पोस्ट मैट्रिकुलेशन स्कॉलरशिप से लाभांवित एससी-एसटी वर्ग के छात्र भी शामिल है. साल 2017 तक यह फीस राज्य सरकार की ओर से दी जाती थी. अब उम्मीदवारों को 12 हजार 500 रुपये और एडमिशन के वक्त 30,700 रुपये का भुगतान करना होगा.

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