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सुषमा स्वराज थीं बेस्ट NCC कैडेट, जानिए कैसे मिलता है ये सम्मान

सुषमा स्वराज अंबाला छावनी के एसडी कॉलेज में अपनी पढ़ाई के दौरान तीन साल तक नेशनल कैडेट कॉर्प्स (NCC) की बेस्ट कैडेट रहीं. 

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aajtak.in/ प्रियंका शर्मा नई दिल्ली, 07 August 2019
सुषमा स्वराज थीं बेस्ट NCC कैडेट, जानिए कैसे मिलता है ये सम्मान सुषमा स्वराज

देश की पूर्व विदेश मंत्री और भाजपा की वरिष्ठ दिवंगत नेता सुषमा स्वराज अंबाला छावनी के एसडी कॉलेज में अपनी पढ़ाई के दौरान तीन साल तक नेशनल कैडेट कॉर्प्स (NCC) की बेस्ट कैडेट रहीं. 1970 में उन्हें कॉलेज की सर्वश्रेष्ठ छात्रा से सम्मानित किया गया था. एनसीसी की शुरुआत स्कूल-कॉलेज से ही हो जाती है.

माना जाता है कि एनसीसी को करने वाले आधे फौजी बन जाते हैं. इसीलिए इसकी ट्रेनिंग काफी कठिन मानी जाती है. अभी देश भर में करीब 13 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स एनसीसी से जुड़े हैं. लेकिन हर साल राष्ट्रीय स्तर पर सिर्फ 9 कैडेट को बेस्ट एनसीसी कैडेट चुना जाता है.

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आइए निम्नलिखित बिंदुओं में जानते हैं कि कैसे चुना जाता है बेस्ट कैडेट...

- बेस्ट एनसीसी कैडेट चुनने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता होती है. हर साल एनसीसी के तीनों श्रेणियों - आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के लिए तीन-तीन बेस्ट कैडेट चुने जाते हैं. कुल 9 बेस्ट कैडेट का चयन होता है.

- कैडेट को परीक्षा देनी होती है. बेस्ट कैडेट (BC) यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम (YEP) परीक्षा 900 अंकों की होती है. इसमें लिखित परीक्षा (सामान्य ज्ञान)-50 अंक, लिखित परीक्षा (सर्विस सबजेक्ट)-100 अंक, ड्रिल (150 अंक BC या 75 अंक YEP), फायरिंग-150, पर्सनैलिटी और कम्यूनिकेशन स्किल-300, डीजी इंटरव्यू-100 और रिपब्लिक डे इवेंट में भागीदारी-50 अंक शामिल हैं. 

-  बेस्ट कैडेट की परीक्षा में कैडेट की कमांड शक्ति, स्क्वायड पर नियंत्रण, ड्रिल, टर्नआउट और सहन क्षमता पर भी ध्यान दिया जाता है. इन सभी परीक्षाओं में करीब चार घंटे लगते हैं.

-  कैडेट को फायरिंग की परीक्षा में 0.22 कैलिबर की राइफल से 25 मीटर रेंज में निशाना लगाना होता है. कुल 15 राउंड फायर करने होते हैं. 5 खड़े होकर, 5 घुटनों के बल और 5 लेटकर. हर राउंड से 10 अंक मिलते हैं.

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- 300 अंकों वाला पर्सनैलिटी और कम्यूनिकेशन स्किल टेस्ट बेहद महत्वपूर्ण होता है. इसमें कैडेट के संपूर्ण व्यक्तित्व की जांच की जाती है. इसमें इंटरव्यू, ग्रुप डिस्कशन, रिसपॉन्स एबिलिटी आदि की जांच होती है.

-  अंत में सबसे जरूरी होता है डीजी इंटरव्यू. इसमें एनसीसी के सर्वोच्च अधिकारी यानी लेफ्टिनेंट जनरल हर श्रेणी के चार-चार कैडेट का इंटरव्यू लेते हैं. इसके कुछ दिन बाद डायरेक्टोरेट की तरफ से 9 बेस्ट कैडेट का नाम जारी किया जाता है.

- एनसीसी तीन तरह के सर्टिफिकेट देता है, जिसमें ए, बी और सी ग्रेड शामिल है और इसमें सर्वोच्च ग्रेड सी होती है. इस ग्रेड में भी ए,बी,सी आदि पॉइंट दिए जाते हैं, यानि सर्वोच्च सर्टिफिकेट सी एल्फा ए होता है.

-  बता दें कि ए से लेकर सी तक परीक्षा और ट्रेनिंग मुश्किल हो जाती है और भारतीय सेना (कर्नल रैंक) के वरिष्ठ अधिकारी इन परीक्षाओं और ग्रेड पर नजर रखते हैं. सी सर्टिफिकेट उन छात्रों को दिया जाता है, जिन्होंने काफी मुश्किल पीटी एग्जाम को बी ग्रेड से भी अच्छे ढंग से पास किया हो. साथ ही इन सर्टिफिकेट से आपको कई फायदे भी होते हैं.

-  ए सर्टिफिकेट से उम्मीदवार सीएसएम (कंपनी सार्जेंट मेजर) तक का पद हासिल कर सकते हैं, जबकि बी सर्टिफिकेट से जेयूओ और सी सर्टिफिकेट से सीएसयूओ (कंपनी सीनियर अंडर ऑफिसर) का पद पा सकते हैं. एनसीसी से 'सी' सर्टिफिकेट प्राप्त छात्रों को सेना, अर्धसैनिक बलों के अलावा विभिन्न सरकारी नौकरियां पाने में आसानी रहती है.

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- बता दें कि सी सर्टिफिकेट हासिल करने के बाद उम्मीदवारों को सोल्डर जीडी कैटेगरी और सोल्टर टेक में 10 फीसदी अंक का फायदा होता है. वहीं नेवी और एयरफोर्स की नियुक्ति में भी इसका फायदा होता है. एयरफोर्स में 5 अंक, बीएसएफ में 10 अंक का फायदा मिलता है.

-  उच्च शिक्षा के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों-कॉलेजों में एडमिशन में भी एनसीसी से मिले सर्टिफिकेट का बहुत महत्व है. एनसीसी के बारे में आपको लगता है कि यह सुरक्षा आदि के लिए काम करती है, लेकिन एनसीसी एचआरडी मंत्रालय के अधीन आता है.

- बता दें कि ए सर्टिफिकेट 15 साल से कम उम्र के छात्रों के लिए है जबकि बी सर्टिफिकेट हासिल करने की अधिकतम उम्र 17 साल है. बी सर्टिफिकेट में कम से कम सी ग्रेड हासिल करने के दो साल बाद छात्र सी सर्टिफिकेट हासिल करने के योग्य हो जाता है.

- गौरतलब है कि राष्ट्रीय कैडेट कोर यानी एनसीसी दरअसल भारतीय सैन्य कैडेट कोर है जो कि स्वैच्छिक आधार पर स्कूल और कॉलेज के छात्रों के लिए खुला है. भारत में एनसीसी कैडेट की संख्या करीब 15 लाख है.

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