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स्कूल बैग रिएलिटी चेक में मासूम कंधों पर मिला मानक से 3 गुना ज्यादा बोझ

दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन को लगातार पेरेंट्स की शिकायतें मिल रही हैं कि उनके बच्चे दबाव में जरूरत से ज्यादा बोझ उठा रहे हैं. इन शिकायतों के आधार पर मंगलवार को दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन की टीम ने School Bag Weight reality check किया.

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aajtak.in
मानसी मिश्रा नई दिल्ली, 27 August 2019
स्कूल बैग रिएलिटी चेक में मासूम कंधों पर मिला मानक से 3 गुना ज्यादा बोझ School Bag Weight reality check के दौरान का फोटो

दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन को लगातार पेरेंट्स की शिकायतें मिल रही हैं कि उनके बच्चे दबाव में जरूरत से ज्यादा बोझ उठा रहे हैं. इन शिकायतों के आधार पर मंगलवार को दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन की टीम ने School Bag Weight reality check किया. दिल्ली की सड़कों के बाहर कई जगहों पर पेरेंट्स के साथ एसोसिएशन के सदस्यों ने बैग का वजन लिया, जिसमें सामने आया कि बच्चे तय मानकों से कहीं ज्यादा वजन ढो रहे हैं. ये रियलिटी चेक मोहन गार्डन इलाके में किया गया.

दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष अपराजिता गौतम ने आजतक को बताया कि उन्होंने नर्सरी से 11वीं तक के 86 बच्चों के बैग सैंपल डेटा कलेक्शन किया. इन बच्चों के बैग का वजन मापा गया. उन्होंने कहा कि अगर उस डेटा को स्टडी किया जाए तो 86 में से केवल 1 बच्चे के बैग का वजन नियमानुसार था जबकि बाकी 85 बच्चों के बैग का वजन तय मानक से 3 गुना था.

सैंपल कलेक्शन में उदाहरण देखें तो क्लास 2 के बच्चे के बैग का औसतन वजन 5 किलो था. जबकि नियमानुसार ये डेढ़ किलो तक ही होना चाहिए. यहां तक कि नर्सरी और प्रेप के बच्चों के बैग का औसतन वजन 4.5 किलो निकला.

अपराजिता का कहना है कि यहां ये बात ध्यान देने की है कि स्कूल खत्म होने के बाद ये वजन लिया गया गया था, यदि सुबह ये वजन लिया गया होता तो 1 किलो (खाने के डिब्बे और पानी की बोतल) वजन और जुड़ जाता जो कि अमूमन हर दिन बच्चे उठाते ही हैं.

मद्रास हाई कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट और विभिन्न विभागों ( डीओई, सीबीएसई, एमएचआरडी) ने कई आदेश दिए, जिसके मुताबिक स्कूली बच्चों के क्लास के हिसाब से विषय, किताबें और बैग का वजन निर्धारित किया गया है. वजह ये है कि बैग के भारी वजन के चलते बच्चों की रीढ़ की हड्डी पर उसका खतरनाक प्रभाव पड़ रहा है. दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन ने कमल मॉडल स्कूल के पेरेंट्स का धन्यवाद दिया, जिन्होंने इस प्रोग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया.

दिल्ली शिक्षा विभाग द्वारा 29 नवंबर 2018 को जारी सर्कुलर में भी क्लास के हिसाब से वजन मापदंड तय किया गया.

कक्षा 1-2   1.5 किलो

क्लास 3-5   2-3 किलो

क्लास 6-7.  3-4 किलो

क्लास 8-9.  4.5 किलो

कक्षा 10.    5 किलो

आया था ये मामला

दिल्ली पेरेंटस एसोसिएशन में एक बच्चे का केस आया जिसमें एक बच्ची को इस परेशानी के चलते डॉक्टरों ने ऑपरेशन बोला है, जिसका खर्च 8-10 लाख रुपये है, ये बच्ची अभी AIIMS में एडमिट है.

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