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परीक्षा पर चर्चा में बोले PM मोदी- कम बोलने से फायदा, जीवन में इसे उतारना चाहिए

परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कम बोलने के फायदे बताए हैं, जानिए- कम बोलने से क्या- क्या होगा फायदा

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 20 January 2020
परीक्षा पर चर्चा में बोले PM मोदी- कम बोलने से फायदा, जीवन में इसे उतारना चाहिए पीएम मोदी (फाइल फोटो)

  • परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में छात्रों ने मोदी से पूछे विभिन्न सवाल
  • जानें- क्यों कहा कम बोलने से फायदा, जीवन में उतारना चाहिए

परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित किया गया. जिसमें देशभर में से कई छात्रों ने अपने मन के सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछे. जबलपुर और दिल्ली के छात्रों ने पीएम मोदी से सवाल पूछा-

जो छात्र पढ़ाई में अच्छे नहीं है लेकिन खेल-संगीत में अच्छे होते हैं तो उनका भविष्य क्या होगा. पढ़ाई के बीच किस तरह एक्टिविटी के साथ बैलेंस बनाया जाए?

PM मोदी  ने जवाब देते हुए कहा कि शिक्षा बहुत बड़े रास्ते का दरवाजा खोलती है. सा रे गा मा से सिर्फ संगीत की दुनिया में एंट्री मिलती है, लेकिन उससे संगीत पूरा नहीं होता है. जो हम सीख रहे हैं उसे जिंदगी की कसौटी पर कसना जरूरी है. स्कूल में पढ़ाया जाता है कि कम बोलने से फायदा होता है तो हमें जिंदगी में भी उसे उतारना चाहिए. अगर आप रोबोट की तरह काम करते रहेंगे, तो सिर्फ रोबोट ही बनकर रह जाएंगे. इसलिए पढ़ाई से अलग भी एक्टविटी करनी चाहिए, हालांकि टाइम मैनेजमेंट जरूरी है.

पीएम मोदी से पूछा गया मॉडर्न टेक्नोलॉजी का छात्र के जीवन में क्या रोल होना चाहिए?

इस पर उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी को अपना दोस्त मानें, प्रोएक्टिव होना जरूरी है. मेरे लिए क्या उपयोगी है, ये जानना जरूरी है. स्मार्ट फोन आपका समय चोरी करता है लेकिन उसमें से कुछ समय करके अपने माता-पिता के साथ बैठिए. टेक्नोलॉजी को अपने कब्जे में रखना जरूरी है. रेलवे स्टेशन पर पूछताछ की विंडो होती है, लेकिन वहां पर बोर्ड भी लगा होता है. लेकिन लोग बोर्ड कम देखते हैं और पूछते ज्यादा हैं.

लोग मैसेज करते हैं और फिर फोनकर करके पूछते हैं कि मेरा मैसेज मिला. नई पीढ़ी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सही करती है. अपनी मातृभाषा की डिक्शनरी को फोन में रखें और रोजाना कुछ वर्ड सीखें. आज के वक्त में सोशल नेटवर्किंग सिर्फ अपने फोन में आ गई है, पहले दोस्त को जन्मदिन विश करते हैं लेकिन अब रात को ही मैसेज किया जाता है. टेक्नोलॉजी का गुलाम नहीं बनना चाहिए.

आज के वक्त में सोशल नेटवर्किंग सिर्फ अपने फोन में आ गई है, पहले दोस्त को जन्मदिन विश करते हैं लेकिन अब रात को ही मैसेज किया जाता है. हमें तय करना होगा कि रोजाना कुछ समय के लिए टेक्नोलॉजी फ्री रहूंगा. कुछ समय अपनों के साथ बिताना जरूरी हैं. घर में एक कमरा ऐसा होना चाहिए जिसमें टेक्नोलॉजी को नो एंट्री होगी, उस कमरे में जो भी आएगा बिना टेक्नोलॉजी आएगा.

बता दें, परीक्षा पे चर्चा का तीसरा संस्करण था.  पहली बार ये कार्यक्रम 2018 में आयोजित किया गया था. इस कार्यक्रम में  37 राज्य और केन्द्र शासित प्रदेशों एवं 25 देशों के 15 करोड़ से अधिक छात्र शामिल हुए थे.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कार्यक्रम के लिए कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए पांच अलग-अलग विषयों पर एक 'शॉर्ट निबंध' प्रतियोगिता शुरू की थी. इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी छात्रों में से 1,050 को एक निबंध प्रतियोगिता के माध्यम से चुना गया  था.

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