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DUSU चुनाव प्रचार में टूटे नियम, कागजों से पटा परिसर, 12 केस दर्ज

दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (DUSU) के पदाधिकारियों का चुनाव 12 सितंबर को होना है. इसलिए, कैंपस में चुनाव प्रचार इन दिनों अपने चरम पर है. चुनाव में सभी छात्र संगठनों ने  जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी है.

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aajtak.in
नयनिका सिंघल नई दिल्ली, 10 September 2019
DUSU चुनाव प्रचार में टूटे नियम, कागजों से पटा परिसर, 12 केस दर्ज प्रतीकात्मक फोटो

दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (DUSU) के पदाधिकारियों का चुनाव 12 सितंबर को होना है. इसलिए, कैंपस में चुनाव प्रचार इन दिनों अपने चरम पर है. चुनाव में सभी छात्र संगठनों ने जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी है.

चुनावी प्रचार में सभी संगठनों पर डूसू चुनाव की आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं. आचार संहिता के अनुसार उम्मीदवार केवल कैंपस के कुछ निर्दिष्ट स्थानों पर हस्तनिर्मित पोस्टर का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसे कॉलेज/ विश्वविद्यालय प्राधिकरण द्वारा पहले से ही नोटिफाई किया जाएगा.

ग्राउंड जीरो पर इंडिया टुडे की टीम ने पाया कि चुनाव प्रचार में ज्यादातर उम्मीदवार छपे हुए पर्चे का उपयोग कर रहे हैं. छात्र नेताओं के समर्थक भारी मात्रा में कैंपस में हर जगह ये पर्चे फेंक रहे हैं. हाल ये है कि कई कॉलेजों के बाहर सड़कों पर ये कागज पटे पड़े हैं. इससे परिसर में हर जगह कचरे के ढेर लग गए हैं.

इन उल्लंघनों के बारे में पूछने पर स्टूडेंट यूनियंस एक दूसरे पर दोषारोपण करते हैं. ABVP ने NSUI को दोष दिया. अगर खर्च की बात करें तो हर उम्मीदवार को अधिकतम 5000 रुपये खर्च करने की अनुमति है. लेकिन इनके अभियान के स्तर को देखते हुए यह विश्वास करना कठिन है कि खर्च निर्धारित सीमा के तहत हो रहा है. नियम की बात करें तो बिना मतलब या जरूरत से अधिक खर्च करने पर लिंगदोह समिति की सिफारिश के अनुसार किसी भी स्थिति में उम्मीदवार का चुनाव रद्द किया जा सकता है.

इस मामले में ABVP दिल्ली के राज्य सचिव सिद्धार्थ यादव ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्रसंघ चुनाव दुनिया का सबसे बड़ा छात्रसंघ चुनाव है. इसमें दिए गए समय में सभी 51 कॉलेजों में फैले लाखों छात्रों से संपर्क करना बहुत मुश्किल है. एबीवीपी ने चुनाव लड़ने का तरीका बदल दिया है जिसमें हम डेमोक्रेसी वॉल्स में भी कोई पोस्टर नहीं लगाते या कोई भी उम्मीदवार साइकिल से प्रचार नहीं करता.

अगर कोई भी कागज इस्तेमाल भी होता है तो हमारी स्टूडेंट संगठन स्टूडेंट फॉर डेवलपमेंट (SFD) उन्हें रिसाइक्लिंग के लिए इस्तेमाल करता है. हम दृष्टिबाधित स्टूडेंट्स को इसी रिसाइकिल पेपर से बनी डायरी देते हैं. हमें आशा है कि आने वाले सालों में इसमें बहुत बदलाव आएगा.

NSUI दिल्ली के राज्य प्रभारी निखिल कांबले ने कहा कि हाल ही में NGT निर्णयों के साथ लिंगदोह दिशानिर्देशों को NSUI पूरी तरह से पालन करता है. प्रदूषण के मामले हमें जीरो टॉलरेंस है. प्रदूषण कम से कम करने के लिए एक गतिशील और जीवंत सोशल मीडिया अभियान हमने विकसित किया था. हमें जमीन पर जो भी कागज़ की सामग्री दिखाई देती है, भले ही वो हमारे विरोधियों द्वारा फैलाया गया हो, उसे हम हटाते हैं.

प्रो अशोक प्रसाद, मुख्य चुनाव अधिकारी, डूसू ने बताया कि ऐसे 12 से ज्यादा मामले पुलिस द्वारा इन कागजों को फेंकने और यहां- वहां पोस्टर और होर्डिंग्स लगाने को लेकर दर्ज किए गए हैं. चुनावों के दौरान गड़बड़ी की निगरानी के लिए कॉलेजों और विश्वविद्यालय की एक डिफेसमेंट कमेटी बनाई गई है. अगर ऐसे में कोई आचार संहिता का उल्लंघन करता है तो हम उचित कार्रवाई करेंगे.

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