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उत्तर प्रदेश के निजी स्कूलों ने फीस बढ़ाने को लेकर हाईकोर्ट में दी अर्जी

उत्तर प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ाने के मामले को लेकर सरकार और प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के बीच ठन गई है. प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों की एसोसिएशन ने फीस बढ़ाने को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. जानें- पूरा मामला.

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aajtak.in
कुमार अभिषेक लखनऊ, 01 June 2020
उत्तर प्रदेश के निजी स्कूलों ने फीस बढ़ाने को लेकर हाईकोर्ट में दी अर्जी प्रतीकात्मक फोटो

उत्तर प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों की एसोसिएशन ने फीस बढ़ाने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उपमुख्यमंत्री ने कहा कि किसी तरह की फीस नहीं बढ़ने दी जाएगी अगर स्कूलों ने जबरदस्ती की तो भारी जुर्माना लगाएंगे.

एक तरफ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचि‍का दायर की है जिस पर सरकार को नोटिस भी भेजा गया है. वहीं दूसरी तरफ एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन देकर मांग की है कि जो प्राइवेट स्कूल एक्ट बनाया गया है. साथ-साथ जो फीस वृद्धि एक साल तक रोकने का GO गवर्मेंट आर्डर निकाला गया है उसे भी खत्म किया जाए.

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कोरोना के इस संकट काल में योगी सरकार ने एक आदेश निकालकर सभी प्राइवेट स्कूलों में एक साल के लिए फीस वृद्धि पर रोक लगा दी थी ,साथ ही वाहन शुल्क भी लेने से मना कर दिया है, जिसके खिलाफ एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल उत्तर प्रदेश ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.

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ऐसे दौर में जब लोगों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है, उत्तर प्रदेश के एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल चाहता है कि हर साल की तरह उन्हें इस साल भी फीस बढ़ाने की छूट दी जाए.

हाईकोर्ट में सरकार के फैसले के खिलाफ जाते हुए प्राइवेट स्कूलों ने यह दलील दी कि वह लोग ऑनलाइन क्लासेज चला रहे हैं. शिक्षकों को सैलरी बढ़ानी है और स्कूल के खर्चे चलाने हैं ऐसे में सरकार फीस बढ़ाने के उनके अधिकार को नहीं रोक सकती प्राइवेट स्कूलों के रिट याचिका पर लखनऊ हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस देकर जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 18 जून तय कर दी है.

प्राइवेट स्कूलों ने कांग्रेस के प्रवक्ता कपिल सिब्बल को अपना वकील तय किया है और यह लोग हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ने के मूड में है लेकिन कोरोना के संकट काल में फीस बढ़ाने को लेकर आमादा भी हैं.

Association of Private Schools यूपी के प्रेसीडेंट अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि हम लोग लॉक डाउन में अभिभावकों की परेशानी समझ रहे हैं लेकिन स्कूलों की परेशानी भी सरकार को समझनी पड़ेगी हम ऑनलाइन क्लासेज चला रहे हैं. हम लगातार लॉकडाउन के बाद भी बच्चों को पढ़ा रहे हैं और जब तक लॉकडाउन रहेगा तब तक बच्चों को पढ़ाते भी रहेंगे, हमें शिक्षकों को बढ़ी हुई सैलरी भी देनी है.

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स्कूलों के खर्चे भी मेंटेन करते हैं अगर हम बच्चों को पढ़ा रहे हैं तो फीस बढ़ाने के हमारे अधिकार हमारे पास होने चाहिए. सरकार जैसे दूसरे क्षेत्रों को मदद कर रही है वैसे हमें भी मदद करें हमें भी अनुदान दे या फिर अभिभावकों को कुछ अनुदान दे ताकि हमारे स्कूल भी चल सके. अगर हम शिक्षकों की सैलरी नहीं बढ़ाएंगे तो हम अच्छे शिक्षकों को रोक नहीं पाएंगे इसलिए हम लोगों ने फीस बढ़ाने के अपने अधिकार को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है. हम हर तरह से सरकार के एक्ट का पालन कर रहे हैं क्योंकि 2018 में सरकार ने हमें हर साल साढे आठ फ़ीसदी फीस बढ़ाने की इजाजत दी है और हम इसीलिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा रहे हैं.

कोरोना के संकट के दौर में प्राइवेट स्कूलों के फीस बढ़ाने की मांग सरकार के गले नहीं उतर रही. इसे लेकर उप मुख्यमंत्री और शिक्षा विभाग के प्रमुख दिनेश शर्मा ने कहा कि प्राइवेट स्कूल अगर हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं तो हम भी इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे. अगर कोरोना संकट के इस दौर में प्राइवेट स्कूल किसी तरह की फीस को बढ़ाने की मनमानी करते हैं तो भारी जुर्माना लगाया जाएगा.

डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने कहा कि देखिए हम लोगों ने कोरोना संकट काल में सिर्फ 1 साल के लिए ये आदेश निकाला है. लोगों के पास आर्थिक तंगी के चलते उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होगी इसलिए जो स्कूल है वह 1 साल के लिए फीस नहीं बढ़ाएं हर महीने की फीस लें. साथ ही एक बार में 3 महीने 6 महीने की फीस न वसूले और साथ ही जब बस नहीं चलनी है तो कोई वाहन शुल्क ना ले, यह सरकार का आदेश है और यह मानना इन की बाध्यता है लेकिन अगर यह लोग मनमानी करेंगे तो हम कार्यवाही करेंगे.

एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल उत्तर प्रदेश में 12 सौ से ज्यादा पूरे प्रदेश भर के बड़े और छोटे स्कूल हैं जिन्होंने सरकार के फीस न बढ़ाने के आदेश को चुनौती दी है. दरअसल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव ने यह आदेश निकाला है चूंकि स्कूलों में पढ़ाई नहीं हो रही इसलिए स्कूल फीस वृद्धि नहीं करें. इसी बात को मुद्दा बनाकर प्राइवेट स्कूल के लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है कि वह न सिर्फ लॉकडाउन में बच्चों को पढ़ा रहे हैं बल्कि पढ़ाते भी रहेंगे.

एक तरफ बड़े एसोसिएशन सरकार के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं वहीं कई छोटे एसोसिएशन हैं जो इस मुद्दे पर सरकार के साथ हैं. कुछ स्कूलों का कहना है कि संकट के इस दौर में सरकार ने फीस नहीं बढ़ाने का देश निकाला है. ऐसे में कई स्कूल इसे मानने को तैयार हैं.

वरदान इंटरनेशनल एकेडमी की प्रिंसिपल र‍िचा खन्ना ने कहा कि प्राइवेट स्कूल हर साल करीब साढे आठ फ़ीसदी फीस में बढ़ोत्तरी करते हैं, 2018 में योगी सरकार ने एक एक्ट लाकर हर साल मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने की प्रथा को रोक दी थी. सिर्फ साढ़े आठ प्रतिशत फीस बढ़ाने की मंजूरी दी थी कोरोना के संकट के इस दौर में प्राइवेट स्कूलों ने न सिर्फ फीस वृद्धि के रोक को चैलेंज किया है बल्कि दो 2018 के उस एक्ट को भी हटाने की मांग की है जिसमें सरकार ने साढे़ 8 फ़ीसदी से ज्यादा फीस बढ़ाने पर रोक लगा रखी है.

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