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जानें क्या है AFRS प्रणाली, कैसे इस्तेमाल होगी आपके फेस की पहचान

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो(एनसीआरबी) अब हर चेहरे की पहचान अपने पास रखेगा. सरकार इसे जल्द ही लागू कर रही है. कुछ लोगों ने सवाल उठाया था कि इसके जरिये लोगों की प्राइवेसी प्रभावित हो सकती है. इस पर सरकार ने कहा है कि इसका उपयोग सिर्फ क्राइम जांच के मामले में किया जाता है. जानें क्या है ये प्रणाली कैसे होगा इस्तेमाल.

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aajtak.in
मानसी मिश्रा नई दिल्ली, 12 July 2019
 जानें क्या है AFRS प्रणाली, कैसे इस्तेमाल होगी आपके फेस की पहचान प्रतीकात्मक फोटो

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो(एनसीआरबी) अब हर चेहरे की पहचान अपने पास रखेगा. सरकार इसे जल्द ही लागू कर रही है. कुछ लोगों ने सवाल उठाया था कि इसके जरिये लोगों की प्राइवेसी प्रभावित हो सकती है. इस पर सरकार ने कहा है कि इसका उपयोग सिर्फ क्राइम जांच के मामले में किया जाता है. जानें क्या है ये प्रणाली कैसे होगा इस्तेमाल.  

एनसीआरबी का कहना है कि एएफआरएस (आटोमेटेड फेस रिकग्निशन सिस्टम) प्रणाली फिंगरप्रिंट मिलान के समान है. ये सिस्टम आमतौर पर आपराधिक जांच में उपयोग किया जाता है. जब अपराध दृश्य में पाए जाने वाले उंगलियों के निशान डेटाबेस से मेल खाते हैं.

इकोनॉमिक्स टाइम्स से बातचीत में एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि एनसीआरबी की स्वचालित चेहरे की पहचान प्रणाली (एएफआरएस) नागरिकों की प्राइवेसी का कहीं से भी उल्लंघन नहीं करेगी. ये प्रणाली केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों की मदद करने के लिए विकसित की जा रही है, ताकि वैज्ञानिक और त्वरित तरीके से लापता बच्चों और अज्ञात शवों की पहचान हो सके.

ये प्रणाली बिल्कुल फिंगरप्रिंट मिलान के समान है जो आमतौर पर आपराधिक जांच में उपयोग किया जाता है. जब क्राइम सीन में पाए जाने वाले उंगलियों के निशान डेटाबेस से मेल खाते हैं. AFRS इसे एक लेवल पर और एडवांस कर देगा. AFRS डेटा का इस्तेमाल केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियां ही कर सकेंगी. NCRB ने पिछले हफ्ते AFRS के लिए बिड्स इनवाइट की थी. इसके जरिये सीसीटीवी फीड से चेहरे की फोटो को कैप्चर करके इसका मिलान किया जाएगा. अगर कोई ब्लैकलिस्ट मैच पाया जाता है तो अपने एलर्ट मिल जाएगा.

वर्तमान में, CCTNS डेटाबेस में लापता व्यक्तियों के 7.71 लाख मामले हैं जिनमें 98,000 बच्चे शामिल हैं. इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल केवल ऐसे व्यक्तियों के संबंध में किया जाएगा जो सीसीटीएनएस डेटा बेस पर दर्ज हैं. इनमें आरोपी व्यक्ति, कैदी, लापता व्यक्ति भी शामिल होगा. गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि इस उपकरण के साथ, किसी अज्ञात बच्चे के बरामद होने पर पुलिस लापता बच्चे के डेटाबेस के साथ बच्चे की फोटो का मिलान कर सकती है.

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