एडवांस्ड सर्च

कैंसर पर काम कर रहे इस टीचर को ब्रिटेन की रॉयल सोसायटी देगी ये सम्मान

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सेंटर फॉर इंटरडिसप्लनेरी रिसर्च इन बेसिक सांइस में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद इम्‍तियाज हसन को ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी ऑफ बायोलॉजी (एफआरएसबी) लंदन विशेष सम्मान दे रही है. जानें क्या है खास वजह.

Advertisement
aajtak.inनई दिल्ली, 18 July 2019
कैंसर पर काम कर रहे इस टीचर को ब्रिटेन की रॉयल सोसायटी देगी ये सम्मान डॉ मुहम्मद हसन

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सेंटर फॉर इंटरडिसप्लनेरी रिसर्च इन बेसिक सांइस में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद इम्‍तियाज हसन को ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी ऑफ बायोलॉजी (एफआरएसबी) लंदन विशेष सम्मान दे रही है. जानें क्या है खास वजह.

क्यों मिलता है ये सम्मान

बायोलॉजी साइंस के विकास में जिन लोगों का खास योगदान होता है, उन्हें सम्मान देने के लिए, रॉयल सोसाइटी ऑफ बायोलॉजी अपने फेलो के तौर पर चुनती है. इसके लिए चुने गए सदस्य को एफआरएसबी की फैलोशिप दी जाती है.

उन्होंने किया है ये काम

कैंसर और न्यूरोडिजनरेटिव जैसे बीमारियों के थेरप्यूटिक मैनेजमेंट इस्तेमाल में, हाई अफिनिटी सेलक्टिव काइनेस इन्हिबीटर की इजाद के लिए, डॉ हसन को एफआरएसबी ने इस सम्मान से नवाजा जा रहा है. उन्होंने इंसानों में पाए जाने वाले असमान्य एंजाइम, काइनेस पर काबू पाने के लिए अपने रिसर्च कार्य को केन्द्रित किया. उनके अनुसंधान कार्यों को, देश- विदेश की 220 से ज्यादा रिसर्च पत्रिकाओं में छापा गया. इसके अलावा उनके अनुसंधान कार्यों का 3500 से ज़्यादा जगह हवाला दिया गया।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से उन्होंने 2007 में पीएचडी डिग्री हासिल करने के बाद गोल्ड मेडलिस्ट हासिल किया. फिर डॉ हसन ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया ज्वाइन करके अपने रिसर्च कार्य को आगे बढ़ाया.

काइनेस पर क़ाबू पाने के लिए इजाद की गई दवाओं में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए, हाल ही में उन्हें फैलो ऑफ रॉयल सोसाइटी ऑफ केमेस्ट्री के लिए चुना गया. इससे भी अहम बात यह है कि वह, उन गिने चुने भारतीय वैज्ञानिकों में हैं, जिन्हें बहुत कम उम्र में रॉयल सोसायटी ऑफ केमेस्ट्री और रॉयल सोसायटी ऑफ बायोलॉजी के लिए चुन कर उनके रिसर्च वर्क को मान्यता दी गई.

फैलो ऑफ इंडो-यूएस साइंस एंड टेक्नालॉजी फोरम सहित डॉ. हसन को मिले अवार्ड और सम्मान की एक लंबी लिस्ट है. वो कई साइंस पत्रिकाओं के एडिटर हैं और उन्होंने कई सिंपोजियम आयोजित किए. वो कई साइंटिफिक कमेटियों के सदस्य भी हैं. देश और विदेशों में आयोजित सैंकड़ों प्रतिष्ठित गोष्ठियों में उन्हें अपने अनुसंधान पत्र को पेश करने के लिए बुलाया गया.

डॉ हसन ने कहा कि रॉयल सोसायटी ऑफ केमेस्ट्री और रॉयल सोसाइटी ऑफ बायोलॉजी में बतौर फेलो शामिल किए जाने के लिए मैं खुश और सम्मानित महसूस कर रहा हूं. ये फेलोशिप बहुत बड़ा सम्मान है. अंततः मेरी कड़ी मेहनत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली. मैं अपने सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के प्रति तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूं. जिन्होंने मेरा उत्साह बढ़ा कर मेरी मदद की. इसके अलावा जामिया मिल्लिया इस्लामिया मुझे बेहतरीन ढांचागत सुविधाएं मुहैया करा रहा है.

जामिया बिरादरी और डॉ हसन के साथ लैब में अनुसंधान कार्य कर रहे उनके छात्र उन्हें मिले इस सम्मान से बहुत ही ज्यादा खुश हैं. जामिया के सेंटर फॉर इंटरडिसप्लनेरी रिसर्च इन बेसिक साइंसेज के पूर्व निदेशक, प्रोफेसर फैजान अहमद ने कहा कि डॉ हसन को एफआरएससी और एफआरएसबी के लिए चुने जाने पर मैं बहुत ज्यादा खुश हूं. ये सम्मान सिर्फ उन लोगों को दिया जाता है, जिन्होंने केमेस्ट्री और बायोलॉजी के क्षेत्र में बहुत ही अच्छा काम किया है. मैं डॉ हसन को मिले इस बड़े सम्मान के लिए उन्हें तहे दिल से मुबारकबाद देता हूं.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay