एडवांस्ड सर्च

ये है एलजीबीटी परेड का इतिहास, जानें कहां से आया इंद्रधनुषी फ्लैग

एलजीबीटी परेड जिसे पूरी दुनिया में प्राइड परेड (गर्वोत्सव) के रूप में पहचान मिल चुकी है. इस परेड में इस कम्युनिटी के लोग हाथों में एक छह रंगों वाला झंडा लेकर निकलते हैं. आइए जानें, इस परेड का इतिहास और उस झंडे के रंगों से जुड़े तथ्य.

Advertisement
aajtak.in [Edited by: मानसी मिश्रा ]नई दिल्ली, 02 July 2019
ये है एलजीबीटी परेड का इतिहास, जानें कहां से आया इंद्रधनुषी फ्लैग प्रतीकात्मक फोटो

एलजीबीटी परेड जिसे पूरी दुनिया में प्राइड परेड (गर्वोत्सव) के रूप में पहचान मिल चुकी है. इस परेड में इस कम्युनिटी के लोग हाथों में एक छह रंगों वाला झंडा लेकर निकलते हैं. आइए जानें, इस परेड का इतिहास और उस झंडे के रंगों से जुड़े तथ्य.

इस साल प्राइड के 50 साल पूरे होने के जश्न की मेजबानी न्यूयॉर्क अंतर्राष्ट्रीय एलजीबीटी प्राइड परेड कर रहा है. इसे स्टोनवैल 50 के रूप में जाना जाता है. जानें इस परेड के पूरे इतिहास के बारे में.

पूरे एलजीबीटीक्यू समुदाय के लिए ये परेड एक तरह के विशेष उत्सव के तौर पर मनाया जाता है. इसके जरिये वे दैहिक चेतना, खुद की पहचान और यौनिक मुक्ति का संदेश देते हैं. न्यूयॉर्क शहर की क्रिस्टोफर स्ट्रीट पर प्राइड परेड का आयोजन किया जाता है. यह समलैंगिकों की प्राइड वॉक है. अब धीरे-धीरे भारत के तमाम शहरों में भी प्राइड वॉक प्रचलित हो रही है.

इस परेड में हिस्सा लेने वाले लोग इस वॉक के जरिये ये स्थापित करने पर विश्वास करते हैं कि हमें अपनी विशेष पहचान के लिए मुंह नहीं छिपाना है. हम भी सिर उठाकर कह सकते हैं कि हम  इस समाज का हिस्सा हैं. इस परेड को दुनिया भर में अलग-अलग नाम से जाना जाता है. कहीं ये गे प्राइड, प्राइड वॉक, प्राइड मार्च के तौर पर जानी जाती है तो कई जगहों पर इसे गे परेड, गे वाक, गर्वोत्सव या समलैंगिक और ट्रांसजेंडरों का जुलूस भी कहा जाता है.

ऐसे हुई इस परेड की शुरुआत:

एलजीबीटी परेड की शुरुआत अमेरिका से हुई. कहा जाता है कि इसकी शुरुआत तब हुई जब अमेरिका में भी समलैंगिकता को गुनाह माना जाता था. इसे मान्यता दिलाने के लिए आंदोलन की नींव  1950 में रखी गई. फिर साल 1960 के बाद से बड़े  चेंज आए. एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में कुछ गे बसेरे और बार का विरोध होने पर अमेरिका में जितने भी समलैंगिक और ट्रांसजेंडर थे वे सड़कों पर उतर आए. यही दुनिया की पहली प्राइड परेड के तौर पर पहचानी गई.

जानें,  एलजीबीटीक्यू के उस सतरंगी झंडे की कहानी

चटकीले छह रंगों वाला इंद्रधनुष सा दिखने वाला यह झंडा समलैंगिकों के गर्व की पहचान से जुड़ा है. इस झंडे में लाल, ऑरेंज, पीला, नीला,हरा और बैंगनी रंग शामिल है. जो देखने से इंद्रधनुष जैसा दिखता है. इंद्रधनुषी झंडा एलजीबीटी समुदाय का प्रतीक है.

जब भी एलजीबीटी समुदाय के लोग और कई प्रदर्शनकारी समलैंगिकता का समर्थन करना चाहते हैं तो वह इन झंडों को घरों के सामने लगाकर समलैंगिकता के लिए अपना समर्थन जाहिर करते हैं. वहीं सड़कों पर विरोध करने के दौरान भी आपको उनके हाथों में ये इंद्रधनुषी झंडा देखने को मिल जाएगा.

समलैंगिकों का ये झंडा सबसे पहले सेन फ्रांसिस्को के कलाकार गिल्बर्ट बेकर ने एक स्थानीय कार्यकर्ता के कहने पर समलैंगिक समाज को एक पहचान देने के लिए बनाया था. सबसे पहले उन्होंने 5 पट्टे वाले "फ्लैग ऑफ द रेस" से प्रभावित होकर इस आठ पट्टे वाले झंडे को बनाया था. बता दें, उनका निधन साल 2017 में 65 साल की उम्र में हुआ था.

इस झंडे में आठ रंग होते थे, जिसमें (ऊपर से नीचे) गुलाबी रंग सेक्स को, लाल रंग जीवन को, नारंगी रंग चिकित्सा, पीला रंग सूर्य को, हरा रंग शांति को, फिरोजा रंग कला को, नीला रंग सामंजस्य को और बैंगनी आत्मा को दर्शाता था.

अब हैं सिर्फ छह रंग

अब इस झंडे में 6 रंग है. 1979 के समलैंगिक परेड लिए जब झंडा बनने वाला था तो गुलाबी और फिरोजी रंग को हटा दिया गया. बाद में नीले रंग को भी शाही नीले रंग से बदल दिया गया. बाद में इन छह रंगों को छह पट्टियों में बदल दिया गया. जिसके बाद ये इंद्रधनुषी झंडा समलैंगिकों सम्मान के प्रतीक के रूप में स्थापित है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay