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सहारनपुर लोकसभा सीट: फिर खिलेगा कमल या SP-BSP दिखाएंगे दम?

Saharanpur Loksabha constituency 2019 का लोकसभा चुनाव अपने आप में ऐतिहासिक होने जा रहा है. लोकसभा सीटों के लिहाज से सबसे बड़ा प्रदेश उत्तर प्रदेश की सहारनपुर लोकसभा सीट क्यों है खास, इस लेख में पढ़ें...

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aajtak.in
मोहित ग्रोवर नई दिल्ली, 05 February 2019
सहारनपुर लोकसभा सीट: फिर खिलेगा कमल या SP-BSP दिखाएंगे दम? Saharanpur lok sabha constituency

दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है. उत्तर प्रदेश जनसंख्या और लोकसभा सीटों के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सहारनपुर लोकसभा सीट नतीजों, राजनीतिक समीकरण और जातीय समीकरण के हिसाब से काफी मायने रखती है. 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में ये सीट भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थी. इस सीट से बीजेपी के राघव लखनपाल को बड़ी जीत हासिल हुई थी. इस लोकसभा चुनाव में बीजेपी के पास महागठबंधन का तोड़ निकालते हुए सीट को बरकरार रखने की चुनौती है.

सहारनपुर सीट का इतिहास

सहारनपुर सीट पर सबसे पहला चुनाव 1952 में हुआ था, तब से लेकर 1977 तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा था. 1977 में इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव से लेकर 1996 में तक इस सीट पर जनता दल या जनता पार्टी का कब्जा रहा. हालांकि बीच में 1984 के चुनाव में कांग्रेस ने वापसी की थी. 1996 के बाद ये सीट दो बार भारतीय जनता पार्टी, दो बार बहुजन समाज पार्टी, एक बार समाजवादी पार्टी और फिर 2014 में भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई.

सहारनपुर सीट का समीकरण

सहारनपुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बड़ी लोकसभा सीटों में से एक है. यहां कुल 16,08,833 वोटर हैं. इनमें 8,73,318 पुरुष, 7,35,515 महिला वोटर हैं. 2014 में इस सीट पर कुल 74.2 फीसदी वोट डले थे. इस सीट पर 6267 वोट NOTA को दिए गए थे. सहारनपुर में कुल 56.74 फीसदी हिंदू, 41.95 फीसदी मुस्लिम जनसंख्या है. (2011 के जनगणना के अनुसार)

सहारनपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं. जिनमें बेहट, सहारनपुर नगर, सहारनपुर, देवबंद और रामपुरमनिहारन शामिल हैं. इन पांच सीटों में से दो सीटें भारतीय जनता पार्टी, दो कांग्रेस और एक समाजवादी पार्टी के खाते में आई थी.

2014 लोकसभा चुनाव का नतीजा, 2014

2014 में राघव लखनपाल को देशभर में चल रही मोदी लहर का बड़ा फायदा मिला था. लखनपाल ने अपने प्रतिद्वंदी को 65 हजार से अधिक वोटों से मात दी थी. यहां भारतीय जनता पार्टी का सीधा मुकाबला कांग्रेस के इमरान मसूद से था. इमरान मसूद 2014 में अपने बयानों के कारण काफी चर्चा में रहे थे.

राघव लखनपाल, भारतीय जनता पार्टी, कुल वोट मिले 472,999, 39.6 फीसदी

इमरान मसूद, कांग्रेस, कुल वोट मिले 407,909, 34.2 फीसदी

जगदीश सिंह राणा, बसपा, कुल वोट मिले 235,033, 19.7 फीसदी

सांसद राघव लखनपाल का प्रोफाइल

युवा सांसदों में से एक गिने जाने वाले राघव लखनपाल अपने पिता निर्भयपाल शर्मा की हत्या होने के बाद राजनीति में आए. निर्भयपाल शर्मा भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व में विधायक रह चुके हैं, 2000 में उनकी हत्या कर दी गई थी. इसी के बाद राघव लखनपाल राजनीति में आए, लगातार तीन बार विधायक चुने जाने के बाद 2014 में वह लोकसभा का चुनाव लड़े और सांसद चुने गए.

2017 में सहारनपुर में हुई हिंसा के दौरान उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था, उनपर हिंसा को भड़काने का आरोप था. 2014 के आंकड़ों के अनुसार, राघव लखनपाल के पास कुल 3 करोड़ 54 लाख रुपये की संपत्ति है. इसमें 3 करोड़ की अचल और 54 लाख चल संपत्ति शामिल है.

संसद में राघव लखनपाल का प्रदर्शन

राघव लखनपाल ने 16वीं लोकसभा में कुल 59 बहस में हिस्सा लिया, कुल 346 सवाल किए. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने लोकसभा में कुल 2 बिल पेश किए. 2017 में उन्होंने एक बिल पेश किया था, जिसमें उन्होंने मांग की थी कि जनसंख्या को नियंत्रण में लाने के लिए कानून बनाया जाए और बच्चों की संख्या सिर्फ दो तक ही सीमित की जाए.

राघव लखनपाल लोकसभा में कई कमेटियों का हिस्सा रह चुके हैं. इनमें 2014 के दौरान विदेशी मामलों की स्टैंडिंग कमेटी, शहरी विकास मामले की कमेटी में शामिल रहे. सांसद निधि के तहत मिलने वाले 25 करोड़ रुपये के फंड में से उन्होंने कुल 98.53 फीसदी रकम खर्च की.

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