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कोर्ट ने दिया आदेश- तेलंगाना बोर्ड 27 मई को जारी करें 12वीं के परिणाम

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि तेलंगाना बोर्ड कक्षा 12वीं के परिणाम 27 मई तक घोषित कर दें...

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aajtak.in [Edited by: प्रियंका शर्मा ]नई दिल्ली, 16 May 2019
कोर्ट ने दिया आदेश- तेलंगाना बोर्ड 27 मई को जारी करें 12वीं के परिणाम प्रतीकात्मक फोटो

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने बुधवार को इंटरमीडिएट शिक्षा बोर्ड (BIE) को निर्देश दिया कि इंटरमीडिएट यानी कक्षा 12वीं के विद्याथियों की कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन करने के बाद वह 27 मई तक परिणाम घोषित करें. न्यायालय ने इंटरमीडिएट शिक्षा बोर्ड से यह भी कहा कि वह परिणाम के साथ-साथ उत्तर पुस्तिका (कॉपी) भी ऑनलाइन जारी कर दी जाए.

बोर्ड ने अदालत को सूचित किया कि उत्तर पुस्तिका का पुनर्मूल्यांकन बुधवार रात तक पूरा हो जाएगा और संशोधित मार्कशीट गुरुवार से जारी की जाएगी. अदालत ने ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज को भी नोटिस जारी किया, जो एक आईटी कंपनी है जिसने परिणामों को तैयार किया है और जिस पर नतीजों को बनाने की प्रक्रिया में लापरवाही का आरोप लगा है.

न्यायालय ने 6 जून तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी. बाल अधिकारों के लिए काम करने वाले एक गैर सरकारी संगठन, 'बाला हक्कुला संघम' ने अदालत में याचिका दायर की है जिसमें उसने अंक देने में भयावह गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. याचिकाकर्ता के वकील दामोदर रेड्डी ने संवाददाताओं से कहा कि इंटरमीडिएट शिक्षा बोर्ड ने अपनी वेबसाइट पर छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को रखने पर सहमति जताई है.

आपको बता दें, तेलंगाना बोर्ड ने 18 अप्रैल को इंटरमीडिएट के नतीजों की घोषणा की थी.  फरवरी-मार्च में आयोजित कक्षा 11 और 12 की परीक्षा में कुल 9.74 लाख विद्यार्थियों शामिल हुए थे, जिनमें से 3.28 लाख विद्यार्थी पास अंक प्राप्त करने में असफल रहे. जांच में पता चला था कि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए बोर्ड ने एक आईटी कंपनी को किराए पर रखा था जिसने अपने काम में बहुत बड़े पैमाने पर लापरवाही की जिसकी वजह से विद्यार्थियों ने अपनी जान दे दी.

परीक्षा में खराब  प्रदर्शन और फेल हो जाने के कारण कम से कम 22 छात्रों ने खुदकुशी कर ली. इसके खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए. छात्रों और अभिभावकों ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गड़बड़ी और अंकतालिकाओं के प्रसंस्करण और सारणीकरण में गलतियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया. इसके बाद राज्य सरकार ने 24 अप्रैल को उन सभी 3.28 लाख छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं के पुन: सत्यापन की घोषणा की जो परीक्षा पास नहीं कर सके थे.

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