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BITS को भी नहीं 'उत्कृष्ट' का दर्जा, Jio इंस्टीट्यूट पर था विवाद

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से जारी की गई 'इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस' की लिस्ट एक बार फिर चर्चा में है. दरअसल मंत्रालय ने 6 संस्थानों की इस लिस्ट में से एक संस्थान को कम कर दिया है, जिसका नाम बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी एंड साइंस (बिट्स) है.

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aajtak.in [Edited By: मोहित पारीक]नई दिल्ली, 25 July 2018
BITS को भी नहीं 'उत्कृष्ट' का दर्जा, Jio इंस्टीट्यूट पर था विवाद प्रतीकात्मक फोटो

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से जारी की गई 'इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस' की लिस्ट एक बार फिर चर्चा में है. दरअसल मंत्रालय ने 6 संस्थानों की इस लिस्ट में से एक संस्थान को कम कर दिया है, जिसका नाम बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी एंड साइंस (बिट्स) है. मंत्रालय के इस फैसले के बाद अब इस लिस्ट में सिर्फ 4 संस्थान ही रह गए हैं, क्योंकि इससे पहले ही मंत्रालय ने जियो इंस्टीट्यूट का नाम हटा दिया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बिट्स को भी लेटर ऑफ इंटेंट (एलओई) का दर्जा ही दिया जाएगा और इसे आईओई से बाहर रखा जाएगा. रिपोर्ट के अनुसार एक प्राइवेट डीम्ड यूनिवर्सिटी तब ही एक इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस के योग्य हो सकती है जब वो यूजीसी के मानकों के अनुसार हो. वहीं साल 2015 में बिट्स समेत 10 डीम्ड यूनिवर्सिटी को अपने ऑफ कैंपस सेंटर बंद करने के आदेश दिए गए थे, जो कि यूजीसी की इजाजत के बिना खोले गए थे.

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बता दें कि मंत्रालय ने 3 सरकारी और 3 निजी संस्थानों के नाम 'इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस' के रुप में जारी किए थे. इन 3 संस्थानों में बिट्स, मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन और जियो इंस्टीट्यूट का नाम शामिल किया गया था. हालांकि जियों इंस्टीट्यूट अभी अस्तित्व में नहीं आई है और उस पर बढ़ते विवाद को लेकर मंत्रालय ने जियो को लेटर ऑफ इंटेट देने का फैसला किया था.   

पूरी करनी होगी शर्त

सरकार का कहना है कि यदि तीन साल के बाद रिलायंस फाउंडेशन ने अपने घोषित प्रस्तावों को लागू नहीं किया तो उससे यह 'उपाधि' (इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेन्स यानी उत्कृष्ट संस्थान की) वापस ली जा सकती है.  सरकार का यह भी कहना है कि जियो का प्रस्ताव एक विशेषज्ञ समिति द्वारा तय गाइडलाइन के मुताबिक था, इसलिए उसे मंजूरी दी गई.

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क्या है इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस

इस लिस्ट में शामिल होने से संस्थानों के स्तर और गुणवत्ता को तेजी से बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और पाठ्यक्रमों को भी जोड़ा जा सकेगा. इसके अलावा विश्व स्तरीय संस्थान बनाने की दिशा में जो कुछ भी जरूरी होगा, किया जा सकेगा. जावड़ेकर ने बताया कि रैंकिंग को बेहतर बनाने के लिये टिकाऊ योजना, सम्पूर्ण स्वतंत्रता और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों को सार्वजनिक वित्त पोषण की जरूरत होती है.

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