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प्रोटेस्ट के डर से 100 साल में पहली बार स्थगित हुई भारतीय साइंस कांग्रेस

विज्ञान कांग्रेस भारतीय वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी वार्षिक बैठक हैं. सुरक्षा अधिकारियों से  पता चला है कि उस्मानिया यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दलितों और अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव पर कम सरकारी भर्तियां करने के विरोध में प्रदर्शन कर सकते हैं.

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Sahitya Aajtak 2018
aajtak.in [Edited By: प्रियंका शर्मा]नई दिल्ली, 21 December 2017
प्रोटेस्ट के डर से 100 साल में पहली बार स्थगित हुई भारतीय साइंस कांग्रेस Osmania University

100 साल में पहली बार ऐसा हो रहा है जब जनवरी के महीने में होनी वाली भारतीय साइंस कांग्रेस (ISC)के कार्यक्रम को स्थगित कर दिया गया है. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जाने वाले थे, जिसे स्थगित कर दिया गया है.

स्थगित करने की वजह

यूनिवर्सिटी ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन की आशंका जताई है. 3 से 7 जनवरी के बीच होने वाली इस साइंस कांग्रेस में परिसर के अंदर गड़बड़ी होने की संभावना है. जिसके चलते उस्मानिया यूनिवर्सिटी ने इस कार्यक्रम की मेजबानी में असमर्थता जताई है.

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इस मुद्दे पर विरोध की आशंका

इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन (ISCA) के महाप्रबंधक डॉ. अच्युत सामंत से प्राप्त जानकारी के आधार पर, आईएससी के स्थगन (postponement) को विज्ञान और मिनिस्ट्री ऑफ टेक्नोलॉजी को सूचित कर दिया गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ स्टूडेंट्स का विरोध

विज्ञान कांग्रेस भारतीय वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी वार्षिक बैठक हैं. सुरक्षा अधिकारियों से पता चला है कि उस्मानिया यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दलितों और अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव पर कम सरकारी भर्तियां करने के विरोध में प्रदर्शन कर सकते हैं.

स्टूडेंट की आत्महत्या सबसे बड़ी वजह

ISCA के जनरल सेक्रेटरी प्रोफेसर गंगाधर ने बताया कि, मंगलवार की रात (19 दिसंबर, 2017) उस्मानिया यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर ने बताया कि परिसर में गड़बड़ी की वजह से निर्धारित समय पर विज्ञान कांग्रेस की शुरुआत करना संभव नहीं होगा. आगे उन्होंने कहा कि एक छात्र ने 3 दिसंबर को आत्महत्या कर ली थी.

वहीं आत्महत्या का कारणअभी तक पता नहीं चला है. इस खबर से हम सभी सदमे मे हैं. वहीं इस घटना के बाद से कैंपस में प्रदर्शन चल रहे हैं. वहीं आत्महत्या के पीछे नौकरी न मिलना कारण माना जा रहा है. बता दें, 21 साल के जिस स्टू़डेंट ने आत्महत्या की है. उसका नाम ईरामिना मुरली था और वह MSc(फिजिक्स) की पढ़ाई कर रहा था.

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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मुरली ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था कि वह पढ़ाई के तनाव से निपटने में असमर्थ है, इसलिए अपनी जिंदगी खत्म करना चाहता हूं. स्टूडेंट्स इस बात का विरोध कर रहे हैं. उनका दावा है कि तेलंगाना के निर्माण के बाद सरकारी नौकरियों की कमी आई है. जिसके कारण ये सब हुआ है.

अपने साथी की आत्महत्या की खबर के बाद स्टूडेंट्स में काफी गुस्सा है. जहां सुरक्षा अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को सूचित किया कि भारतीय साइंस कांग्रेस (ISC) के दौरान विरोध हो सकता है. वहीं इस खबर को केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय तक भी पहुंचाया गया था.

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उस्मानिया यूनिवर्सिटी की स्थापना

साल 1917 में उस्मानिया विश्वविद्यालय स्थापित किया गया था. जो अपने पूरे 100 साल पूरा कर रहा है.

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