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भगवत गीता का ज्ञान ऐसे लोगों तक पहुंचा रहा वैज्ञानिक, लगा दिए खुद के एक करोड़

भोपाल के रहने वाले वैज्ञानिक डॉ मुरली कृष्ण के जीवन में गीता के संदेशों ने अपनी पूरी छाप छोड़ी है. बस इसीलिए उन्होंने इसे आम लोगों तक पहुंचाने की ठान ली. आइए जानें, कैसे एक वैज्ञानिक अनूठे ढंग से लोगों तक गीता का ज्ञान पहुंचा रहा है.

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aajtak.inनई दिल्ली, 20 August 2019
भगवत गीता का ज्ञान ऐसे लोगों तक पहुंचा रहा वैज्ञानिक, लगा दिए खुद के एक करोड़ उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के साथ परिवार के साथ डॉ मुरलीकृष्ण

  • गीता को मैनेजमेंट से जोड़कर युवाओं तक पहुंचा रहा भोपाल का वैज्ञानिक.
  • गीता को लोगों तक पहुंचाने में लगा दिया अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा.
  • उन्होंने जो जरिया चुना, वो काफी रोचक है और हर मंच पर सराहा जा रहा है.

कहते हैं श्रीमद्भगवद गीता में जीवन की हर समस्या का समाधान छुपा हुआ है. कदम दर कदम इन प्रॉब्लम्स को कैसे सुलझाते हुए आगे बढ़ना है, ये गीता हमें सिखाती है. भोपाल के रहने वाले वैज्ञानिक डॉ मुरली कृष्ण के जीवन में गीता के संदेशों ने अपनी पूरी छाप छोड़ी है. बस इसीलिए उन्होंने विज्ञान की दुनिया में रहते हुए गीता को अपने सामाजिक सरोकार से जोड़ा और इसे आम लोगों तक पहुंचाने की ठान ली. इसके लिए उन्होंने जो जरिया चुना, वो काफी रोचक है और हर मंच पर सराहा जा रहा है, आइए जानें, कैसे एक वैज्ञानिक अनूठे ढंग से लोगों तक गीता का ज्ञान पहुंचा रहा है.

भारत के शीर्ष फार्मास्यूटिकल कंपनियों में से एक ल्युपिन लिमिटेड में सीनियर साइंटिस्ट डॉ डी. मुरली कृष्णा ने गीता को संगीत में ढालकर लोगों तक पहुंचाने की पहल की है. उन्होंने एक साल पहले सम्भावमि युगे युगे शीर्षक से भगवत-गीता पर एक ऑडियो एल्बम निकाला है. इसके साथ ही इसी पर किताब भी लिखी है.

डॉ मुरली कृष्ण ने आजतक से बातचीत में बताया कि श्रीमद्भागवत गीता 5000 वर्ष की प्राचीनता समेटे हुए है. सभी जानते हैं कि भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्ध क्षेत्र में अर्जुन को जीवन में कर्म के विभिन्न पहलुओं को समझाया. भगवत-गीता सभी वेदों का सार है, यह जीवन के सिद्धांत को समझाता है और वास्तव में एक पथदर्शी है.

साल 2018 में आंध्र प्रदेश के एक प्रसिद्ध विद्वान और लोकप्रिय टीवी व्यक्तित्व ब्रह्मर्षि डॉ वद्दीपार्थी पद्माकर ने उनकी एलबम लांच की थी. तब से लगातार उनके इस एलबम को लोग पसंद कर रहे हैं. उन्होंने अपनी ऑडियो कैसेट देश के उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू सहित भाजपा नेता उमा भारती, लाल कृष्ण आडवाणी, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु आदि को दे चुके हैं.

मूलतः आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी निवासी डॉ मुरली कृष्ण के पिता डी.एस.आर. दीक्षितुलु और मां डी. सूर्य कुमारी दोनों ही शैक्षणिक पृष्ठभूमि से हैं. डॉ मुरली कृष्णा पिछले 30 वर्षों से ल्यूपिन लिमिटेड से जुड़े हैं. पिछले 18 सालों से भोपाल में रह रहे डॉ मुरली कृष्णा एक वैज्ञानिक हैं और मध्य प्रदेश में मंडीदीप, पिथमपुर और गुजरात में अंकलेश्वर में ल्युपिन लिमिटेड के प्रक्रिया अनुसंधान कार्य को लीड कर रहे हैं.

डॉ मुरली कृष्णा ने बताया कि उन्होंने भगवद गीता पर आधारित अपनी पुस्तक एवं ऑडियो की रचना उच्च सिद्धांतों के साथ नेतृत्व के गुण युवाओं तक पहुंचाने के लिए की है. ये ऑडियो व्यवहार और व्यक्तित्व विकास की दृष्टि से युवा पीढ़ी के लिए बेहद उपयोगी है. उनके काम के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, भारतीय प्रबंधन संस्थान, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, एमएचआरडी सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कई प्रोफेसरों और प्रमुखों ने इस परियोजना को छात्रों के लिए उपयोगी बताया है.

डॉ मुरली कृष्णा ने बताया कि तीन वर्षों की कठिन मेहनत एवं स्वयं के एक करोड़ से अधिक की धनराशि से निर्मित यह प्रयास किसी भी व्यावसायिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए नहीं है. उन्होंने कहा कि उनका यह प्रयास गीता के सार को आम जन तक निशुल्क पहुंचाने के लिए है. उन्होंने भगवान कृष्ण द्वारा बताए गए भगवद गीता में वर्णित सूत्रों को चुनिंदा रूप से संकलित किया और हमारे सामान्य जीवन में सभी के लाभ के लिए संकल्पित किया.

उन्होंने इसे शास्त्रीय कर्नाटक रागों के आधार पर और हिंदी में वर्णन के साथ 108 श्लोक गायन के साथ बनाया है. उनके इस प्रयास के तेलुगू संस्करण में उपलब्ध ऑडियो और पुस्तक का विमोचन भी साथ में ही किया किया. उन्होंने यूट्यूब पर हिंदी और तेलुगू संस्करणों के दोनों ऑडियो अपलोड किए हैं. ऑडियो की लंबाई लगभग 99 मिनट है.

जीवन मे सही मार्ग के चयन के लिए आवश्यक गीता के सार को आम जन तक पहुंचाने के महान विचार के साथ डॉ मुरली कृष्णा ने विमोचन के दौरान 1000 ऑडियो सीडी और पुस्तकें निशुल्क वितरित की हैं. डॉ मुरली कृष्ण का दावा है कि भगवद गीता पर हिंदी में इस प्रकार का ऑडियो एल्बम पहली बार प्रकाशित हुआ है जिसमे विषाद, तनाव और अवसाद को दूर करके जीवन में शांति और खुशी प्राप्त करने के लिए श्रीमद भगवद गीता की शिक्षाओं को वर्गीकृत और संकल्पित किया गया है.

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