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टॉपर से बढ़कर है केरल की ये बेटी, पैरों से लिखकर पास किए 10वीं एग्जाम

कहते हैं, इन्सान कोई भी जंग हाथों से नहीं बल्कि हौसले से जीतता है. केरल की देविका ने इसे सच कर दिखाया है. बिना हाथों के जन्म लेने वाली देविका ने इसी साल अपने पैरों से लिखकर दसवीं की परीक्षा दी थी. आइए, जानें देविका की पूरी कहानी.

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aajtak.in
मानसी मिश्रा नई दिल्ली, 10 September 2019
टॉपर से बढ़कर है केरल की ये बेटी, पैरों से लिखकर पास किए 10वीं एग्जाम देविका Image Credit: Facebook

कहते हैं, इन्सान कोई भी जंग हाथों से नहीं बल्कि हौसले से जीतता है. केरल की देविका ने इसे सच कर दिखाया है. बिना हाथों के जन्म लेने वाली देविका ने इसी साल अपने पैरों से लिखकर दसवीं की परीक्षा दी थी. आइए, जानें देविका की पूरी कहानी.

बिना हाथों के जन्मी देविका को सबसे पहला हौसला दिया उसकी पहली गुरु यानी मां ने. एक दिन उसकी मां ने उसके पैर की उंगलियों के बीच एक पेंसिल बांध दी थी, बस इसके बाद तो उसकी यात्रा शुरू हो चुकी थी. पहले अक्षर और फिर संख्याएं लिखने की कोशिश करते करते वो लिखना सीख चुकी थी.

अब, इस वर्ष 10वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में सभी विषयों में A+ स्कोर करने के बाद 16 वर्षीय इस बच्ची को हर तरफ से बधाई संदेश मिल रहे हैं. हाल ही में आए एसएसएलसी परीक्षा परिणाम आने के बाद देविका की मानो जिंदगी बदल चुकी है. हर तरफ से उसे तारीफें और उपहार मिल रहे हैं. देविका को अचानक इतनी खुशियां मिल गई हैं कि उसका हौसला और भी बढ़ गया है.

केरल के मलप्पुरम में जन्मी देविका ने अपने सपनों के रास्ते में अपनी शारीरिक सीमाओं को कभी आड़े नहीं आने दिया. अब दसवीं पास करने के बाद वो आईएएस बनने का सपना देख रही है. वो देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा में शामिल होकर अपने परिवार और देश का नाम ऊंचा करना चाहती है. वो अपने लक्ष्य के लिए कड़ी मेहनत कर रही है.

देविका के माता-पिता, सुजीत और सजिव ने हमेशा उसे पढ़ने में सहयोग दिया. वो चाहते थे कि वो अपनी बेटी को पढ़ा-लिखाकर इतना काबिल बना दें कि उसे कभी शारीरिक अक्षमता महसूस न हो. यही वजह है कि उन्होंने अपनी बेटी को इतने अच्छे ढंग से पढ़ाया कि उसने बिना किसी हेल्पर की मदद से अपने पैरों से लिखकर परीक्षा दी.

देविका अपनी कोशिश से अब मलयालम, अंग्रेजी और हिंदी में लिखने में कुशल है.  देविका मलप्पुरम के वल्लिकुनु में चंदन ब्रदर्स हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ी है. देविका को उनके स्कूल में टीचर्स ने भी पूरा सहयोग किया. द बेटर इंडिया से बातचीत में देविका के पिता ने कहा कि देविका दूसरी बच्च‍ियों की तरह ही है. कभी-कभी बहुत खुश होती है और कभी-कभी गुस्सा भी आता है. वो पूरे  आत्मविश्वास से भरी है. तबीपलम पुलिस स्टेशन के एक वरिष्ठ सिविल पुलिस अधिकारी सजीव ने कहा कि देविका की सफलता के पीछे उसकी कड़ी मेहनत है जिसके कारण उसे सफलता मिली है. देविका की मां सजीव ने कहा कि देविका को जिस तरह से इतने पुरस्कार और सम्मान मिल रहे हैं, वो बहुत रोमांचित है और उसका हौसला भी बढ़ा है.

दसवीं पास करने के बाद देविका ने 11 वीं कक्षा में ह्यूमैनिटी लिया है, अब वो इसी स्ट्रीम में ग्रेजुएशन करके सिविल सर्विस की तैयारी करना चाहती है. सिर्फ पढ़ाई में ही नहीं देविका आर्ट में भी बहुत अच्छी हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी आर्ट को कोझिकोड स्वप्नाचित्रा आर्ट गैलरी में प्रदर्शनी में लगाया था. इसके अलावा सिंगिंग में भी देविका को बहुत रुचि है. साल 2019 में उसने जूनियर रेड क्रॉस में सर्वश्रेष्ठ कैडेट का पुरस्कार जीता था.

देविका की कहानी हमें सिखाती है कि इंसान अगर सफल होना चाहे तो कोई भी अक्षमता उसके आड़े नहीं आती. वो सभी मुश्किलों को हराकर आगे बढ़ सकते हैं.

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