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...बंद हो जाएगी पुरानी दिल्ली की दरियागंज संडे बुक मार्केट, ये है वजह

पुरानी दिल्ली की पहचान से जुड़ी दरियागंज की ये मार्केट हर जरूरतमंद  तक किताबें पहुंचाती रही है. अब दिल्ली उच्च न्यायालय के एक जुलाई के आदेश के बाद संडे बुक मार्केट को बंद कर दिया गया है.

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aajtak.in
मानसी मिश्रा नई दिल्ली, 04 August 2019
...बंद हो जाएगी पुरानी दिल्ली की दरियागंज संडे बुक मार्केट, ये है वजह प्रतीकात्मक फोटो

पुरानी दिल्ली की पहचान से जुड़ी दरियागंज की ये मार्केट हर जरूरतमंद तक किताबें पहुंचाती रही है. अब दिल्ली उच्च न्यायालय के एक जुलाई के आदेश के बाद संडे बुक मार्केट को बंद कर दिया गया है. इससे कई लोग बेरोजगार हो गए हैं. पहली बार यहां किताब मार्केट नहीं लगी, जिससे इलाके में सन्नाटा पसरा रहा, साथ ही कई चेहरों पर उदासी के बादल मंडरा रहे थे.

अदालत के निर्देश के अनुसार, जामा मस्जिद के पास नेताजी सुभाष मार्ग (एनएस मार्ग) में रविवार को किसी भी साप्ताहिक बाजार की अनुमति नहीं दी जाएगी. बता दें, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने अदालत को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कहा था कि एनएस मार्ग एक बहुत व्यस्त सड़क है जहां हर समय हाई ट्रैफिक वॉल्यूम रहता है. ऐसे में जब पुस्तक विक्रेता फुटपाथ पर कब्जा कर लेते हैं तो पैदल चलने वालों के लिए कोई जगह ही नहीं बचती है.

वहीं इसका दूसरा पहलू ये है कि सालोंसाल से स्टूडेंट, प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे लोगों, शिक्षकों और बुक लवर्स को किताबें बेचने वाले लोगों के सामने कोई रास्ता नहीं बचा है. हिन्दुस्तान टाइम्स से पहाड़गंज सिटी सदर डिप्टी कमिश्नर ” Veditha Reddy ने कहा कि हम कोर्ट के आदेश का पालन कर रहे हैं. कोर्ट ने अनेताजी सुभाष मार्ग को 'नो-स्क्वाटिंग और नो-हॉकिंग' जोन घोषित किया है, इसलिए किताब बाजार यहां नहीं लग सकता है

कोर्ट के इस फैसले से 250 से अधिक पुस्तक विक्रेताओं पर की रोजी रोटी पर बन आई है. वीकेंड बाजारों ही इनमें से अधिकांश के लिए आय का अकेला स्रोत है. 20 साल तक दरियागंज में किताबें बेचने वाले सुरिंदर सिंह ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि मैं यहां किताबें बेचकर हर हफ्ते करीब 8000 से 10,000 तक कमा लेता था इससे पर्याप्त रूप से घर का खर्च निकल आता था. अब अपने परिवार के फ्यूचर को लेकर सोच रहा हूं. पता नहीं अब ये बाजार फिर से खुलेगा भी या नहीं.

उत्तरी कार्पोरेशन के अधिकारियों ने कहा कि वे बाजार को यहां से स्थानांतरित करने की कोशिश कर रहे हैं. हमने किताब विक्रेताओं को रविवार को रामलीला मैदान से बाजार चलाने की सलाह दी, जब तक कि एक टाउन वेंडिंग कमेटी का गठन नहीं हो जाता और उनके लिए एक स्थायी वैकल्पिक स्थान नहीं मिल जाता है, लेकिन विक्रेताओं ने इनकार कर दिया. हम उनकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि ये लोकप्रिय बाजार फिर से चल सके.

रामलीला मैदान के विकल्प के बारे में किताब विक्रेताओं का कहना है कि ये मार्केट पहले से ही लोकप्रिय है. दूसरा कि रामलीला मैदान में तमाम प्रोग्राम्स और रैलियां होती है. वैसे भी, हम केवल रविवार को ही बाजार चलाते हैं. फिर भी हम गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के आसपास के दिनों में घाटे में रहते हैं. रामलीला मैदान में हमारा धंधा एकदम न के बराबर हो जाएगा.

पुरानी दिल्ली के डिलाइट सिनेमा और गोलछा सिनेमा के बीच चलने वाला बाजार पिछले साल जनवरी में भी अस्थायी रूप से बंद हो गया था, लेकिन पांच सप्ताह के ब्रेक के बाद इसे फिर से खोल दिया गया था. अब देखना ये है कि अब दोबारा इस बाजार को चलने की कोई उम्मीद जगती है या नहीं.

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