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डीयू लॉ फैकल्टी की डीन प्रो वेद कुमारी ने इस्तीफा दिया, लगाए ये आरोप

प्रो वेद कुमारी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के डीन और हेड के पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने इस्तीफे की वजह कैंपस लॉ सेंटर के प्रोफेसर-इन-चार्ज के गैर-कानूनी और मनमाने कामों को जिम्मेदार ठहराया है. इसके अलावा भी कई आरोप लगाए हैं.

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aajtak.in [Edited by: मानसी मिश्रा ]नई दिल्ली, 18 June 2019
डीयू लॉ फैकल्टी की डीन प्रो वेद कुमारी ने इस्तीफा दिया, लगाए ये आरोप प्रो वेदकुमारी

प्रो वेद कुमारी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ फैकल्टी के डीन और हेड के पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने कैंपस लॉ सेंटर के प्रोफेसर-इन-चार्ज पर गैर-कानूनी और मनमाने तरीके से काम करने का आरोप लगाते हुए उन्हें इस्तीफे का जिम्मेदार ठहराया है. 

दिल्ली विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी की डीन प्रो वेद कुमारी का कार्यकाल अभी तीन महीने बाकी है. आजतक से बातचीत में उन्होंने कहा कि मेरे इस्तीफे की बात पूरी तरह सही है. इसके लिए जरूरी कारणों के बारे में मैंने इस्तीफे में साफ-साफ लिख दिया है. उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा है कि पिछले अनुभव से मेरा अनुमान है कि अगले तीन महीने में हालात में किसी भी तरह बदलने वाले नहीं हैं, इसलिए मैंने इस्तीफा दिया.

प्रो. कुमारी ने 17 जून को इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद मंगलवार को वो अपने कार्यालय नहीं गईं. प्रो. कुमारी ने कहा कि उनके तमाम फोन कॉल्स, पत्र, रिमाइंडर और व्यक्तिगत मुलाकातों के बावजूद विश्वविद्यालय ने जैसा रुख अपनाया है, उससे वह शर्मिंदा और अपमानित महसूस कर रही हैं. कुलपति योगेश त्यागी को दिए त्याग पत्र में उन्होंने कई मुद्दे उठाए हैं.

अपने इस्तीफे में उन्होंने एक चौंकाने वाला कारण लिखा है कि विश्वविद्यालय 31 प्रतिशत उपस्थिति वाले छात्रों को परीक्षा लिखने की अनुमति दे रहा था. उनका आरोप है कि डीयू में अटेंडेंस के फर्जी रिकॉर्ड बनाए जा रहे थे. छात्रों द्वारा मामले में शिकायत के बावजूद, संकाय के प्रोफेसर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई थी. फिलहाल विश्वविद्यालय की ओर से इस्तीफा स्वीकार करने की देर रात तक कोई पुष्ट‍ि नहीं हो सकी थी.

इस्तीफे में दी ये कुछ वजहें

शिक्षकों के लिए छात्रों से मिलने या उन्हें अपने रीसर्च आदि के लिए

कोई कार्यालय आदि नहीं है, उमंग भवन में उन्होंने टीचर्स रूम खोलने की कोशिश की.

किसी स्टूडेंट द्वारा शिक्षक के हमले के संबंध में अनुशासनात्मक समिति की ओर से कार्रवाई नहीं की गई.

क्लिनिकल लीगल एजुकेशन में शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए विदेश से अनुभवी शिक्षक को आमंत्रित करने में फेल.

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