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निवेश: गुजरात में है निवेश सफल

भारत में विकास का पर्याय बन गया है गुजरात. उसने 10वीं पंचवर्षीय योजना में 10.08 फीसदी की वृद्धि दर्ज की, जबकि लक्ष्य 10.02 फीसदी का था.

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aajtak.in
उदय माहूरकर और कौशिक डेकानई दिल्‍ली, 05 November 2011
निवेश: गुजरात में है निवेश सफल गुजरात सरकार

भारत में विकास का पर्याय बन गया है गुजरात. उसने 10वीं पंचवर्षीय योजना में 10.08 फीसदी की वृद्धि दर्ज की, जबकि लक्ष्य 10.02 फीसदी का था. 11वीं पंचवर्षीय योजना के लिए उसका लक्ष्य 11.2 फीसदी वृद्धि हासिल करने का है. राज्‍य में भारी-भरकम निवेश का संकेत इस साल जनवरी में ही मिल गया था, जब अहमदाबाद में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल इंवेस्टर्स का द्विवार्षिक सम्मेलन आयोजित हुआ था.

उस सम्मेलन में 20,00,000 करोड़ रु. से ज्‍यादा के सहमति पत्रों (एमओयू) पर दस्तखत हुए थे और सभी बैंकों ने आगामी परियोजनाओं के लिए 1,65,000 करोड़ रु. का निवेश कर्ज देने का वादा किया था. गुजरात के अतिरिक्त वित्त सचिव मनीष वर्मा कहते हैं, ''निवेश की सुरक्षा की वजह से गुजरात में बैंक कर्ज देने में बहुत उत्साह दिखाते हैं.''

इस प्रदेश में देश के कुछ सबसे बड़े निवेश हुए हैं. नैनो परियोजना के पश्चिम बंगाल से गुजरात आने के बाद ऑटोमोबाइल की दूसरी दिग्गज कंपनियां फोर्ड और पेजियो ने भी यहां कोई 5,000-5,000 करोड़ रु. का निवेश किया है, जबकि ह्युंडई और मारुति भी लगभग इतना ही या उससे अधिक निवेश करने जा रही हैं.निवेश

गुजरात के ऊर्जा, वित्त एवं उद्योग राज्‍यमंत्री सौरभ पटेल कहते हैं, ''बिजली की पक्की सप्लाई से लेकर परियोजनाओं को तुरंत मंजूरी मिलने तक, हमारी ताकत कई स्तरों पर है. राज्‍य में श्रम की स्थिति शांतिपूर्ण और कानून-व्यवस्था बहुत अच्छी है. समुद्र के साथ-साथ लंबी तटवर्ती सीमा होने से गुजरात को आयात और निर्यात में सुविधा का भी लाभ मिलता है.'' उद्योग सचिव माहेश्वर साहू कहते हैं, ''निवेश आकर्षित करने के मामले में गुजरात बेहतर स्थिति में है.''

गुजरात में पूंजी आने की एक बड़ी वजह यह भी है कि भारतीय शेयर बाजार की कुल पूंजी का 30 फीसदी गुजरातियों के हाथ में है. इसलिए इसका एक बड़ा हिस्सा गुजरात की कंपनियों में जाता है. इसके अलावा गुजरात की स्थिर और बेहतर प्रशासन देने वाली सरकार की वजह से भी यहां निवेश का अच्छा माहौल है. गुजरात ने निवेशकों के लिए रास्ता भी एकदम साफ रखा है. अगर कोई निवेशक पटेल, साहू या मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करना चाहता है तो उसे नौकरशाही से किसी तरह की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता.

सूरत के पास ह.जीरा में शेल इंडिया के प्लांट का काम देखने वाले नितिन शुक्ल इसकी पुष्टि करते हैं, ''गुजरात में बड़े और छोटे निवेशकों के लिए भी बहुत अच्छा माहौल है. राज्‍य का प्रशासन एकदम पेशेवर है और यहां किसी तरह की लालफीताशाही नहीं है. साथ ही लोगों की शिकायतों को भी दूर करने की व्यवस्था बनाई गई है. निवेश आकर्षित करने में शामिल अधिकारी अपने काम के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी रखते हैं.''

अरुणाचल प्रदेश सबसे ज्‍यादा उन्नत छोटा राज्‍य

श्रेय चीन को

अरुणाचल प्रदेश को चीन की वजह से विशेष फायदा मिल रहा है. भारत में सबसे पहले सूर्योदय का दर्शन करने वाले इस राज्‍य को बड़े पड़ोसी मुल्क से खतरे के चलते नई दिल्ली से खासी पूंजी मुहैया करवाई जा रही है. पूर्व मुख्यमंत्री जरबोम गामलिन कहते हैं, ''करीब 1,700 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की वजह से यहां विकास के लिए हरसंभव कोशिश की जाती है.'' भारत ने अचानक ही रणनीतिक तौर पर अहम इस सीमावर्ती राज्‍य में छुपी संभावनाओं को पहचान लिया है. आज हो रहा भारी निवेश इसी का नतीजा है.

सन्‌ 2008 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्‍य में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 1,452 करोड़ रु. का आर्थिक पैकेज देने का ऐलान किया था. लेकिन निवेश सिर्फ केंद्र की ओर से ही नहीं हो रहा है. पिछले चार साल में राज्‍य सरकार ने पनबिजली वाली निजी परियोजनाओं के लिए 150 से ज्‍यादा सहमति पत्रों (एमओए) पर दस्तखत किए हैं. इन परियोजनाओं से अगले दशक में 63,000 मेगावाट बिजली पैदा होगी. इन पर कुल मिलाकर कई लाख करोड़ रु. का निवेश होने की संभावना है, क्योंकि एक मेगावाट बिजली के उत्पादन पर ही 7 करोड़ रु. का निवेश होता है. देश में ताप बिजली बनाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी एनटीपीसी की अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी के किनारे देश का सबसे बड़ा पनबिजली संयंत्र लगाने की योजना है. 9,500 मेगावाट की परियोजना के लिए 10 वर्षों में 1,00,000 करोड़ रु. के निवेश की जरूरत होगी.

यहां सरकार की ओर से भारी तादाद में एमओए किए जाने की एक बड़ी वजह राष्ट्रीय पनबिजली नीति में एक प्रावधान का होना है, जिसके अनुसार मेजबान राज्‍य को 12 प्रतिशत बिजली मुफ्त मिलेगी. सभी परियोजनाएं पूरी हो जाने पर अरुणाचल प्रदेश को 7,560 मेगावाट बिजली मुफ्त मिलेगी, जबकि उसकी जरूरत कुल जमा 105 मेगावाट की है. ऐसे में अतिरिक्तबिजली बेचने से अरुणाचल प्रदेश को हर साल कम-से-कम 10,000 करोड़ रु. की कमाई होगी, जबकि राज्‍य का मौजूदा बजट

महज  2,500 करोड़ रु. का है. गामलिन कहते हैं, ''यह अभी कल्पना ही है, लेकिन 10 साल में यहां भारी बदलाव देखने को मिलेगा. हमें उम्मीद है कि कागज पर किए जाने वाले वादे अमल में आएंगे.''

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