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CYSS करेगा DU स्टूडेंट यूनियन चुनाव का बहिष्कार, EVM है वजह

आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई सीवाईएसएस ने घोषणा की है कि वह बैलट पेपर के माध्यम से चुनाव कराने की अपनी मांग के लिए अधिकारियों से कोई सांत्वना नहीं दिए जाने के बाद आगामी डूसू चुनावों का बहिष्कार करेगा.

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aajtak.in
मानसी मिश्रा नई दिल्ली, 03 September 2019
CYSS करेगा DU स्टूडेंट यूनियन चुनाव का बहिष्कार, EVM है वजह सीवाईएसएस के प्रदर्शन के दौरान की फोटो

आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई सीवाईएसएस (छात्र युवा संघर्ष समिति) एक्टिविस्ट हेतराम यादव और रजनीश तिवारी बीते एक सप्ताह से भूख हड़ताल पर बैठे थे. सोमवार को उनकी तबियत बिगड़ जाने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया.

सीवाईएसएस ने इसी के साथ घोषणा की है कि वह बैलट पेपर के माध्यम से चुनाव कराने की अपनी मांग के लिए अधिकारियों से कोई सांत्वना नहीं दिए जाने के बाद आगामी डूसू चुनावों का बहिष्कार करेगा.

सीवाईएसएस के महासचिव, हरिओम प्रभाकर ने कहा कि सीवाईएसएस द्वारा बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव कराने की मांग जायज़ है. अगर जेएनयू और डूटा (दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन) में चुनाव बैलेट पेपर से आयोजित किए जाते हैं, तो डूसू चुनाव इस तरह से क्यों नहीं करवाए जा सकते हैं. साथ ही उन्होेंने पिछली बार ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप भी लगाया.

सीवाइएसएस ने सवाल उठाया है कि 'स्वतंत्र निष्पक्ष चुनाव' के लिए सीवाईएसएस की मांग को स्वीकार करने के लिए अधिकारियों की ज़िम्मेदारी नहीं होनी चाहिए. ये दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी छात्रों के साथ अन्याय है. इसलिए हमने आईसा और एनएसयूआई जैसे सभी छात्र संगठनों से अपील की है की हमारी इस मांग में शामिल होकर, आने-वाले डूसू चुनाव का बहिष्कार करें.

इसी बीच,सीवाईएसएस कार्यकर्ता रजनीश तिवारी और हेतराम यादव जो 7 दिनों से भूख हड़ताल पर थे. उनकी तबियत गंभीर रूप से बिगड़ने के बाद, उन्हें अस्पताल ले जाया गया. सीवाइएसएस के अध्यक्ष, सुमित यादव ने बताया कि दोनों का स्वास्थ्य बिगड़ गया क्योंकि अधिकारियों ने इस मुद्दे पर कोई ध्यान नहीं दिया और हमारी मांग पर आंखें मूंदे रहे.

संगठन की ओर से कहा गया है कि चुनाव में 'बैलट पेपर' का इस्तेमाल हो लेकिन अधिकारी हमारी आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन, हम छात्रहितों के लिए अपनी प्रत्येक मांग के लिए संघर्ष करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हमने DU के डीन को एक ज्ञापन भी दिया है. जब तक अधिकारियों द्वारा हमारी सभी मांगों को स्वीकार करने का वादा नहीं किया जाता है, तब तक हम अपने इस संघर्ष से पीछे नहीं हटेंगे.

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