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प्रिंसिपलों के सामने संकट, हड़ताली शिक्षकों की कैसे करेंगे प्रमोशन

इन शिक्षकों के परमोशन का मामला आज तक लटका हुआ है. कॉलेज प्रिंसिपलों का कहना है कि जब तक एक दिन की कटी सैलरी के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन लिखित में नहीं दे देता है उन शिक्षकों की परमोशन कैसे करेंगे.

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aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 12 October 2019
प्रिंसिपलों के सामने संकट, हड़ताली शिक्षकों की कैसे करेंगे प्रमोशन प्रतीकात्मक फोटो

विश्वविद्यालय और कॉलेजों के शिक्षकों की नियुक्ति और परमोशन के लिए बनाए गए नियमों को लागू करने संबंधी यूजीसी रेगुलेशन-2018 को दिल्ली विश्वविद्यालय की हाई पावर कमेटी ने यूजीसी रेगुलेशन पर अपनी रिपोर्ट सौंपने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय ने इसे ईसी से पारित करते हुए कॉलेजों को भेज दिया है जिससे कि नियुक्ति और परमोशन  की प्रक्रिया शुरू की जा सके.

दिल्ली विश्वविद्यालय की एकेडेमिक काउंसिल के पूर्व सदस्य और हाई पावर कमेटी के पूर्व सदस्य प्रो.हंसराज 'सुमन ' ने बताया है कि यूजीसी रेगुलेशन- 2018 के लागू होने पर जहां एडहॉक और स्थायी शिक्षकों में खुशी का माहौल है वहीं छह साल पहले (28 अगस्त,2013) को हुई शिक्षक हड़ताल में लगभग 712 शिक्षक शामिल हुए थे, हड़ताल में शामिल उन सभी शिक्षकों की एक दिन की सैलरी काटी गई थी जिसकी बहाली आज तक नहीं हुई है.

आपको बता दें, इन शिक्षकों के परमोशन का मामला आज तक लटका हुआ है. कॉलेज प्रिंसिपलों का कहना है कि जब तक एक दिन की कटी सैलरी के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन लिखित में नहीं दे देता है उन शिक्षकों की परमोशन कैसे करेंगे जिनकी विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक दिन की सैलरी काटने के निर्देश दिए थे जब तक डीयू प्रशासन उन शिक्षकों के एक दिन के वेतन देने संबंधी सर्कुलर जारी नहीं कर देता उन शिक्षकों की परमोशन संभव नहीं है.

प्रो. सुमन ने बताया है कि कॉलेजों में आज तक एक दिन के सर्विस ब्रेक के नाम इमोशनल ब्लैकमेल किया जा रहा है, भय और आतंक का माहौल बना हुआ है, यदि कॉलेजों में  प्रमोशन होती है तो उन्हें उससे वंचित किया जा सकता है ? कॉलेज प्रिंसिपलों का यह भी कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं, इसी तरह से डूटा, एसी, ईसी के हमारे प्रतिनिधियों ने कभी भी इस मुद्दे को उठाया और न ही समाधान करने संबंधी ही लिखा, ऐसे में यह मुद्दा और गंभीर होता जा रहा है.

प्रो. हंसराज 'सुमन 'ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. योगेश कुमार त्यागी को पत्र लिखकर और कई बार व्यक्तिगत मिलकर यह मांग कर चुके है कि छह साल पहले (28 अगस्त,2013) शिक्षकों पर जबरदस्ती लादा गया चार वर्षीय पाठ्यक्रम के कारण हुई शिक्षकों की हड़ताल में शामिल लगभग 712 शिक्षकों की सैलरी काटी गई थी जिसको लेकर कॉलेजों ने आज तक उनकी सैलरी रिलीज नहीं की है।उनकी सैलरी तभी रिलीज हो सकती है जब डीयू की सर्वोच्च संस्था विद्वत परिषद और कार्यकारी परिषद में प्रस्ताव पारित कर पहले आदेश को निरस्त कर सैलरी देने का आदेश दिया जाए.

प्रो. सुमन ने बताया है कि शिक्षकों ने जिस मुद्दे को लेकर हड़ताल की थीं उस मुद्दे पर शिक्षकों के मत को दिल्ली विश्वविद्यालय पहले ही स्वीकार कर चुकी है, उनके अनुसार चार वर्षीय डिग्री कोर्स को वापिस तीन वर्षीय डिग्री कोर्स में तब्दील किया जा चुका है. उनका मानना है कि एक वैध मुद्दे पर सैलरी काटने की बजाए यूनिवर्सिटी और देश को शिक्षकों का शुक्रगुज़ार होना चाहिए जिसके तहत देश के लाखों छात्रों का एक साल उनको वापिस लौटाया गया है.

प्रो. सुमन ने यह भी बताया है कि कॉलेजों में प्रमोशन के लिए यूजीसी रेगुलेशन-2018 को स्वीकार कर लिया गया है डीयू में ऑडिनेन्स में बदलाव करके विभागों और कॉलेजों में लंबे समय से रुकी हुई शिक्षकों की प्रमोशन का रास्ता साफ हो जायेगा लेकिन हड़ताल के समय जिन शिक्षकों की एक दिन की सैलरी काटी गई थी. जब तक एसी/ईसी में प्रस्ताव पारित कर कॉलेजों को सर्कुलर नहीं भेजा जाता तब तक उनकी सर्विस की निरंतरता बहाल नहीं होगी।साथ ही उनकी अगली प्रमोशन में बाधा आ सकती. इसलिए कॉलेज प्रिंसिपल को निर्देश जारी कर कहा जाए कि जिनकी एक दिन की सैलरी काटी गई थी उन्हें प्रशासन के स्तर पर परेशान न करें.

कुछ शिक्षक हुए रिटायर

उन्होंने बताया है कि हड़ताल में शामिल शिक्षकों में से पिछले छह साल में जिन शिक्षकों की एक दिन की सैलरी काटी गई थी उनमे से कुछ शिक्षक तो रिटायर हो चुके हैं कुछ दूसरी जगहों पर प्रमोशन पाकर चले गए हैं.

डूटा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अमरदेव शर्मा के समय शिक्षकों की हड़ताल हुई थी वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं, कुछ प्रिंसिपल बन गए हैं, कुछ प्रोफेसर तो कुछ डीयू से बाहर उच्च पदों पर चले गए हैं लेकिन जो बचे हैं उनके मन में भय सता रहा है कि कहीं प्रमोशन के समय एक दिन की हड़ताल का मामला उठाकर, प्रमोशन न रोक दे,इसलिए जल्द से जल्द इस मुद्दे को समाप्त किया जाना चाहिए.

प्रो. सुमन ने आगे बताया है कि डीयू में यूजीसी रेगुलेशन्स -2018 को लागू कराने को लेकर हाई पावर कमेटी नियमों में सुधार कर विश्वविद्यालय  को सौंप देने के बाद अब रेगुलेशन- 2018  लागू करने के लिए कॉलेजों को निर्देश दे दिए हैं.

पिछले एक दशक से रुकी हुई प्रमोशन और परमानेंट अपॉइंटमेंट्स करने के लिए कॉलेजों को निर्देश जारी कर दिए जाएंगे. उनका कहना है कि कॉलेजों में 3000 ऐसे शिक्षक है जिनकी पहली और दूसरी दोनों प्रमोशन नहीं हुई है जिससे उन्हें प्रति माह  हजारों रुपये की आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है. उन्होंने बताया है कि जब भी एकेडेमिक कांउन्सिल की मीटिंग होगी उससे पहले इस मुद्दे पर विद्वत परिषद सदस्यों से मिलकर डूटा में बुलाकर एक दिन की सैलरी के मुद्दे पर वीसी से जल्द समाधान करने के लिए कहे ताकि उन शिक्षकों की प्रमोशन हो सके.

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