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खानाखराब: दुनिया पित्तल दी, मैं सोने दी

देशभक्ति का एक गाना शादियों में बहुत बजता है. हालांकि शादी का देशभक्ति से कोई नाता नहीं पर हर बारात में बैंड वाले बजाते हैं. मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती, मेरे देश की धरती. किसानों की आत्महत्या से दुखी देश में धरती किधर सोना उगल रही है भाई. पर फिल्मी गाना है, वास्तविकता से इसका क्या वास्ता. शादी से तो हरगिज नहीं. आजकल एक और गाना खूब बज रहा है. पार्टियों में. दुनिया पित्तल दी, बेबीडॉल मैं सोने दी. यानी ये दुनिया पीतल की है और मैं सोने की बनी हूं. इन दो गानों के सार पर विचार कर रहा था तो नजर अखबार की दो खबरों पर गई और सारा भेद खुल गया. इसमें सोना भी है, चांदी भी है, हीरे-मोती भी हैं, शादी भी है, पार्टी भी है. देश की धरती और धरतीपुत्र किसान भी. शुरुआत चांदी से करते हैं. चांदी को रजत भी कहते हैं.
<B>खानाखराब: दुनिया पित्तल दी, मैं सोने दी</B> Gandhi Family
कमलेश सिंहनई दिल्‍ली, 22 April 2014

देशभक्ति का एक गाना शादियों में बहुत बजता है. हालांकि शादी का देशभक्ति से कोई नाता नहीं पर हर बारात में बैंड वाले बजाते हैं. मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती, मेरे देश की धरती. किसानों की आत्महत्या से दुखी देश में धरती किधर सोना उगल रही है भाई. पर फिल्मी गाना है, वास्तविकता से इसका क्या वास्ता. शादी से तो हरगिज नहीं. आजकल एक और गाना खूब बज रहा है. पार्टियों में. दुनिया पित्तल दी, बेबीडॉल मैं सोने दी. यानी ये दुनिया पीतल की है और मैं सोने की बनी हूं. इन दो गानों के सार पर विचार कर रहा था तो नजर अखबार की दो खबरों पर गई और सारा भेद खुल गया. इसमें सोना भी है, चांदी भी है, हीरे-मोती भी हैं, शादी भी है, पार्टी भी है. देश की धरती और धरतीपुत्र किसान भी. शुरुआत चांदी से करते हैं. चांदी को रजत भी कहते हैं.

रजत गुप्ता भारत की आंखों का तारा हुआ करते थे. जब भारत में जन्मे गुप्ता दुनिया की शीर्ष वित्तीय कंपनी गोल्डमैन सैक्श के निदेशक हो गए तो हमने रजत चालीसा पढ़नी शुरू कर दी. देखो अमेरिका वालों हम किसी से कम नहीं. हर क्षेत्र में डंका पीट चुके भारतीयों के लिए गर्व की बात थी. दो महीने बाद रजत जेल जाएंगे. उन्हें दो साल की सजा काटनी है. हीरे-मोती राजरत्‍न कहलाते हैं. रजत के साथ एक और भारतीय मूल के फूल राजरत्‍नम 11 साल के लिए अंदर हैं. दोनों पर आरोप है इनसाइडर ट्रेडिंग का. इनसाइडर ट्रेडिंग का मतलब होता है कि आप किसी पद पर रहते हुए ज्ञात हुई गोपनीय जानकारी का अपने फायदे के लिए उपयोग करना. गोल्डमैन में काम करते उनको पता होता था कि किस कंपनी का हिसाब किताब खराब या अच्छा है और बाजार में उसकी साख गिरने या चढ़ने वाली है. इस जानकारी के मुताबिक वह अपने लोगों को शेयर बेचने या खरीदने की सलाह दे देते और लोग मोटा माल बना लेते. बाकी जनता लुटती-पिटती क्योंकि उन्हें क्या मालूम क्या होने वाला है. इसीलिए किसी कंपनी में काम करने वाले लोगों को शेयर बाजार में उस कंपनी का शेयर खरीदने पर प्रतिबंध होता है. कंपनी की योजनाओं के बारे में जानकारी के दुरुपयोग की संभावना रहती है. लुब्बोलुबाब ये कि इनसाइडर ट्रेडिंग अनैतिक है और एक अपराध है. भारत में भी. पर वित्तीय मामलों में. उमा भारती जब रॉबर्ट वाड्रा को जेल में डालने की बात करती हैं तो इसी नजरिए से करती हैं पर वाड्रा को घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि मामला शेयर बाजार का नहीं, सरकार का है.

एक पुरानी कहावत है कि अगर खरीद सको तो जमीन खरीदो, क्योंकि बनाने वाले ने जमीन बनाना कब का बंद कर दिया. हालांकि इस बात में दम रहा नहीं पर जमीन में कितना दम है, इसका अंदाजा बड़े शहरों के आसपास की जमीन के दाम देखकर पता चलता है. खेती की जमीन चांदी है पर अगर अट्टालिकाएं बनें तो वही जमीन सोना. पीतल के कारोबारी वाड्रा ने खेती की जमीन खरीदी चांदी के भाव पर. फिर सरकार को वहां ऊंची इमारतें बनाने की आज्ञा के लिए आवेदन दिया. सरकार कांग्रेस की और कांग्रेसी राजघराने में ब्याहे रॉबर्ट. आज्ञा मिली और जमीन सोने के भाव का हो गया. उसे बेच दिया. हर्रे लगा ना फिटकिरी और रंग चोखा. अशोक खेमका नाम के आईएएस अधिकारी ने इसमें धोखे का रंग देखा और उन्होंने जमीन का सौदा रद्द कर दिया. गुस्साई सरकार ने उनको दिन में तारे दिखा दिए. खेमका खेत हो गए. एकदम चौरस. चिल्ला रहे हैं पर अब चिल्लाए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत.

राजस्थान में भी सरकार कांग्रेस पार्टी की थी जब वाड्रा रेतीली जमीन खरीद रहे थे. धेले भर की उपज वाली जमीन के ऊंचे दाम दे रहे थे. किसानों की चांदी हो गई. किसान सोच रहे थे कि कोई बेवकूफ आया है, लूट लेते हैं. धढ़ाधढ़ बेचने लगे, रॉबर्ट धढ़ाधढ़ खरीदने लगे. वाड्रा ने देखते देखते 2000 एकड़ जमीन खरीद ली. फिर सरकार ने घोषणा की वहां सौर ऊर्जा का संयत्र लगाया जाएगा. किसानों की चांदी हुई थी, वाड्रा साहेब ने अपने लिए सोना कर लिया. आरोप है कि उन्‍हें सरकार की योजनाओं की जानकारी थी. उन्होंने उस जानकारी को मुनाफे में तब्दील कर दिया. व्यापारी तो यही करते हैं. उन्हें पता चलता है कि प्याज की फसल कमजोर हुई है तो वह प्याज जमा करते हैं. जब प्याज का अकाल होता है तो बोरियां दुगुने दामों पर निकलती हैं. रॉबर्ट भी व्यापारी हैं. पीतल के खानदानी व्यापारी. व्यापार में मुनाफा पाप नहीं है.

बड़े घर में ब्याहा जाना भी अभिशाप नहीं है. पर उनके लिए हो गया है. क्योंकि अपराध भले नहीं हो पर लोगों की नजर में अनैतिक तो है ही. देश की धरती सोना उगलती नहीं पर दबाव वाले उगलवा लेते हैं. देश की धरती, शादी-पार्टी, सोना-चांदी, हीरे-मोती, पीतल सब निपट गए पर आप पूछेंगे कि कहानी में बेबीडॉल नहीं आई. अब वह भी हम ही बताएं भाई.

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