एडवांस्ड सर्च

संतान प्राप्ति के लिए ऐसे करें पौष पुत्रदा एकादशी पर पूजा, पढ़ें व्रत कथा

पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु का व्रत करने और उनकी पूजा करने से व्रती को सुंदर और स्वस्थ संतान की प्राप्ति होती है.

Advertisement
aajtak.in
aajtak.in नई दिल्ली, 06 January 2020
संतान प्राप्ति के लिए ऐसे करें पौष पुत्रदा एकादशी पर पूजा, पढ़ें व्रत कथा पौष पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा

शास्त्रों में एकादशी व्रत का बड़ा ही महत्व है. एकादशी का व्रत रखने से मन की चंचलता समाप्त होती है और धन और आरोग्य की प्राप्ति होती है. पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति या संतान की समस्याओं के निवारण के लिए किया जाता है. पुत्रदा एकादशी 06 जनवरी को यानी आज मनाई जा रही है. पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु का व्रत करने और उनकी पूजा करने से व्रती को सुंदर और स्वस्थ संतान की प्राप्ति होती है.

पौष पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा

इस व्रत की शुरुआत महीजित नामक राजा से हुई जो पुत्र न होने की जगह से परेशान था. महीजित अपनी प्रजा से बहुत प्यार करता था. अपराधियों को कड़ा दंड देने की वजह से प्रजा अपने राजा से बहुत ही खुश रहती थी. लेकिन महाराज एक वजह से हमेशा दुखी रहते थे. उनके दुख का कारण था उनके बाद उनके राज्य का कोई उत्तराधिकारी नहीं था.

एक दिन राजा ने अपनी प्रजा से कहा कि मैने आज तक कोई बुरा काम नही किया है और ना ही कभी किसी का दिल दुखाया है, फिर भी मुझे एक पुत्र की प्राप्ति नही हुई. प्रजा ने कहा कि महाराज इस जन्म में तो आपने अच्छे कर्म किए हैं पर शायद आपने पिछले जन्म में कोई गलत काम किया होगा जिसकी वजह से आपको इस जन्म में पुत्र की प्राप्ति नहीं हो पा रही है.

प्रजा ने अपने महाराज को महर्षि लोमश से बात करने की सलाह दी. प्रजा और राजा ने वन में जाकर महर्षि से मुलाकात की और पुत्र न होने का कारण पूछा. महर्षि ने कहा कि राजन पिछले जन्म में आप बहुत निर्धन व्यक्ति थे और अपना गुजारा करने के लिए आपने कई गलत काम किए.

महर्षि लोमश ने बताया कि पिछले जन्म में महाराज एक प्यासी गाय का पानी लेकर खुद पी गए थे जिसके कारण उन्हें ये पाप लगा. उस दिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी थी. इसी कारण महाराज को इस जन्म में पुत्र का वियोग सहना पड़ रहा है.

प्रजा के इस पाप से छुटकारे का उपाय पूछे जाने पर महर्षि ने बताया कि राजा सहित पूरी प्रजा को सावन के महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत रखना होगा और यह संकल्प लेना होगा कि इसका फल महाराज को मिले. प्रजा को रात में जागरण करना होगा और इसके बाद इसका पारण दूसरे दिन करना होगा. ऐसा करने से राजा को पूर्व जन्म के पापों से मुक्ति मिल जाएगी और आप सभी को अपना उत्तराधिकारी मिल सकता है.

राजा और प्रजा ने लोमश ऋषि द्वारा बताया गए उपाय को किया और महाराज को जल्द ही पुत्र की प्राप्ति हुई. इसके बाद से ही संतान प्राप्ति के लिए पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाने लगा.

संतान की कामना के लिए आज क्या करें?

- प्रातः काल पति पत्नी संयुक्त रूप से श्री कृष्ण की उपासना करें.

- उन्हें पीले फल, पीले फूल, तुलसी दल और पंचामृत अर्पित करें.

- इसके बाद संतान गोपाल मन्त्र का जाप करें.

- मंत्र जाप के बाद पति पत्नी संयुक्त रूप से प्रसाद ग्रहण करें.

- अगर इस दिन उपवास रखकर प्रक्रियाओं का पालन किया जाय तो ज्यादा अच्छा होगा.

- एकादशी के दिन भगवान् कृष्ण को पंचामृत का भोग लगायें.

- साथ में एक तुलसी की माला भी चढ़ाएं.

- निम्न मंत्र का 108 बार जाप करें- "ॐ क्लीं कृष्णाय नमः"

- पंचामृत का प्रसाद ग्रहण करें.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay