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वर्चुअल स्पेस में दुर्गा पूजा की गहमागहमी

इंटरनेट क्रांति की जद से धर्म की दुनिया भी बाहर नहीं है. ऐसे में जब श्रद्घा और भक्ति का पर्व दशहरा नजदीक आता जा रहा है, साइबर स्पेस में मां दुर्गा के भक्तों की गहमागहमी भी बढ़ती जा रही है.

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aajtak.in
आईएएनएसकोलकाता, 12 October 2012
वर्चुअल स्पेस में दुर्गा पूजा की गहमागहमी

इंटरनेट क्रांति की जद से धर्म की दुनिया भी बाहर नहीं है. ऐसे में जब श्रद्घा और भक्ति का पर्व दशहरा नजदीक आता जा रहा है, साइबर स्पेस में मां दुर्गा के भक्तों की गहमागहमी भी बढ़ती जा रही है.

दुर्गा के प्रति आस्था प्रकट करने के लिए नेट आधारित कई दिलचस्प प्रणालियां विकसित की गई हैं. भारत और खासकर बंगाल से बाहर रहने बंगालियों को यह ई-दुर्गा पूजा खूब भा रही है. दुर्गा पूजा को समर्पित कई वेबसाइटें भक्तों को देवी दुर्गा की पूजा की सुविधाएं प्रदान कर रही हैं.

इन वेबसाइटों पर विजिट कर दुर्गा की इलेक्ट्रॉनिक आरती, पूजा, माल्यार्पण सब कुछ किये जा सकते हैं. उत्सवलाइव डॉट कॉम के सैकत सेनगुप्ता कहते हैं, 'हम उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जो व्यस्तता के कारण इस पूजा में शरीक नहीं हो पायेंगे.'

आस्थावानों के देश भारत में दुर्गा पूजा का त्योहार धूम-धाम से मनाया जाता रहा है. चार दिनों तक चलने वाला यह त्योहार 21 अक्टूबर से शुरू होगा. रेडियो एवं टीवी पर इसका प्रसारण लंबे समय से होता रहा है, पर इंटरनेट क्रांति ने आभासी दुनिया में दुर्गा पूजा को अधिक इंटरैक्टिव बना दिया है. इसी तरह बंगालीनेट डॉटकॉम नामक वेबसाइट ने साइबर स्पेस में दुर्गा पूजा को दिलचस्प बनाने की व्यवस्था की है.

'होम अवे फ्रॉम होम' टैग लाइन से लैस इस साइट को भारत एवं विदेशों में खूब खंगाला जाता है. ऐसी साइटों पर नियत स्पेस पर माउस क्लिक कर भक्त आभासी दीया जला सकते हैं, कर्सर को ड्रैग कर देवी के गले में माला पहना सकते हैं या घंटी बजा सकते हैं.

बंगालीनेट डॉट कॉम के सुकांता चटर्जी कहते हैं, 'हमने पहली बार साइट में ढोल की थाप भी जोड़ी है, ताकि भक्त वर्चुअल ढोल बजाकर अपनी श्रद्घा प्रकट कर सकें. यहां आरती, माल्यार्पण सभी अनुष्ठान क्रियाओं की व्यवस्था है.'

दी हॉलीडेजस्पॉट डॉट कॉम भी एक ऐसी ही वेबसाइट है, जहां दुर्गा के प्रति आस्था प्रकट की जा सकती है. यह साइट सभी प्रमुख आयोजनों, त्योहारों, पर्वों को समर्पित है. इसके संचालक सरजेंदु घांटी कहते हैं, 'आप इस पर अपना नाम एवं गोत्र टाइप कीजिए और पूजा संपन्न कीजिए. यही नहीं आप वर्चुअल प्रसाद भी प्राप्त कर सकते हैं.'

ये वेबसाइटें ई-पंचांग, बंगाली दुर्गा पाठ पुस्तकों, ग्रीटिंग्स आदि भी उपलब्ध करा रही हैं. जाहिर है, आस्था की यह आभासी दुनिया सभी को खूब भा रही है.

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