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कांवड़ यात्रा में भूलकर भी न करें ये 7 काम, नाराज हो जाएंगे भोलेनाथ

सावन का महीना शुरू हो चुका है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना बेहद पवित्र और भगवान शिव को समर्पित होता है. ऐसे में भोलेबाबा का हर भक्त उन्हें प्रसन्न करके अपनी सभी इच्छाओं को पूरा कर लेना चाहता है. इस खास महीने लाखों की संख्‍या में शिवभक्त दूर-दूर से आकर कांवड यात्रा में शामिल होते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कावड़ यात्रा करने वाले भक्तों के लिए कुछ खास नियम भी बताएं गए हैं. जिनका पालन न करने पर भगवान शिव नाराज हो सकते हैं. आइए जानते हैं आखिर क्या हैं ये खास नियम-

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aajtak.inनई दिल्ली, 14 August 2019
कांवड़ यात्रा में भूलकर भी न करें ये 7 काम, नाराज हो जाएंगे भोलेनाथ प्रतीकात्मक फोटो (Getty Image)

सावन का महीना शुरू हो चुका है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना बेहद पवित्र और भगवान शिव को समर्पित होता है. ऐसे में भोलेबाबा का हर भक्त उन्हें प्रसन्न करके अपनी सभी इच्छाओं को पूरा कर लेना चाहता है. इस खास महीने लाखों की संख्‍या में शिवभक्त दूर-दूर से आकर कांवड़ यात्रा में शामिल होते हैं. कांवड़ यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालु अपनी कांवड़ में गंगाजल भरकर शिव का जलाभिषेक करने के लिए प्रस्‍थान करते हैं.

सावन के महीने में भगवान शंकर के जलाभिषेक का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि जलाभिषेक करने से भगवान शिव अपने भक्तों पर जल्‍द प्रसन्‍न होकर उनकी सभी मुरादें जल्‍दी पूरी करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कांवड़ यात्रा करने वाले भक्तों के लिए कुछ खास नियम भी बताएं गए हैं. अगर इनका पालन न किया गया तो भगवान शिव नाराज हो सकते हैं.

कांवड़ यात्रा से जुड़े नियम-

-भगवान शिव को गंगाजल अर्पण करने से पहले किसी भी कांवड़ को भूमि पर नहीं रखना चाहिए. इसके पीछे यह मान्यता है कि जलस्रोत को सीधा प्रभु से जोड़ा गया है. हर कांवड़ की निरंतर यात्रा की तरह प्रभु की कृपा भी उनके ऊपर प्राकृतिक रूप से बनी रहे.

- कांवड़ यात्रा के दौरान जल भरने के लिए उपयोग किया जाने वाला जल का पात्र कहीं से टूटा-फूटा या पहले से उपयोग किया हुआ नहीं होना चाहिए.

-कांवड़ यात्रा के दौरान गंगाजल के लिए पसंद किए गए पात्र को रेशम या सूत की रस्सी से बांधना चाहिए. उसमें लगने वाली लकड़ी या डंडा भी साफ व दोषमुक्त होना चाहिए.

-भगवान शिव की कृपा पाने के लिए की जाने वाली इस यात्रा के दौरान अपना जलपात्र किसी और को नहीं देना चाहिए.

-कांवड़ यात्रा के दौरान हर भक्त को व्रत रखना चाहिए और अपनी यात्रा समूह में ही करनी चाहिए.  

-भक्तों को कांवड़ यात्रा सूर्योदय से दो घंटे पहले और सूर्यास्त के दो घंटे बाद तक ही करनी चाहिए.

-हर कांवड़िए को अपनी पूरी यात्रा के दौरान भगवान शिव के किसी भी मंत्र का जप या भजन का स्मरण करते हुए अपनी यात्रा करनी चाहिए.

-यदि कोई व्यक्ति संतान सुख, मानसिक प्रसन्नता, मनोरोग निवारण और आर्थिक समस्या से मुक्ति पाना चाहता है तो उसके लिए कांवड़ यात्रा उत्तम फलदायी है.

-कांवड़ यात्रा के दौरान जल भरने के लिए किसी धातु के पात्र का उपयोग करें. ऐसा करने से शुद्धता बनी रहेगी. मिट्टी के पात्र भी जल संग्रह में ग्राह्य हैं. लेकिन भूलकर भी जल भरने के लिए प्लास्टिक, कांच, एल्युमीनियम, स्टील के पात्रों का उपयोग न करें.

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