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इस समय तक है नवमी मुहूर्त, सिद्धिदात्री पूजन से होगा नवरात्रि का समापन

Navratri 2019: मां सिद्धिदात्री के पूजन के साथ आज नवरात्रि का समापन हो जाएगा. जानिए- मां के पूजन में किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.

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aajtak.in [Edited by: नेहा]नई दिल्ली, 14 April 2019
इस समय तक है नवमी मुहूर्त, सिद्धिदात्री पूजन से होगा नवरात्रि का समापन Navratri 2019: मां सिद्धिदात्री

नवरात्रि के नौवें दिन शक्ति सिद्धिदात्री का पूजन किया जाता है. पूर्ण भक्ति भाव के द्वारा पूजा अर्चना करने से सभी प्रकार की सिद्धि प्रदान करने के कारण देवी का नाम सिद्धिदात्री पड़ा है. मां सिद्धिदात्री सभी दुखों का नाश करती हैं. नवरात्रि के नौवें दिन इनकी पूजा करके नव ग्रहों को शांत किया जा सकता है. देवी सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है और देवी कमल के पुष्प पर आसीन रहती हैं. साथ ही हाथ में कमल, सिंह, गदा, सुदर्शन, चक्र धारण किए हुए हैं. सिद्धिदात्री देवी को मां सरस्वती का रूप भी माना जाता है. देवी सिद्धिदात्री को मौसमी फल, हलवा पूड़ी, काले चने, नारियल आदि का भोग लगाया जाता है और नवमी पूजन के साथ व्रत का समापन होता है.

नवमी मुहूर्त-

ज्योतिष गणना अनुसार नवमी तिथि शनिवार को प्रातः 11 बजकर 41 मिनट से आरंभ होकर रविवार यानी आज प्रातः 9 बजकर 35 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि को मानने अनुसार नवमी पूजनकाल रविवार के दिन भी अहोरात्र बना रहेगा.

कैसे करें देवी सिद्धिदात्री का पूजन-

- देवी दुर्गा या मां सिद्धिदात्री की प्रतिमा या फोटो एक लाल वस्त्र पर पूर्व दिशा की तरफ स्थापित करें.

- मां सिद्धिदात्री के सामने घी का दीपक जलाएं.

- कमल या लाल गुलाब के 9 फूल अर्पण करें.

- मां को भोग लगाने के लिए 9 तरीके का प्रसाद भी रखें.

- एक लाल या पीले आसन पर बैठकर ॐ सिद्धिदात्रये नमः मंत्र का 108 बार पाठ करें.

- जाप के बाद अपने मनोवांछित कार्य को बोलते हुए मां को अर्पण किए गए 9 फूल लाल वस्त्र में लपेटकर रखें.

- मां सिद्धिदात्री की कृपा से आपके हर कार्य में आपकी जीत निश्चित है.

देवी का पूजन करते समय इन बातों का रखें ध्यान-

- देवी सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना में काली नीले रंग के वस्त्र का प्रयोग ना करें.

- पूजा पाठ के दौरान मन में दूषित विचार ना आने दें.

देवी सिद्धिदात्री की विशेष पूजा अर्चना दिलाएगी रुका हुआ धन-

- देवी सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना से सर्व कार्य सिद्ध किए जा सकते हैं. इसके अलावा सातों चक्रों के साथ-साथ नवग्रहों भी को नियंत्रित किया जा सकता है.

- देवी सिद्धिदात्री के सामने गाय के घी का दीया जलाएं और उन्हें शुद्ध सिंदूर अर्पण करें.

- एक लाल आसन पर बैठकर निम्न मंत्र का जाप करें.

देवी सर्वभूतेषु सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता   नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमस्तस्ये नमो नमः

- जाप के बाद देवी सिद्धिदात्री को अर्पण किए गए सिंदूर का तिलक करें. जब भी बाहर जाएं तिलक करके ही जाएं.

रात्रि का महाउपाय देगा अज्ञात भय से मुक्ति-

- नवरात्रि के नौवें दिन देवी सिद्धिदात्री के समक्ष नवग्रह समिधा से हवन करने से नवरात्रि का पूर्ण फल मिलता है.

- देवी सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना करने से शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है.

- एक पान के पत्ते पर 9 साबुत फूलदार लौंग के साथ देसी कपूर पर रखें और 9 लाल गुलाब के फूलों के साथ देवी को अर्पण करके अपने अज्ञात भय को खत्म करने की प्रार्थना करें.

- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे मंत्र का 108 बार लाल आसन पर बैठकर जाप करें.

- जाप के बाद लौंग को सिर से उल्टा 7 बार वारकर देसी कपूर में जलाएं.

- ऐसा करने से आपका अज्ञात भय दूर होगा और देवी सिद्धिदात्री की कृपा मिलेगी.

मां दुर्गा की मिलेगी विशेष कृपा-

- नवमी के दिन माता को कमल का फूल अर्पित करें.

- इससे माता की विशेष कृपा प्राप्त होगी.

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