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क्या है गंगा दशहरा पर्व की महिमा, जानें घर के शीतल जल से स्नान करने का तरीका

गंगा में स्नान करने से लोगों को न सिर्फ मन की शांति मिलती है, बल्कि इस दिन दान करने का भी खास महत्व होता है. अगर गंगा के किसी लोकप्रिय घाट तक पहुंचने में असमर्थ हैं तो आप घर के शीतल जल से भी स्नान कर सकते हैं.

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aajtak.in
सुमित कुमार/ aajtak.in नई दिल्ली, 11 June 2019
क्या है गंगा दशहरा पर्व की महिमा, जानें घर के शीतल जल से स्नान करने का तरीका गंगा स्नान

गंगा दशहरा पर आस्था की डुबकी लेने से मां गंगे पापों से मुक्त कर देती है. गंगा में स्नान करने से लोगों को न सिर्फ मन की शांति मिलती है, बल्कि इस दिन दान करने का भी खास महत्व होता है. अगर गंगा के किसी लोकप्रिय घाट तक पहुंचने में असमर्थ हैं तो आप घर के शीतल जल से भी स्नान कर सकते हैं. आइए जानते हैं कि आखिर आप कैसे घर के शीतल जल से स्नान कर मां गंगे को प्रसन्न कर सकते हैं.

कौन हैं गंगा?

- गंगा भारत में बहने वाली एक नदी है

- यह उत्तराखंड के गंगोत्री से निकलती है

- भारत के कई महत्वपूर्ण स्थानों से होकर गुजरती है

- हिन्दू धर्म में इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है

- इन्हे हिन्दू धर्म में मां का स्थान प्राप्त है

- माना जाता है कि गंगा का जल पुण्य देता है और पापों का नाश करता है

गंगा का पौराणिक महत्व क्या है?

- माना जाता है कि गंगा श्री विष्णु के चरणों में रहती थीं

- भागीरथ की तपस्या से, शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया

- फिर शिव जी ने अपनी जटाओं को सात धाराओं में विभाजित कर दिया

- ये धाराएं हैं - नलिनी, हृदिनी, पावनी, सीता, चक्षुष, सिंधु और भागीरथी

- भागीरथी ही गंगा हुयी और हिन्दू धर्म में मोक्षदायिनी मानी गयी

- इन्हे कहीं कहीं पर पार्वती की बहन कहा जाता है

- इन्हे शिव की अर्धांगिनी भी माना जाता है

- और अभी भी शिव की जटाओं में इनका वास है

गंगा दशहरा के पर्व की महिमा क्या है?

- गंगा दशहरा का पर्व ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि को मनाया जाता है

- माना जाता है कि, इसी दिन गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था

- इस दिन गंगा स्नान, गंगा जल का प्रयोग, और दान करना विशेष लाभकारी होता है

- इस दिन गंगा की आराधना करने से पापों से मुक्ति मिलती है

- व्यक्ति को मुक्ति मोक्ष का लाभ मिलता है

- इस बार गंगा दशहरा 12 जून को मनाया जाएगा

क्या करें गंगा दशहरा के दिन?

- किसी पवित्र नदी या गंगा नदी में स्नान करें

- घी में चुपड़े हुये तिल और गुड़ को या तो जल में डालें या पीपल के नीचे रख दें

- इसके बाद मां गंगा का ध्यान करके उनकी पूजा करें, उनके मन्त्रों का जाप करें.

- पूजन में जो सामग्री प्रयोग करें , उनकी संख्या दस होनी चाहिए , विशेष रूप से दस दीपक का प्रयोग करें .

- दान भी दस ब्राह्मणों को करें , परन्तु उन्हें दिए जाने वाले अनाज सोलह मुट्ठी होने चाहिए.

क्या करें अगर किसी पवित्र नदी तक न जा पाएं?

- घर में ही शीतल जल से स्नान करें

- जल में थोडा सा गंगाजल मिलाएं या तुलसी के पत्ते डालें.

- इसके बाद मां गंगा का ध्यान करते हुये स्नान आरम्भ करें

- स्नान करने के बाद सूर्य देवता को जल अर्पित करें.

- इसके बाद मां गंगा के मन्त्रों का जाप करें .

- निर्धन व्यक्ति या ब्राह्मण को दान करें.

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