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ब्रह्मा-विष्णु-महेश, ईश्वर के तीनों रूपों और शक्त‍ि का प्रतीक है 'ऊँ'

ऊँ के उच्चारण में संपूर्ण ब्रह्मांड का ज्ञान छिपा है. इस चमत्कारी शब्द में इतनी शक्ति है कि केवल इसके जाप से ही ईश्वर को पाया जा सकता है.

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aajtak.in
मेधा चावला नई दिल्ली, 29 January 2016
ब्रह्मा-विष्णु-महेश, ईश्वर के तीनों रूपों और शक्त‍ि का प्रतीक है 'ऊँ' 'ऊँ' की महिमा

सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा, पालनहार विष्णु और संहारक महेश का संयुक्त रूप है ऊँ. ज्योतिष के जानकारों की मानें तो इस शब्द में ही पूरी सृष्टि समाई हुई है. ऊँ की ध्वनि, बिना किसी संयोग या टकराव के पूरे ब्रह्मांड में गूंजती रहती है. इसीलिए इसके उच्चारण से ही आसपास सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है.
यह ध्वनि इंसान की सुनने की क्षमता से बहुत ऊपर है. लेकिन जो लोग ध्यान की गहराइयों में उतरना जानते हैं, वे इस चमत्कारी ध्वनि को सुन सकते हैं.

ऊँ की महिमा
तीन अक्षरों अ, ऊ और म से मिलकर बना है ऊँ. इस लिहाज से इसे ईश्वर के तीन स्वरूपों- ब्रह्मा, विष्णु, और महेश का संयुक्त रूप कहा जाता है. यानी ऊँ में ही सृजन, पालन और संहार शामिल हैं. तभी ऊँ को स्वयं ईश्वर का ही स्वरूप माना गया है. ऊँ के सही प्रयोग, उच्चारण और जाप से जीवन की हर समस्या दूर करने के साथ ही ईश्वर को भी पाया जा सकता है.

कैसे करें सही उच्चारण
ऊँ की ध्वनि इतनी पवित्र है कि हमारे ऋषि-मुनियों ने हर मंत्र के पहले इसे जोड़ दिया. कहते हैं कि ऊँ के साथ जुड़ते ही मंत्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है. लेकिन इस ईश्वरीय शब्द के उच्चारण के भी कुछ नियम और सावधानियां हैं. अगर आप ऊँ के जाप का पूरा लाभ पाना चाहते हैं तो जानें इसका सही उच्चारण कैसे करना है -

- ऊँ का उच्चारण ब्रह्म मुहूर्त में या शाम के समय करें.
- ऊँ का उच्चारण करते समय अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें.
- ऊँ का उच्चारण पूरा करने के बाद 10 मिनट तक जल का स्पर्श न करें.
- नियमित रूप से ऊँ का उच्चारण करते रहने से दैवीयता का अनुभव होने लगेगा.

ऊँ का सटीक और सरल प्रयोग कैसे करें
अपने आप में एक संपूर्ण मंत्र है ऊँ. लेकिन इसका केवल धार्मिक महत्व ही नहीं है बल्क‍ि विज्ञान भी इस दिव्य ध्वनि के चमत्कारों के सामने नतमस्तक है. जानें ऊँ का जाप आपकी कहां और कितनी मदद कर सकता है:

उत्तम सेहत के लिए
- दाहिने हाथ में तुलसी की एक बड़ी पत्ती लेकर ऊँ का 108 बार जाप करें.
- फिर पत्ती को पीने के पानी में डाल दें और यही पानी पिएं.
- इस प्रयोग के दौरान तामसिक आहार से बचें

शिक्षा में सुधार के लिए
- एक पीले कागज़ पर लाल रंग से ऊँ लिखें.
- ऊँ के चारों ओर लाल रंग का एक गोला बना दें.
- इस कागज को पढ़ने वाली जगह पर सामने लगाएं.

वास्तु दोष मिटाने के लिए
- घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर सिन्दूर से स्वस्तिक बनाएं.
- मुख्य द्वार पर ऊँ लिखें.
- ऊँ का यह प्रयोग मंगलवार की दोपहर को करें.

धन प्राप्त‍ि के लिए
- एक सफेद कागज के टुकड़े पर हल्दी से ऊँ लिखें.
- इस कागज़ को पूजा के स्थान पर रखकर अगरबत्ती दिखाएं.
- फिर कागज को मोड़कर अपने पर्स में रख लें.

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