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Holi 2019: होलिका दहन का ये है शुभ मुहूर्त, पौराणिक नियम भी जान लें

aajtak.in [Edited By:मंजू ममगाईं]
13 March 2019
Holi 2019: होलिका दहन का ये है शुभ मुहूर्त, पौराणिक नियम भी जान लें
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इस साल पूरे देश में होली का उत्सव 21 मार्च को मनाया जाएगा. रंगों के इस त्योहार से एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है. माना जाता है कि अगर आप दरिद्रता से मुक्ति पाना चाहते हैं तो इस दिन शरीर पर उबटन लगाकर उसके अंश को होलिका में डालें. ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि  आने के साथ गरीबी भी दूर होती है. होलिका दहन में लोग जौ और गेंहू के पौधे को आग में डालते है. बता दें, होली से 8 दिन पहले होलाष्टक लग जाता है इस बार होलाष्टक 14 मार्च से शुरू होकर 21 मार्च तक रहेगा.
Holi 2019: होलिका दहन का ये है शुभ मुहूर्त, पौराणिक नियम भी जान लें
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बात अगर होलिका दहन के शुभ मुहूर्त की करें तो इस साल लोग होलिका दहन रात 9 बजे से रात 12 बजे के बीच में कर सकते हैं. दरअसल भद्रा काल के दौरान होलिका दहन नहीं किया जाता है. इस वर्ष भद्रा काल का समय 20 मार्च सुबह 10 बजकर 45 मिनट से शुरू होकर रात 9 बजे तक रहेगा. यही वजह है कि होलिका दहन के लिए पंडितों ने रात 9 बजे के बाद का समय दिया है.
Holi 2019: होलिका दहन का ये है शुभ मुहूर्त, पौराणिक नियम भी जान लें
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होली के अगले दिन दुल्हंडी का उत्सव मातंग योग में मनाया जाएगा. दोनों दिन क्रमश: पूर्वा फागुनी और उत्तरा फागुनी नक्षत्र पड़ रहे हैं. स्थिर योग में आने के कारण होली का शुभ पर्व माना गया है.
Holi 2019: होलिका दहन का ये है शुभ मुहूर्त, पौराणिक नियम भी जान लें
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होलिका दहन मुहूर्त : 20:58:38 से 24:23:45 तक
अवधि : 3 घंटे 25 मिनट
भद्रा पूंछ : 17:34:15 से 18:35:34 तक
भद्रा मुख : 18:35:34 से 20:17:45 तक
रंग वाली होली  21 मार्च 2019 को मनाई जाएगी।
Holi 2019: होलिका दहन का ये है शुभ मुहूर्त, पौराणिक नियम भी जान लें
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होलिका दहन के5 पौरा‍णिक नियम

-फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से फाल्गुन पूर्णिमा तक के समय को होलाष्टक माना जाता है, यह वह समय होता है जब शुभ कार्य करने की मनाही होती है.
-होलिका दहन शुभ मुहूर्त में ही किया जाना चाहिए.
-होली के पूजन में नारियल और गेंहूं की बालियां आग में चढ़ाना सबसे शुभ माना गया है.
 -अगर आप होली के दिन कोई भी तंत्र क्रिया नहीं करना चाहते हैं तो गोमती चक्र को अपने सिर के ऊपर से 7 बार निकालकर होली में डालें और होली की भस्म को चांदी की डिबिया में घर की तिजोरी में रखें.
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