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अहोई अष्टमी के उपवास में भूल से भी न करें ये 10 काम

aajtak.in
20 October 2019
अहोई अष्टमी के उपवास में भूल से भी न करें ये 10 काम
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अहोई अष्टमी व्रत कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. इस दिन अहोई माता (पार्वती) की पूजा कर संतान के सौभाग्य और उसकी दीर्घायु के लिए पूजा-अर्चना की जाती है. संतान का सुख पाने के लिए भी ये व्रत श्रेष्ठ माना गया है. इस बार अहोई अष्टमी का पर्व 21 अक्टूबर को है, लेकिन कई लोग 20 अक्टूबर को भी यह व्रत कर रहे हैं. आइए आपको बताते हैं वो 10 बातें जिनका व्रत के दौरान आपको खास ध्यान रखना है.
अहोई अष्टमी के उपवास में भूल से भी न करें ये 10 काम
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1. अहोई माता के व्रत में बिना स्नान किए व्रत पूजा अर्चना न करें. अहोई माता के व्रत में काले गहरे नीले रंगों के वस्त्रों को धारण न करें.
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2. अहोई अष्टमी के व्रत की शुरुआत भगवान गणेश का नाम लिए बगैर बिल्कुल न करें. किसी भी पूजा से पहले हिंदू धर्म में भगवान गणेश का नाम सर्वोपरि बताया है.
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3. व्रत विधान में किसी भी जीव जंतु को चोट न पहुंचाएं और न ही हरे-भरे वृक्षों को तोड़ें. अहोई माता के व्रत में पहले इस्तेमाल हुई सारी पूजा सामग्री को दोबारा इस्तेमाल न करें
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4. मुरझाए फूल या पुरानी मिठाई व्रत विधान में इस्तेमाल ना करें. साथ ही इस दिन अर्ध्य देने के लिए कांसे के लोटे का प्रयोग नहीं करना चाहिए.
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5. खान-पान में तेल, प्याज, लहसुन आदि का प्रयोग न करें. जो करवा आप करवा चौथ पर इस्तेमाल कर चुकी हैं वही करवा इसमें इस्तेमाल न करें.
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6. व्रत में रहने वाली महिलाओं को दिन में नींद लेने से परहेज करना है. दिन में सोने से संतान की आयु क्षीण होती है. इसीलिए दिन में सोना वर्जित है.
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7. कोई भी भिक्षुक द्वार पर आए तो उसे कुछ देकर संतान की दीर्घायु होने का आशीर्वाद अवश्य लें. किसी भी हाल में किसी बुजुर्ग व्यक्ति का अनादर नहीं करना है.
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8. इसमें निर्जला व्रत का अत्यंत महत्व है. इसमें  सास-ससुर या अन्य किसी भी बड़े के लिए बायना निकलने का प्रावधान है.
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9. इसमें आप सामर्थ्यनुसार फल, मिठाई, सूखे मेवे, बेसन और आटे की पूरियां तथा दक्षिणा स्वरूप कुछ रुपए अवश्य रखें.
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10. अहोई अष्टमी के व्रत में कथा के दौरान सात तरह का अनाज अपने हाथों में रखें और पूजा के बाद उसे गाय को खिलाना न भूलें.
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