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विजया एकादशी पर इस विधि से करें पूजन, बरतें ये सावधानियां

2 मार्च 2019 को विजया एकादशी है. आइए जानें, इस दिन किस विधि से पूजा करना चाहिए और क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए.

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aajtak.in [Edited by: नेहा]नई दिल्ली, 18 March 2019
विजया एकादशी पर इस विधि से करें पूजन, बरतें ये सावधानियां भगवान विष्णु

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस दिन व्रत करने का खास महत्व है. ऐसा माना जाता है कि भगवान श्री राम ने भी लंका विजय के लिए इस व्रत विधान को किया था. व्यक्ति के जीवन की सभी मुश्किलों जैसे शत्रु, बाधा, व्यापार और नौकरी की परेशानी तथा सेहत की दिक्कत इसी व्रत से खत्म हो सकती है. विजया एकादशी पर पीले फूल और केसर के द्वारा भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है. व्यक्ति को सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की पीले फूलों से पूजा करनी चाहिए और उन्हें पीले फल और वस्त्र अर्पण करने चाहिए. इस दिन केसर का तिलक भगवान विष्णु को लगाएं और उसी तिलक का प्रयोग प्रसाद के रूप में करें औऱ तिलक लगाएं. ऐसा करने से व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है और मन की इच्छा भी पूरी होती है.

विजया एकादशी पर क्या-क्या सावधानियां बरतें-

- विजया एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठें. स्नान करके साफ हल्के रंग के कपड़े पहनें.

- घर में प्याज लहसुन और तामसिक भोजन का बिल्कुल भी प्रयोग ना करें.

- सुबह और शाम एकादशी की पूजा पाठ में साफ-सुथरे कपड़े पहन कर ही व्रत कथा सुनें.

-  विजया एकादशी की पूजा में हर कार्य में विजय के लिए शांति पूर्वक माहौल बनाए रखें.

- विजया एकादशी पर एक आसन पर बैठकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का 108 बार जाप जरूर करें.

विजया एकादशी पर ऐसे करें पूजन-

- इस व्रत को करने के लिए एक दिन पूर्व यानी दशमी तिथि को कलश को शुद्ध जल से भरें और घर के पूजा स्थल में स्थापित करें.

- कलश पर आम के पत्ते रखकर उसपर एक नारियल स्थापित करें तथा श्री विष्णु जी की मूर्ति या चित्र को पीले वस्त्र पर स्थापित करें.

- फिर एकादशी के दिन प्रात:काल उठकर स्नान करें और रोली, मौली, माला, चंदन, सुपारी इत्यादि से पूजन करें.

- कलश के ऊपर सप्तधान्य और जौ रखें तथा धूप, दीप गंध समर्पित करें. पीली मिठाई का भोग लगायें. धूप दीप जलायें और एकादशी की कथा सुने और मन ही मन विष्णु से अपनी समस्या कहें.

- कथा सम्पूर्ण होने पर श्रीविष्णु जी की आरती करें.  

- सारा दिन भजन कीर्तन करें और रात्रि जागरण करें. फिर द्वादशी के दिन उस कलश को लेकर किसी जलाशय के पास स्थापित करें या विष्णु मंदिर में रख आएं.  

- विधिपूर्वक कलश की पूजा करें और पूजन के बाद वह कलश, श्रीविष्णु की मूर्ति के साथ किसी ब्राह्मण को दान में दें.  ब्राह्मणों को औऱ जरूरतमंद लोगों को सामर्थ्य अनुसार दान भी दें. उसके बाद स्वयं भोजन ग्रहण करें.

विजया एकादशी पर करें महाउपाय-

- इस दिन सुबह के समय जल्दी उठें और स्नान के जल में केसर डालकर स्नान करें.

- सूर्य नारायण को जल में 11 पत्ती केसर के डाल कर अर्घ्य दें.  

- भगवान विष्णु या राम दरबार के चित्र को अपने सामने स्थापित करें.

- ग्यारह ग्यारह की संख्या में केले, लड्डू, फल, बादाम, मुन्नका आदि पूजा में रखें और दीया जलाएं.

-  ॐ  नारायण नमः मंत्र का तीन माला जाप करें.

- जाप के बाद यह फ़ल सामग्री जरूरतमंद लोगों में बांट दें.

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