एडवांस्ड सर्च

होलिका दहन की भस्म अशुभ प्रभाव से घर को बचाती है

होली के त्योहार में जितना महत्व रंगों का होता है, उससे कहीं ज्यादा होलिका दहन और पूजा को जरूरी माना गया है.

Advertisement
aajtak.in
वन्‍दना यादव नई दिल्ली, 23 March 2016
होलिका दहन की भस्म अशुभ प्रभाव से घर को बचाती है  रंगों जितना ही महत्व है होलिका दहन का

हिन्दू धर्मानुसार, होली के दिन से ही वसंत ऋतु का आगमन होता है और इस दिन पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. होली का त्योहार जितना महत्वपूर्ण होता है, उतना जरूीर है इसके दहन का शुभ मुहूर्त पता होना. संपूर्ण भारतवर्ष में यह त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है लेकिन ब्रज और मथुरा जैसे क्षेत्रों में इसका रंग ही अलग होता है.

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
साल 2016 में होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 23 मार्च को शाम 06:30 से लेकर रात्रि 08:53 तक का है. अगले दिन 24 मार्च 2016 को रंगवाली होली खेली जाएगी.

पूजा विधि
नारद पुराण के अनुसार होलिका दहन के अगले दिन (रंग वाली होली के दिन) सुबह उठकर आवश्यक नित्यक्रिया से निवृत्त होकर पितरों और देवताओं के लिए तर्पण-पूजन करना चाहिए. साथ ही सभी दोषों की शांति के लिए होलिका की विभूति की वंदना कर उसे अपने शरीर पर लगाना चाहिए.
घर के आंगन को साफ करके उसमें एक रंगोली बनानी चाहिए और उसकी पूजा-अर्चना करनी चाहिए. ऐसा करने से आयु की वृ्द्धि, आरोग्य की प्राप्ति और समस्त इच्छाओं की पूर्ति होती है.

करें इस कल्याणकारी मंत्र का जाप
ऐसा माना जाता है कि होली की बची हुई अग्नि और भस्म को अगले दिन सुबह घर में लाने से घर को अशुभ शक्तियों से बचाने में सहयोग मिलता है और इस भस्म का शरीर पर लेपन भी किया जाता है. भस्म का लेपन करते समय निम्न मंत्र का जाप करना कल्याणकारी रहता है:
वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रह्मणा शंकरेण च।
अतस्त्वं पाहि मां देवी! भूति भूतिप्रदा भव।।

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay