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हरतालिका तीज 2018: तीज पर इन मंत्रों का करें जाप, ये है व्रत विधि

इस बार 12 सितंबर को हरतालिका तीज का पर्व मनाया जाएगा. हरतालिका तीज के पर्व पर मनचाहे वर के लिए बताए गए मंत्र का जाप करें.

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aajtak.in [Edited by: नेहा फरहीन]नई दिल्ली, 11 September 2018
हरतालिका तीज 2018: तीज पर इन मंत्रों का करें जाप, ये है व्रत विधि हरतालिका तीज

हरतालिका तीज को हरितालिका तीज भी कहते हैं. चूंकि इसका संबंध शिव से है और हर शिव का नाम है अतः हरतालिका तीज ज्यादा उपयुक्त है. इस पर्व को भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि को मनाया जाता है, महिलाएं इस दिन निर्जन व्रत रखने का संकल्प लेती हैं.

मुख्य रूप से यह पर्व मनचाहे और योग्य पति को प्राप्त करने का है, हालांकि कोई भी स्त्री इस व्रत को रख सकती है. इसी दिन हस्तगौरी नामक व्रत को करने का विधान भी है, जिसको करने से सम्पन्नता की प्राप्ति होती है. इस बार हरितालिका तीज 12 सितंबर को मनाई जाएगी.

क्या है हरितालिका व्रत की विधि ?

- प्रातः काल से संकल्प लेकर निर्जल उपवास रखें, अगर स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो फलाहार भी कर सकते हैं.

- सायं काल भगवान शिव और पार्वती की संयुक्त उपासना करें,  उस समय स्त्रियों को संपूर्ण श्रंगार करना चाहिए.

- मां पार्वती को सौभाग्य का सारा सामान अर्पित करें, उनसे अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें.

- विवाहिता स्त्रियों को अपनी सास को सौभाग्य की वस्तुएं देकर उनसे आशीर्वाद जरूर लेना चाहिए.

- भगवान शिव और मां पार्वती की संयुक्त पूजा करने के बाद ही इस व्रत का पारायण करें.

- इस दिन रात्रि जागरण करना भी श्रेष्ठ होता है.

तीज के दिन अलग-अलग राशि की महिलाएं भगवान शिव और मां पार्वती को क्या अर्पित करें?

मेष- लाल चूड़ियां.

वृषभ- चांदी के बिछुवे.

मिथुन- हरी साड़ी.

कर्क- इत्र और सुगन्धित चीजें.

सिंह- आलत.

कन्या- हरी चूड़ियां.

तुला- चांदी की पायल.

वृश्चिक- लाल साड़ी.

धनु- सिन्दूर.

मकर- आलता और सिन्दूर-बिंदी.

कुम्भ- इत्र और सुगंध.

मीन- चांदी के बिछुवे.

तीज के दिन किस विशेष मंत्र का जाप करें?

- तीज के दिन विवाह संबंधी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इस मंत्र का श्रद्धा पूर्वक 11 माला जाप करें.

- मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से करें, और सम्पूर्ण श्रृंगार करके ही मंत्र का जाप करें.

- संध्याकाल को मंत्र जाप करना सर्वोत्तम होग.

- मंत्र होगा - " हे गौरीशंकर अर्धांगी , यथा त्वां शंकर प्रिया। तथा माम कुरु कल्याणी, कान्तकांता सुदुर्लभाम।।"

- इस मंत्र के जाप से मनचाहे और योग्य वर की प्राप्ति होती है.

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