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'...अल्पसंख्यकों को छला गया' ...तो क्या ऐसे होगा छल में छेद!

बात सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की हो रही थी. बात अल्पसंख्यकों के साथ छल की हो रही है थी. बात 21वें सदी के नए भारत की हो रही थी. मगर कुछ लोग हैं जो साज़िशों को बुनकर नफरतों की धुन पर एकता को धुनने की कोशिश कर रहे हैं.

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aajtak.in [Edited by: परवेज़ सागर]नई दिल्ली, 29 May 2019
'...अल्पसंख्यकों को छला गया' ...तो क्या ऐसे होगा छल में छेद! कुछ लोग PM मोदी के भाषण के विपरीत काम कर रहे हैं

एक तरफ दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री बनने जा रहे नरेंद्र मोदी सबका साथ.. सबका विकास.. सबका विश्वास का नारा दे रहे हैं. अल्पसंख्यकों को अब तक छले जाने पर उस छल में छेद करने की बात कर रहे हैं. तो वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग फिर से नफरतों की दुकानें सजाने में लग गए हैं. दिल्ली के करीब गुरुग्राम और मध्य प्रदेश के सिवनी इलाके से नफरतों की ऐसी ही कुछ ख़बरें सामने आई हैं.

नवनिर्वाचित पीएम मोदी ने कहा- मेरे प्यारे देशवासियों. विश्वभर में रमज़ान का महीना पूरी श्रृद्धा और सम्मान से मनाया जाता है. इंसान जब खुद भूखा होता है तो उसको दूसरों की भूख का भी एहसास होता है. जब वो प्यासा होता है तो दूसरों की प्यास का एहसास होता है. पैगंबर मोहम्मद साहब की शिक्षा और उनके संदेश को याद करने का ये अवसर है. समानता और भाईचारे के मार्ग पर चलना हमारी ज़िम्मेदारी बनती है. एक बार पैगंबर मोहम्मद साहब से पूछा गया कि इस्लाम में कौन सा कार्य सबसे अच्छा है.

नरेंद्र मोदी ने बोला कि किसी गरीब और ज़रूरतमंद को खिलाना और सभी से सदभाव से मिलना चाहे आप उन्हें जानते हो या ना जानते हो. पैगंबर मोहम्मद साहब ज्ञान और करुणा में विश्वास रखते थे, उन्हें किसी बात का अहंकार नहीं था. वो कहते थे कि अहंकार ही ज्ञान को पराजित करता है. मोदी ने कहा कि रमज़ान में दान का भी काफी महत्व है. लोग इस पवित्र माह में ज़रूरतमंदों को दान देते हैं. मैं सभी देशवासियों को रमज़ान के पवित्र महीने की शुभकामनाएं देता हूं.

पीएम मोदी ने कहा कि जैसा देश के गरीबों के साथ हुआ है. वैसा ही छल इस देश की माइनॉरिटी के साथ हुआ है. एक छलावा. एक काल्पनिक भय. एक काल्पनिक वातावरण और डर का माहौल पैदा कर करके उनको दूर भी रखा गया. उन्हें दबाकर रखा गया. उन्हें सिर्फ चुनाव में उपयोग करने का खेल चला. हमें इस छल में भी छेद करना है. हमें विश्वास जीतना है.

इधर, पीएम ये सब बातें मंच से बोल रहे थे. देश को संबोधित कर रहे थे, उधर, गुड़गांव में एक मुस्लिम लड़के के साथ शर्मनाक घटना घटी. उस लड़के ने बताया कि वो नमाज़ पढ़कर निकला तो उसे कुछ गुंडों ने कहा- मुल्ले कहां जा रहा है. फिर एक गुंडा उसे गाली देने लगा. आरोपी ने कहा- तुमको पता नहीं इस एरिया में टोपी पहनकर जाना अलाउड नहीं है. उसके बाद आरोपी उसे धक्का देकर रोड पर ले गया. बोला तुमको सुअर का गोश्त खिलाउंगा. तुमको जय श्री राम बुलवाऊंगा. फिर उसका कुर्ता फाड़ दिया गया. पेट में मारा तो वो रोने लगे. पूरा शरीर कांपने लगा और वो बेहोश हो गया.

जब पीएम मोदी मंच से अल्पसंख्यक कल्याण की बात कर रहे थे. तो ठीक उसी वक्त मध्य प्रदेश के सिवनी इलाके में एक मुस्लिम औरत को मारा पीटा जा रहा था. जय श्री राम के नारे लगाए जा रहे थे. जबरन महिला से जय श्री राम के नारे लगवाए जा रहे थे. उस मुस्लिम महिला को चप्पलों से पीटा गया. फिर उसके साथ के तीन लोगों को डंडों से पीटा गया. आरोपियों को शक था कि इनके पास गोमांस है.

बात सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की हो रही थी. बात अल्पसंख्यकों के साथ छल की हो रही है थी. बात 21वें सदी के नए भारत की हो रही थी. मगर कुछ लोग हैं जो साज़िशों को बुनकर नफरतों की धुन पर एकता को धुनने की कोशिश कर रहे हैं.

रमज़ान के महीने में बरकत आलम गुरुग्राम की एक मस्जिद में रोज़ा खोलने और नमाज़ पढ़ने के लिए गया था. लौटा तो कुछ गुंडे शराब के नशे में टकरा गए. बोले टोपी पहनकर इस इलाके में आना मना है. सवाल पूछा तो उन लोगों ने रोज़ेदार की टोपी हवा में लहरा दी. कपड़े फाड़ दिए और पेट में घूंसे मारने लगे.

एक तरफ संसद भवन के सेंट्रल हॉल में वर्तमान और नव निवार्चित सांसदों के सामने नरेंद्र मोदी अल्पसंख्यकों के साथ हुए धोखे का ज़िक्र करते हुए उनके विश्वास को जीतने का विश्वास जगा रहे थे. तो वहीं दूसरी तरफ सिवनी से लेकर गुरुग्राम तक. ये लोग उस विश्वास की नींव को खोदकर उसमें मट्ठा डाल रहे थे. ताकि विश्वास का ये बीज कभी पनपने ही ना पाए.

आप नेता और सांसद संजय सिंह ने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि हिंसक प्रवृति भाजपा की सरकार आने के दूसरे दिन से शुरू हो गई. सिवनी से लेकर गुरुगांव तक देशभक्ति का प्रमाण बांट कौन लोग रहे हैं जिन लोगों ने गोडसे को देशभक्त बताया.

समझ नहीं आ रहा है कि शुरू कहां से करें. दोनों ही तस्वीरें अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की हैं. दोनों में ही डर का माहौल पैदा किया जा रहा है. इन पर तो बहरहाल शक था कि ये गोमांस ले जा रहे हैं. मगर इसकी क्या खता. ये तो 15 घंटे भूखा-प्यासा रहने के बाद रोजा खोलने जा रहा था. इसे क्यों मारा. क्यों इसकी टोपी ज़मीन पर फेंक दी. क्यों इसके कुर्ते को फाड़ा. उन लोगों ने सिर्फ इसके कपड़े नहीं फाड़े बल्कि कानून व्यवस्था पर इसके विश्वास को भी तार-तार करने की कोशिश की है.

गुरुग्राम में गुंडागर्दी की ये वारदात शनिवार रात करीब 10 बजे की है. जब उसके साथ शराब के नशे में करीब 4-5 लोगों ने उसके पहनावे पर पहले तंज़ कसा औऱ फिर उसके साथ मारपीट की. उसकी टोपी फेंकी. कुर्ता फाड़ा. जय श्रीराम का नारा लगाने की ज़िद करने लगे. पुलिस को इत्तेला दी गई तो पुलिस ने उल्टे बरकत को ही थाने में बिठा लिया और मामले को रफा दफा करने की कोशिश करने लगी.

जानकारी के लिए बता दें कि इस छोटे मोटे झगड़े में शराब के नशे में चूर उन लोगों ने बरकत आलम को इस कदर मारा कि वो बेहोश हो गए. और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. बस इतनी सी बात थी. पता नहीं क्यों बिहार के बेगुसराय से यहां टेलरिंग का काम सीखने आए बरकत आलम ने इस बात का बतंगड़ बना दिया.

विरोध-प्रदर्शन के बाद पुलिस को देर रात पीड़ित का बयान दर्ज कर अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करना पड़ा. मगर अभी तक वो किसी आरोपी को पकड़ नहीं पाई है. हालांकि गुरुग्राम में ये पहला मामला नहीं है. नवरात्र में होटल बंद कराने, मुस्लिम युवकों की जबरन दाढ़ी काटने और उन्हें नमाज़ पढ़ने से रोकने के कई और मामले यहां पहले भी सामने आ चुके हैं.

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