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प्रोपेगैंडाः मुलाकात से पहले किम को चिढ़ा रहा है अमेरिका!

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वो दो चेहरे हैं, जो फिलहाल दुनिया की राजनीति का केंद्र बने हुए हैं. मगर 12 जून को सिंगापुर में ट्रंप और किम की मुलाकात से ऐन पहले अमेरिकी मीडिया हाथ धो कर किम के पीछे पड़ गई है. किम को चिढ़ाने का वो कोई मौका नहीं छोड़ रही.

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परवेज़ सागर/ शम्स ताहिर खान नई दिल्ली, 08 June 2018
प्रोपेगैंडाः मुलाकात से पहले किम को चिढ़ा रहा है अमेरिका! किम और ट्रंप की मुलाकात पर पूरी दुनियाभर की नजरें टिकी हुई हैं

उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वो दो चेहरे हैं, जो फिलहाल दुनिया की राजनीति का केंद्र बने हुए हैं. मगर 12 जून को सिंगापुर में ट्रंप और किम की मुलाकात से ऐन पहले अमेरिकी मीडिया हाथ धो कर किम के पीछे पड़ गई है. किम को चिढ़ाने का वो कोई मौका नहीं छोड़ रही. किम को उनके अजीब-अजीब कार्टून, तस्वीरों और तानों से लगातार चिढाने की कोशिश की जा रही है. होटल का बिल और उधार में प्लेन मांगने जैसी बातों के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी शख्स ने एक नया शिगूफा छोड़ा है, और वो ये कि ट्रंप से मीटिंग के लिए किम जोंग उन ने बाकायदा उनके हाथ पैर जोड़े थे और मुलाकात की भीख मांगी थी.

ट्रंप के वकील का गैरज़िम्मेदाराना बयान

कभी मिसाइल मैन. तो कभी मोटा तानाशाह. कभी छोटा मार्शल. तो कभी पागल मार्शल. और कभी किम को फ़क़ीर राष्ट्राध्यक्ष बताने का प्रोपेगैंडा. पिछले एक साल में अमेरिका ने किम को भड़काने के लिए क्या कुछ नहीं कहा. और अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वकील गुलियानी का बेहद गैरज़िम्मेदाराना बयान दे रहे हैं.

ट्रंप के वकील गुलियानी ने कहा कि किम ने अमेरिका के उप राष्ट्रपति का अनादर किया था और परमाणु युद्ध की धमकी भी दी थी. हमने उनसे (किम) कहा कि ऐसे हालात में हम बातचीत करेंगे ही नहीं. ऐसे में बातचीत को फिर से करवाने के लिए किम जोंग उन ने घुटनों के बल आकर ट्रंप से भीख मांगी थी. हम उनको इसी स्थिति में ही तो देखना चाहते थे.

अमेरिका की नीयत में खोट!

किम तानाशाह ही सही मगर सिंगापुर में वो अमेरिकी राष्ट्रपति से उत्तर कोरिया के राष्ट्राध्यक्ष के तौर पर मुलाकात करने जा रहा है. और किसी राष्ट्राध्यक्ष के लिए ऐसी ज़बान इस्तेमाल कर के क्या अमेरिका किम को भड़काने की कोशिश नहीं कर रहा है. ऐसे में सवाल ये कि क्या किम से बातचीत नहीं चाहता है अमेरिका? क्या विश्वशांति सिर्फ अमेरिका का दिखावा है? क्या अमेरिका की नीयत में ही खोट है?

किम जोंग उन की तौहीन

कहते हैं इंसान को तब तक ही डराना चाहिए जब तक डर बाकी रहे. क्योंकि एक बार डर खत्म हो गया तो मौत से भी टक्कर ले लेता है इंसान. और यही गलती बार बार कर रहा है अमेरिका. पहले उसने उत्तर कोरिया के मार्शल किम जोंग उन को पानी पी-पीकर कोसा और अब जब वो दुनिया पर मंडराए विश्वयुद्ध के खतरे को टालने के लिए और उत्तर कोरिया के बेहतर भविष्य के लिए अपने सबसे बड़े दुश्मन डोनल्ड ट्रंप से भी मीटिंग को राज़ी हो गया है. तब घुटनों के बल लाकर ट्रंप से भीख मांगवाने जैसी बात करके अमेरिका ना सिर्फ किम जोंग उन की तौहीन कर रहा है बल्कि ये उत्तर कोरिया की ढाई करोड़ जनता का भी अपमान है.

इतना ही नहीं किम के खिलाफ अमेरिकी प्रोपेगैंडा का आलम ये है कि उसे फकीर साबित करने की भी कोशिश की जा रही है. वरना उत्तर कोरिया जैसे मुल्क के लिए जिसके पास 6-6 परमाणु बम है. अपने राष्ट्राध्यक्ष के होटल में रुकने के खर्चा उठाना कितनी बड़ी बात है. मगर फिर भी सिंगापुर में ट्रंप के साथ मीटिंग को लेकर ऐसी खबरें फैलाई जा रही हैं कि उत्तर कोरिया के पास किम जोंग उन के होटल का खर्चा उठाने के पैसे नहीं हैं. जबकि जिस सुइट में किम को रुकना है उसके एक दिन का किराया सिर्फ 4 लाख रुपये है.

इतना ही नहीं इंटरनेट पर किम जोंग उन का नाम लिखिए तो सैकड़ों ऐसी तस्वीरें उभरकर सामने आएंगीं कि आंखों पर यकीन नहीं होगा. किसी में उसे बूढ़ा तो किसी में टकला. किसी में भैंगा तो किसी में डरा हुआ दिखाया गया है. और तो और इंटरनेट पर किम जोंग उन को चिढ़ाने वाले कार्टूनों की बाढ़ है.

अमेरिका का प्रोपेगैंडा

अमेरिका और उत्तर कोरिया की ये दुश्मनी तब से है जब से कोरिया दो टुकड़ों में बंटा. और तब से ही कोरिया के तीनों शासक के खिलाफ अमेरिका प्रोपेगैंडा करता रहा है. पहले किम इल संग, फिर किम जोंग इल और अब किम जोंग उन. इसमें शक़ नहीं कि किम इल संग को छोड़कर बाकी दोनों शासक उत्तर कोरिया के चुने हुआ नुमाइंदा नहीं. और अभी भी किम एक तानाशाह की तरह देश पर राज कर रहा है.

जब से किम जोंग उन ने उत्तर कोरिया की कमान संभाली है उसके खिलाफ इंटरनेट पर तमाम तरह की खबरें हैं. जिनमें उसे एक क्रूर तानाशाह और अपनी जनता के लिए घातक इंसान की तरह पेश किया गया है. जानकार मानते हैं अमेरिका अपनी नीति के तहत उत्तर कोरिया के शासकों के खिलाफ ऐसी खबरें फैला रहा है. और अब सिंगापुर में मीटिंग तय होने के बाद भी अमेरिका ने अपनी इस नीति में कोई बदलाव नहीं किया है.

पिछले एक साल से अमेरिका अपनी ज़हर बुझी बातों और प्रोपेगैंडा से किम को भड़काने की कोशिश कर रहा है. यकीन मानिए अगर ऐसा ही जारी रहा तो बातचीत तो दूर किम जोंग उन, ट्रंप से मिलने को भी राज़ी नहीं होगा. और अगर किम सच में भड़क गया तो घूम फिरकर हालात वहीं पहुंच जाएंगे जहां पिछले साल थे. यानी विश्वयुद्ध की दहलीज़ पर.

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