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यौन शोषण के आरोपी बेटे को बचाने के लिए दरोगा ने रची हत्या की साजिश

आरुषि केस में शुरुआती जांच करने वाले दरोगा बच्चू सिंह अब हत्या के एक मामले में फंस गए हैं. आपको बताते हैं, पूरा मामला क्या है. दरअसल गाजियाबाद के थाना कविनगर में दिसंबर महीने के पहले हफ्ते में एक लड़की के गुमशुदा होने की खबर आई.

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तनसीम हैदर [Edited By:कुलदीप मिश्र]गाजियाबाद, 01 April 2014
यौन शोषण के आरोपी बेटे को बचाने के लिए दरोगा ने रची हत्या की साजिश Ghaziabad Murder

आरुषि केस में शुरुआती जांच करने वाले दरोगा बच्चू सिंह अब हत्या के एक मामले में फंस गए हैं. आपको बताते हैं, पूरा मामला क्या है. दरअसल गाजियाबाद के थाना कविनगर में दिसंबर महीने के पहले हफ्ते में एक लड़की के गुमशुदा होने की खबर आई.

पुलिस ने उस लड़की का पता लगाने के लिए फौरन अपनी टीमों को गाजियाबाद के अलग अलग हिस्सों की तरफ रवाना कर दिया. लेकिन तमाम जगह तलाशी लेने के बाद भी पुलिस को कोई मामूली सुराग भी नहीं मिला.

पुलिस ने तफ्तीश को आगे बढ़ाने के लिए उस लड़की और लड़की के परिवार के तमाम लोगों के मोबाइल को भी खंगालना शुरू किया. पुलिस जब लड़की के घरवालों के मोबाइल खंगाल रही थी तभी उसकी नज़र एक धुंधली सी तस्वीर पर जा टिकी.

घरवालों से पुलिस को ये तो पता चल ही गया कि मोबाइल पर दिखने वाली शक्ल उन लोगों को भी कुछ रोज पहले ही दिखाई देनी शुरू हुई थी. और फिर वो चेहरा अक्सर उनके घर पर नज़र आने लगा. दरअसल तस्वीर में वो चेहरा उस गुमशुदा लड़की की एक सहेली का था.

और उस सहेली के बारे में घरवालों ने जो कुछ भी बताया वो भी पुलिस को कुछ अजीब नहीं लगा...फिर भी पुलिस मोबाइल में कैद उस लड़की की तलाश में निकल पड़ी. अब पुलिस के सामने दो लड़कियों की तलाश की चुनौती थी, जिसे 50 लाख की आबादी वाले गाजियाबाद में ढूंढ़ना पुलिस के लिए अंधेरी कोठरी में सुई ढूंढने जैसा था.

लिहाजा पुलिस उस तस्वीर को हाथ में लेकर गुमशुदा लड़की की सहेली की तलाश में भी निकल पड़ी. गाजियाबाद की सड़कों पर दिन रात दौड़ती पुलिस की कोशिश आखिरकार रंग लाई और जल्दी ही उसके हाथ वो चेहरा लग गया, जिसे हाथों में मोबाइल पर लेकर वो दर दर भटक रही थी. उस लड़की के साथ उसका पति भी था.

उस लड़की का नाम रश्मि है और वो अपने पति अमरपाल के साथ गाजियाबाद में ही रहती है. पेशे से पत्रकार रश्मि की कुछ वक्त पहले ही उस लड़की से दोस्ती हुई थी, जो इस वक्त गुमशुदा है और जिसका पता जानने के लिए ही रश्मि तक पहुंचना पुलिस को बेहद जरूरी लग रहा था.

रश्मि ने किया था नौकरी दिलाने का वादा
पुलिस ने उस गुमशुदा लड़की का पता जानने के लिए रश्मि से पूछताछ का सिलसिला शुरू किया. रश्मि ने पुलिस को उस गुमशुदा लड़की से हुई अपनी दोस्ती के बारे में सब कुछ बताया. उसने ये भी खुलासा किया कि उसने रश्मि को नौकरी दिलाने का भी वायदा किया था. लेकिन अचानक वो लड़की लापता हो गई.

पुलिस जब रश्मि से कुछ हासिल नहीं कर सकी तब उसने रश्मि के पति का मुंह खुलवाने का इरादा किया. क्योंकि पुलिस अमरपाल का अतीत अच्छी तरह जानती थी. लिहाजा पुलिस अमरपाल के साथ थोड़ा सख्ती से पेश आई...पुलिस की ये कोशिश कामयाब रही. पुलिस के तेवर से अमरपाल टूट गया और फिर जब उसने मुंह खोला तो कत्ल के एक किस्से के साथ साथ एक वर्दी वाले का चेहरा भी सामने आ गया.

कत्ल उसी गुमशुदा लड़की का, जिसकी तलाश में पुलिस दर दर भटक रही थी. अमरपाल ने ये भी खुलासा किया कि कत्ल की वो साजिश किसने और कैसे रची और फिर उसे कैसे अंजाम तक पहुंचाया गया.

अमरपाल को बच्चू सिंह ने दी थी सुपारी
अमरपाल ने पुलिस को बताया कि इस खौफनाक कत्ल की साजिश का सारा ताना बाना किसी और ने नहीं बल्कि गाजियाबाद में तैनात रह चुके दारोगा बच्चू सिंह ने रचा था. अमरपाल के मुंह खोलते ही पुलिस ने तुरंत रश्मि और अमरपाल के साथ साथ बच्चू सिंह और उसके साथी सिपाही वीनेश को गिरफ्तार कर लिया.

आपको बता दें कि बच्चू सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस का वही दारोगा है जिसने आरुषि और हेमराज के कत्ल के केस में बड़ी अहम भूमिका अदा की थी. आरुषि और हेमराज के कत्ल के वक्त यानी मई 2008 में बच्चू सिंह नोएडा के सेक्टर 20 थाने में तैनात था. और उसी ने देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री की शुरूआती तहकीकात का काम किया था. बाद में वही बच्चू सिंह कत्ल के उस केस का अहम गवाह भी बना था.

उस गुमशुदा लड़की के कत्ल की साजिश इसी बच्चू सिंह ने अपने एक हवलदार के साथ रची थी..और वो भी उस वक्त जब वो बागपत की टटीरी चौकी पर तैनात था. बच्चू सिंह के इशारे पर उसके मातहत काम करने वाले सिपाही विनेश के साथ उस लड़की के कत्ला का सारा ताना बाना बुना और फिर विनेश ने ही कत्ल की सुपारी प्रोफेशनल किलर अमरपाल को दी.

लड़की को साजिश के जाल में कैसे फंसाने के लिए अमरपाल की पत्नी रश्मि का इस्तेमाल किया गया. रश्मि ने पहले लड़की से दोस्ती की और पैसे और नौकरी दिलाने के बहाने से उसे गाजियाबाद के बस अड्डे पर मिलने बुलाया. तारीख थी 30 नवंबर. बस अड्ड़े पर अमरपाल अपने एक साथी के साथ पहले से ही मौजूद था. दोनों उस लड़की को बाइक पर बिठाकर अलीगढ़ के पास ले गए और वहीं दुपट्टे से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी और लाश को नहर में ठिकाने लगाकर वहां से फरार हो गए.

और हत्या की वजह?
दरअसल इस किस्से की शुरुआत बच्चू सिंह के बेटे और एक लड़की की प्रेम कहानी से शुरु होती है. बच्चू सिंह का बेटा तरुण शादी का झांसा देकर लड़की का यौन शौषण कर रहा था, और जब इसने शादी के लिए दबाव डाला तो तरुण ने शादी करने से मना कर दिया. हर तरफ से मायूस होकर इस लड़की ने मार्च 2013 तरुण के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज करा दिया.

बेटे के खिलाफ बलात्कार का मामला थाने में दर्ज हुआ तो बच्चू सिंह को ये बात गवारा नहीं हुई. लिहाजा उसने कई बार लड़की पर समझौता करने का दबाव बनाया. इस बीच बच्चू सिंह का तबादला बागपत की

टटीरी चौकी पर हो गया. अपने लड़के की गिरफ्तारी से परेशान बच्चू सिंह ने अपनी परेशानी चौकी में ही तैनात सिपाही को बताई और फिर उसी सिपाही ने बच्चू सिंह की मुलाकात सुपारी किलर अमरपाल से करा दी.

लड़की के गायब होने का पूरा केस ब्लाइंड था और पुलिस के पास सुराग के नाम पर केवल एक फोन नंबर था जिससे आखिरी बार उसके नंबर पर फोन आया था. पुलिस की तफ्तीश में ही ये खुलासा हुआ कि वह नंबर वारदात से एक हफ्ते पहले ही एक्टिवेट कराया गया था.

तब पुलिस के हाथ दूसरा सुराग रश्मि की वो धुंधली फोटो की शक्ल में मिला...और फिर पूरी साजिश की तस्वीर साफ हो गई.

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