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चीन को आतंकी मसूद से है प्यार, पर चीनी मुसलमानों पर करता है अत्याचार!

हाफिज़ चीन का यार है. मसूद अज़हर चीन को पसंद है. दाऊद का चीन ख्याल रखता है. चीन के पसंदीदा ये तीनों लोग नाम से तो मुसलमान नज़र आते हैं. तो क्या ये मान लें कि चीन मुसलमानों का हिमायती है. तो क्या ये मान लें कि जब जब मुसलमानों पर खतरा मंडराएगा. तब तब चीन उनका रक्षक बनकर सामने आ जाएगा.

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aajtak.in [Edited by: परवेज़ सागर]नई दिल्ली, 29 March 2019
चीन को आतंकी मसूद से है प्यार, पर चीनी मुसलमानों पर करता है अत्याचार! चीनी मुसलमानों पर अत्याचार की तस्वीरें दुनिया ने देखी थीं

क्या आपने कभी सोचा है कि चीन क्यों हमेशा पाकिस्तान और पाकिस्तानी आतंकियों के लिए ढाल बना रहता है? और पाकिस्तान क्यों हमेशा चीन की तरफदारी करता है? क्या चीन को पाकिस्तान से सचमुच प्यार है और क्या चीन मुसलमानों का असली हिमायती है? अगर आपको ज़रा सा भी ऐसा लगे तो उससे पहले ये खुलासा देख लीजिए. क्योंकि इस रिपोर्ट को पढ़ने और देखने के बाद आपको चीन के दो चेहरे नज़र आएंगे. एक चेहरा वो है जो पाकिस्तान और उसके आतंकियों की हिफाज़त करता है. और दूसरा वो, जो अपने ही देश के मुसलमानों पर ज़ुल्म ढहाता है. वो ज़ुल्म ढहाता है और पाकिस्तान चुप रहता है.

हाफिज़ चीन का यार है. मसूद अज़हर चीन को पसंद है. दाऊद का चीन ख्याल रखता है. चीन के पसंदीदा ये तीनों लोग नाम से तो मुसलमान नज़र आते हैं. तो क्या ये मान लें कि चीन मुसलमानों का हिमायती है. तो क्या ये मान लें कि जब जब मुसलमानों पर खतरा मंडराएगा. तब तब चीन उनका रक्षक बनकर सामने आ जाएगा.

मुसलमान तकरीबन पूरी दुनिया में हैं. कहीं अक्सरियत में यानी बहुसंख्यक हैं. तो कहीं अक्लियत में यानी अल्पसंख्यक हैं. ज़ाहिर है क्षेत्रफल के हिसाब से चीन अगर दुनिया का चौथा सबसे बड़े मुल्क है तो यहां भी मुसलमान होने चाहिए. मगर क्या वाकई आपने कभी चीनी मुसलमानों को देखा है. सोच में पड़ना लाज़िम है. क्योंकि हममे से कई लोगों ने चीन में इस्लाम के होने की खबर सुनी ही नहीं. मगर ऐसा नहीं है कि चीन में मुसलमान हैं ही नहीं.

चीन की कुल आबादी का करीब डेढ़ फीसदी हिस्सा मुसलमानों का है. यानी 138 करोड़ की कुल आबादी में 2 से 3 करोड़ मुसलमान हैं. एक ऐसा देश जहां की ज़्यादातर आबादी महज़ब में यकीन ही नहीं रखती. वहां इतनी बड़ी आबादी इस्लाम की मानने वाली है. तो क्या जिस तरह चीन पाकिस्तानी आतंकियों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित होने से बचाता है. वैसे ही क्या वो अपने मुल्क के मुसलमानों के हक़ में भी फिक्रमंद रहता है.

सच तो ये है कि चीन में मुसलमानों पर बहुत अत्याचार होता है. हाल ही में इसकी कई तस्वीरें दुनिया के सामने आई थीं. जी हां, यही हकीकत है चीन की. दुनिया के सामने जो पाकिस्तान और पाकिस्तानी आतंकियों की हिमायत करता नज़र आता है. उससे किसी को ये मुगालता नहीं होना चाहिए कि चीन मुसलमानों का हिमायती है. अगर ऐसा होता तो चीनी मुसलमानों पर चीन में कदम कदम पर पाबंदियां ना लगी होतीं.

चीनी सरकार ने वहां के मुसलमानों पर कई तरह की पाबंदियां लगा रखी हैं. उनके लंबी दाढ़ी रखने पर पाबंदी है. नकाब पहनने पर पाबंदी है. सार्वजनिक जगहों पर नमाज़ पढ़ने पर पाबंदी है. बच्चों को धार्मिक शिक्षा देने पर रोक है. लाउडस्पीकर पर अज़ान पुकारने पर पाबंदी है. हलाल गोश्त खाने पर पाबंदी है. और तो और सरकारी टीवी चैनल देखने की भी मनाही है.

यहां तक की चीन की सरकार ही तय करती है कि उनके मुल्क में रह रहे मुसलमान क्या खाएंगे. क्या पिएंगे. क्या ओढेंगे. क्या पहनेंगे. कुल मिलाकर चीनी सरकार की कोशिश है कि वहां के मुसलमानों की मज़हबी पहचान को ही खत्म कर दिया जाए. मगर त्रासदी ये है कि चीन में मुसलमानों पर हो रहे जुल्मों सितम पर कभी कोई चर्चा नहीं करता. दुनिया के तमाम देश अब भी चुप्पी साधे हुए हैं क्योंकि ये मामला चीन से जुड़ा है.

यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने शिनजियांग प्रांत में ऐसे कई खुफिया कैंप बना रखे हैं. जहां सरकार की प्रताड़ना के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले 10 लाख से ज़्यादा चीनी मुसलमानों को कैद करके रखा गया है. यहां उनकी धार्मिक आज़ादी छीन ली गई है. और उन्हें मज़हबी कामों से दूर रहने को मजबूर किया जा रहा है. और तो और कैदखानों में उन्हें राष्ट्रपति शी जिनपिंग से वफादारी की कसमें खिलाई जाती है. मगर इन सब के बावजूद किसी इस्लामिक देश ने चीन के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाई. दुनिया में मुसलमानों का मसीहा बनने वाले आतंकी भी इस अत्याचार पर होठ सिले बैठे हैं.

एक तरफ चीन अपने मुसलमानों नागरिकों को प्रताड़ित कर रहा है. उनकी मज़हबी आज़ादी छीन रहा है. वहीं दूसरी तरफ वो मुस्लिम समर्थन का झंडा बुलंद करके पाकिस्तानी आतंकियों को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों से बचा रहा है. मगर अब मुसलमानों के लिए चीन की इस दोहरी नीति पर पहली बार आवाज़ उठी है. पहली बार किसी ने इस मसले के उपर चीन पर वार किया है. और ये वार किसी और ने नहीं अमेरिका ने किया है. अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो दोहरी नीति अपनाने के लिए चीन को कटघरे में खड़ा कर दिया है.

चीन अपने घर में लाखों मुसलमानों को प्रताड़ित करता है, लेकिन हिंसक इस्लामिक आतंकी समूहों को संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध से बचाता है. चीन ने शिनजियांग प्रांत में 2017 से अब तक 10 लाख से ज्यादा उइगरों, कजाखों और दूसरे मुस्लिम अल्पसंख्यकों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया है. उन्हें तत्काल रिहा किया जाना चाहिए. हाल ही में चीन ने खुद दावा किया था कि शिनजियांग प्रांत में 2014 से अब तक करीब 13 हजार आतंकी गिरफ्तार किए गए हैं. पॉम्पियो का इशारा साफ है. चीन की दोहरी नीति अब नहीं चलेगी. क्योंकि वो एक तरफ तो अपने अल्पसंख्यक मुसलमानों पर सितम करता है. वहीं दूसरी तरफ इस्लामिक आतंकियों को बचाता है.

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