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हनी ट्रैप केस: MP हाईकोर्ट ने SIT को लगाई फटकार, पूछा- क्यों नहीं सौंपी स्टेट्स रिपोर्ट?

मध्य प्रदेश के चर्चित हनी ट्रैप मामले में हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने मामले की जांच कर रही एसआईटी को कड़ी फटकार लगाई है और पूछा कि अब तक स्टेट्स रिपोर्ट क्यों नहीं पेश की गई.

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aajtak.in
हेमेंद्र शर्मा भोपाल, 03 March 2020
हनी ट्रैप केस: MP हाईकोर्ट ने SIT को लगाई फटकार, पूछा- क्यों नहीं सौंपी स्टेट्स रिपोर्ट? सांकेतिक तस्वीर

  • CBI के एसपी को 16 मार्च को पेश होने का आदेश
  • कोर्ट- जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जा सकती है?

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने सीबीआई के एसपी को 16 मार्च को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा है. एसपी से ये बताने के लिए कहा गया है कि क्या हनी ट्रैप केस की जांच सीबीआई को सौंपी जा सकती है. ये केस मध्य प्रदेश के कुछ नौकरशाहों और नेताओं को कथित तौर पर ब्लैक मेल किए जाने से जुड़ा है.

जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस शैलेंद्र शुक्ला की बेंच ने मंगलवार को पांच अलग याचिकाओं की सुनवाई करते हुए स्पेशल जांच टीम (SIT) को फटकार लगाई. ये फटकार केस में अब तक की गई जांच की प्रगति रिपोर्ट नहीं सौंपने के लिए लगाई गई.

आयकर विभाग ने इस दौरान कोर्ट को बताया कि हनी ट्रैप केस में अभियुक्त महिलाओं और फंसे अधिकारियों के बीच डील्स से जुड़े दस्तावेज अधूरे हैं. कोर्ट ने इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए SIT को अगले तीन दिन में सभी संबंधित दस्तावेज सौंपने के लिए कहा है.

साथ ही आगाह भी किया कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो SIT प्रमुख को 16 मार्च को खुद पेश होना होगा. कोर्ट ने अगली सुनवाई पर आयकर आयुक्त को भी मौजूद रहने के लिए कहा, जिससे वो खुद बता सकें कि किन-किन दस्तावेज की अभी जरूरत है.

पिछले साल सामने आया था मामला

बता दें कि मध्य प्रदेश एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड और इंदौर पुलिस ने साझा ऑपरेशन में 17 सितंबर 2019 को भोपाल और इंदौर में 5 महिलाओं और एक पुरुष को गिरफ्तार किया था.

आरोप था कि इन्होंने इंदौर के सिटी इंजीनियर हरभजन सिंह से छुप कर बनाए गए वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर 3 करोड़ रुपए वसूलने की धमकी दी थी.

जांच के दौरान कई चौंकाने वाली जानकारी और टॉप नौकरशाहों और राजनेताओं पर उंगली उठनी शुरू हुई तो राज्य सरकार ने स्टिंग में फंसे लोगों को कथित तौर पर बचाने के लिए SIT प्रमुख को बदल दिया. इस पर हाईकोर्ट को निर्देश देना पड़ा कि बिना अदालत की पूर्व अनुमति लिए जांच टीम से किसी भी शख्स का तबादला नहीं हो सकता.

रकम वसूलने की साजिश

आयकर विभाग ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने के बाद SIT से संपर्क कर पैसे के लेनदेन से जुड़े दस्तावेज सौंपने की मांग की थी. चार्जशीट में आरोप लगाया गया था कि हनी ट्रैप गैंग ने दो पत्रकारों और एक अखबार मालिक की मदद से स्टिंग में फंसे लोगों से मोटी रकम वसूलने की साजिश रची थी.

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आयकर विभाग ने 4 गिरफ्तार महिला आरोपियों में से 3 से पूछताछ की थी और पैसे के लेनदेन से जुड़ी जानकारी मांगी थी. आयकर विभाग ने हाईकोर्ट से अनुमति मिलने के बाद ये पूछताछ की थी.

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