एडवांस्ड सर्च

मानसिक रोगः रेप-मर्डर की खौफनाक लत, जिसने लोगों को बना डाला सीरियल किलर

मानिसक रोग का शिकार बने लोग कभी-कभी अवसाद की आखिरी हद तक चले जाते हैं. ऐसी हालत में या तो वो अपनी जान दे देते हैं, या फिर दूसरों की जान ले लेते हैं. कई बार उन्हें दूसरों की जान लेने में मजा आने लगता है. और वो जाने-अनजाने में सीरियल किलर बन जाते हैं.

Advertisement
aajtak.in
परवेज़ सागर नई दिल्ली, 05 October 2019
मानसिक रोगः रेप-मर्डर की खौफनाक लत, जिसने लोगों को बना डाला सीरियल किलर दुनिया में कई ऐसे सीरियल किलर हुए हैं जो मानसिक रोगी थे (सांकेतिक चित्र)

  • 6 अक्टूबर से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह की शुरूआत
  • अवसाद लोगों को बना सकता है वहशी कातिल
  • दुनिया में कई सीरियल किलर मानसिक रोगी थे

आगामी 6 अक्टूबर से मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह की शुरूआत हो रही है. वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ ने 1992 में लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए सचेत करने के लिए विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की शुरूआत की थी. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पूरी दुनिया में 450 मिलियन लोग मानसिक बीमारियों का शिकार हैं.

अवसाद का शिकार लोग बने कातिल

मानिसक रोग का शिकार बने लोग कभी-कभी अवसाद की आखिरी हद तक चले जाते हैं. ऐसी हालत में या तो वो अपनी जान दे देते हैं, या फिर दूसरों की जान ले लेते हैं. कई बार उन्हें दूसरों की जान लेने में मजा आने लगता है. और वो जाने-अनजाने में सीरियल किलर बन जाते हैं.

सीरियल किलिंग की परिभाषा

सीरियल किलर शब्द का इस्तेमाल 1966 में ब्रिटिश लेखक जॉन ब्रोडी ने सबसे पहले किया था. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जस्टिस ने अलग-अलग घटनाओं में दो या दो से अधिक कत्ल की सीरीज को सीरियल किलिंग के रूप में परिभाषित किया है. इस तरह एक मानसिक विकृति से पीड़ित शख्स अपनी संतुष्टि के लिए यदि मर्डर को अंजाम देता है, तो वह सीरियल किलर कहलाता है. सीरियल किलिंग का मुख्य मकसद मनोवैज्ञानिक संतुष्टि होती है. क्रोध, रोमांच, वित्तीय लाभ और ध्यान आकर्षित करने के लिए अधिकतर सीरियल मर्डर किए जाते हैं. मशहूर शोधकर्ता स्टीव इग्गेर ने इनकी छह विशेषताएं बताई हैं-

1- कम से कम दो हत्या

2- हत्यारे-शिकार में कोई संबंध नहीं

3- हत्याओं के बीच सीधा संबंध

4- अलग-अलग स्थानों पर हत्याएं

5- पीड़ितों की एक समान बातें

6- लाभ की बजाए संतुष्टि के लिए हत्या.

निठारी से भी बड़ा था रविन्द्र का कांड

कुछ साल पहले दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में एक ऐसा सीरियल किलर आया, जिसने करीब 35 वारदातों को अंजाम दिया था. 2007 में नोएडा के निठारी कांड में सुरेन्द्र कोली का खूंखार चेहरा लोगों के सामने आया था. इसे इत्तेफाक ही कहिए कि जब कोली अपने गुनाहों के लिए जेल में बंद था, तब एक दूसरा शैतान मासूमों को अपना शिकार बना रहा था. ये शैतान रविन्द्र ही था, जिसने साल 2008 में रेप और कत्ल की पहली वारदात को अंजाम दिया था. इसके बाद वो लगातार 6 साल तक ऐसी ही वारदातों को अंजाम देता रहा और सात साल बाद उसके वहशी चेहरे से पर्दा उठ गया.

वो सुरेंद्र था निठारी का शैतान था तो रविंद्र दिल्ली का वहशी. सुरेंद्र कोली की हैवानियत की दास्तान सुनने और सुनाने के लिए भी कलेजा चाहिए था. रविंद्र की कहानी सुनने के लिए दिल पर पत्थर रखना पड़ेगा. जी हां, इस वहशी दरिंदे ने 2008 में पहला क़त्ल किया था. हर दो से तीन महीने में एक बच्चा उठाता था यानी साल में कम से चार बच्चे को उठाता. इस तरह 7 साल में इसने 28 बच्चों को बेरहमी के साथ मार डाला था.

दिमागी हालत ठीक करने के लिए बच्चियों से रेप

सीरियल किलिंग की इस खौफनाक घटना का खुलासा जुलाई, 2015 में हुआ था. मथुरा का रहने वाले एक शख्स ने पत्नी की दिमागी हालत ठीक करने के लिए न सिर्फ 4 नाबालिग लड़कियों का रेप किया बल्कि उनकी हत्या भी की. पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसके निशाने पर कुल सात बच्चियां थीं. ये सब उसने एक तांत्रिक के कहने पर किया था.

इसका खुलासा तब हुआ जब 12 साल की बच्ची की रेप और हत्या के आरोप में भीड़ ने लालुआ वाल्मिकी नाम के शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी. साथ ही उसके दोस्त सोनू को भी अधमरा कर दिया. आगरा के एसएन हॉस्पिटल में इलाजरत सोनू ने पुलिस की पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए. उसने बताया कि दोस्त लालुआ के साथ मिलकर उसने चार नाबालिग लड़कियों की हत्या की साजिश रची.

सपने में बाबा ने कहा- बड़ा बनना है, तो मर्डर करो

दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे नाबालिग लड़के को पकड़ा, जिसने महज तीन दिन में दो हत्याएं की थीं. पुलिस को शक था कि दो कत्ल में कहीं न कहीं इसी का हाथ है. उसे पकड़कर उसका मुंह खुलवाया तो जो हकीकत सामने आई. उसने सभी को चौंका दिया. उस बच्चे के मन में अमीर बनने की सनक पैदा करके उसको गुनाह का रास्ता दिखाने वाला एक बाबा निकला, जो उसके सपनों में आता था. दरअसल, वो एक तरह के मानसिक रोग का शिकार था.

यह सनसनीखेज घटना पश्चिमी दिल्ली के निहाल विहार की थी. घटना अक्टूबर, 2015 की है. तीन दिन के भीतर दो लोगों के मर्डर में पुलिस ने एक नाबालिग समेत दो लोगों को पकड़ा. उनसे जब पूछताछ की गई तो ऐसा सच सामने आया, जिससे दिल्ली पुलिस भी दंग रह गई. आरोपी ने पूछताछ में बताया कि बड़ा आदमी बनने की चाह में उसने इन कत्लों को अंजाम दिया. उसके सपने में एक बाबा ने आकर उसे कहा कि यदि उसे बड़ा आदमी बनना है, तो वह कत्ल करे.

लूट-पाट के दौरान कर दी 8 लोगों की हत्या

पंजाब के लुधियाना में 2016 में पहले एक मोस्ट वांटेड सीरियल किलर को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. पूछताछ के दौरान उसने आठ लोगों की हत्या की बात कबूली थी. पुलिस ने उसे शिमलापुरी से गिरफ्तार किया था. बलविंदर सिंह नाम के इस सीरियल किलर ने लुधियाना में तीन, अमृतसर में एक, आगरा में दो और मथुरा में दो मर्डर किया था. सभी हत्याएं लूटपाट की नियत से की गई थीं. इसकी गिरफ्तारी के बाद इलाके लोगों ने राहत की सांस ली थी.

'बिकनी किलर' चार्ल्स शोभराज

इसी साल बिकनी किलर के नाम से कुख्यात सीरियल किलर चार्ल्स शोभराज की जिंदगी पर फिल्म 'मैं और चार्ल्स' बनी है. इस फिल्म में अभिनेता रणदीप हुड्डा चार्ल्स की भूमिका निभाई है. रणदीप ने पिछले महीने नेपाल जाकर चार्ल्स शोभराज से मुलाकात की थी. वह काठमांडू जेल में बंद है. 72 साल के चार्ल्स को जब पता चला कि उसकी जिंदगी पर फिल्म बन रही है तो वह काफी खुश हुआ.

अमेरिका के कुख्यात सीरियल किलर था थियोडोर

दुनिया के इतिहास में सीरियल किलिंग की कई खौफनाक घटनाएं दर्ज हैं. ऐसी ही घटनाओं से एक नाम जुड़ा है अमेरिका के थियोडोर रॉबर्ट का. वो एक ऐसा कुख्यात सीरियल किलर था, जिसने करीब 3 दर्जन महिलाओं को अपना शिकार बनाया था. थियोडोर रॉबर्ट उर्फ टेड का जन्म 24 नवंबर, 1946 को बर्लिंगटन में हुआ था. किशोर अवस्था से ही उसके दिमाग में सेक्स और यौन संबंधों को लेकर जिज्ञासा तेज थी. शायद वही वजह थी कि आगे जाकर वो एक सीरियल किलर बन बैठा.

थियोडोर रॉबर्ट ने बलात्कार और हत्या के अलावा अपहरण, चोरी और लूट जैसी कई वारदातों को अंजाम दिया. थियोडोर रॉबर्ट उर्फ टेड एक सिरफिरा और सनकी अपराधी था. जो हवस के जुनून में कुछ भी कर जाता था. इसलिए उसके निशाने पर अक्सर महिलाएं होती थीं. उसे उनके साथ दरिंदगी करने में मजा आता था. वो उनके साथ कत्ल और बलात्कार करने की वारदातों का आनंद लेता था. ये उसके लिए किसी नशे की तरह था.

'डॉक्टर डेथ' के नाम से मशहूर था ये सीरियल किलर

मानसिक रोग के अंतिम पायदान पर आकर कई इंसान अपने कर्मों से शैतान बन गए. ऐसा ही एक नाम था हारोल्ड शिपमैन का. ऐसी खौफनाक दास्तान आपने अब से पहले शायद ही पढ़ी या सुनी हो. दरअसल, हारोल्ड शिपमैन को 'द एंजेल ऑफ डेथ' और 'डॉक्टर डेथ' के नाम से जाना जाता था. उसके नाम की दहशत का आलम ये था कि लोग उसके नाम को सुनना भी नहीं चाहते थे.

हारोल्ड शिपमैन का जन्म 14 जनवरी, 1946 में इंग्लैंड के नॉटिघंम में हुआ था. साल 1970 में उसने बतौर डॉक्टर प्रैक्टिस शुरू की. इसी दौरान न जाने उसके सिर पर क्या भूत सवार हुआ कि वो मरीजों को मारने के लिए अफीम की ओवरडोज देने लगा. जिससे उनकी मौत की वजह भी पता नहीं चल पाती थी. बताया जाता है कि हारोल्ड के निशाने पर ज्यादातर महिलाएं हुआ करती थीं. हैरानी की बात ये है कि वह उनके अंतिम संस्कार में भी शामिल होता था. आंकड़ों के मुताबिक 1998 तक उसने करीब 250 लोगों का कत्ल किया था. मरने वालों में अधिकतर महिलाएं शामिल थीं.

महिलाओं के लिए यमदूत था वो वहशी दरिंदा

अमेरिका में उस शख्स का नाम किसी खौफ से कम नहीं. खासकर महिलाओं के लिए तो वो यमदूत हुआ करता था. वो जब भी सड़कों पर निकलता था, तो समझों की किसी की मौत आने वाली है. वो शहर की सड़कों, नाइट क्लब और बार जैसी जगहों पर अपना शिकार तलाश करता था. जब शिकार मिल जाता तो पहले वो अपनी हवस मिटाता और फिर कार की पिछली सीट पर उसका गला घोंटकर उसे मार देता था.

उस शख्स ने एक बाद एक 90 से ज्यादा महिलाओं को मौत के घाट उतारा. करीब 30 साल पहले उस कातिल ने अलग-अलग वक्त और जगहों पर करीब 8 दर्जन लोगों को कत्ल किया. जब तक वो कातिल पकड़ा नहीं गया, तब तक उसका नाम लोगों के लिए मौत था. वो अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर सैमुअल लिटल था. जिसकी उम्र अब 78 साल है. वो जेल में बंद है और अपने गुनाहों की सजा भुगत रहा है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay