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यूपी: 'बस' पॉलिटिक्स में FIR का वार, एक्सप्रेस-वे पर खड़ीं दो बसें भी सीज़

उत्तर प्रदेश में मजदूरों को बसों से घर पहुंचाने को लेकर जारी राजनीति बढ़ती जा रही है. कांग्रेस और यूपी सरकार के बीच जारी तकरार में अबतक कई नेताओं पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है.

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aajtak.in
aajtak.in नोएडा, 20 May 2020
यूपी: 'बस' पॉलिटिक्स में FIR का वार, एक्सप्रेस-वे पर खड़ीं दो बसें भी सीज़ मजदूरों पर लगातार जारी है राजनीति

  • यूपी में बसों पर जारी है राजनीति
  • अबतक कई नेताओं पर एफआईआर दर्ज

उत्तर प्रदेश में लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूरों का सड़कों पर चलना जारी है और इसी के साथ जारी है उन मजदूरों को लेकर हो रही राजनीति भी. कांग्रेस की ओर से यूपी सरकार को एक हजार बसें देने का ऑफर दिया गया, लेकिन यूपी सरकार की कागजी कार्रवाई में मजदूरों तक मदद नहीं पहुंच सकी. अब कांग्रेस का दावा है कि उनके कई कार्यकर्ता यूपी बॉर्डर पर बस लेकर खड़े हैं. दूसरी ओर पुलिस ने लॉकडाउन तोड़ने के आरोप में कई नेताओं पर एफआईआर दर्ज की है.

गौतम बुद्ध नगर के ADCP रणविजय सिंह का कहना है कि मंगलवार को उन्हें सूचना मिली को 50-60 लोग एक्सप्रेस-वे पर बसें लेकर खड़े हैं, जो एक राजनीतिक दल से संबंध रखते हैं. ये लॉकडाउन और धारा 144 का उल्लंघन है, ऐसे में 50 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. साथ ही अन्य चीज़ों को लेकर जांच की जा रही है.

रणविजय सिंह के मुताबिक, कुछ बसों को वहां पार्क किया गया था जिनमें दो बसों को सीज़ भी किया गया है. क्योंकि ये नियम का उल्लंघन था.

प्रियंका गांधी के निजी सचिव के खिलाफ FIR, बसों की सूची में धोखाधड़ी का आरोप

बता दें कि कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि जिन बसों का इंतजाम किया गया है, उन्हें नोएडा या गाजियाबाद नहीं जाने दिया जा रहा है. कुछ बसें अभी भी राजस्थान बॉर्डर पर खड़ी हैं, कुछ आगरा के पास एंट्री का इंतजार कर रही हैं.

इससे पहले मंगलवार को ही यूपी में कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के सचिव संदीप सिंह पर एफआईआर हो चुकी है. कांग्रेस नेताओं की ओर से लगातार यूपी सरकार को निशाने पर लिया जा रहा है.

इस पूरी राजनीति के बीच मजदूर अभी भी बेबस नज़र आ रहे हैं और लगातार घर जाने के इंतजार में बैठे हैं. दूसरी ओर यूपी सरकार की ओर से एक आंकड़ा जारी किया गया है जिसके मुताबिक, प्रदेश में अबतक 1000 से अधिक श्रमिक ट्रेनें लौट चुकी हैं जिनमें सोलह लाख से अधिक मजदूर वापस आए हैं.

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