एडवांस्ड सर्च

17 साल पहले एक गुमनाम चिट्ठी ने खोली थी राम रहीम की पोल

Anonymous letter disclosure 17 साल पहले हरिय़ाणा के कुरक्षेत्र इलाके में एक गुमनाम चिट्ठी ने बाबा राम रहीम की पोल खोल दी थी.

Advertisement
aajtak.in [Edited by: परवेज़ सागर]नई दिल्ली, 17 January 2019
17 साल पहले एक गुमनाम चिट्ठी ने खोली थी राम रहीम की पोल राम रहीम इंसा के लिए अब जेल से बाहर आना नामुमकिन हो गया है (फाइल फोटो)

17 साल पहले हरियाणा के कुरक्षेत्र इलाके में एक सुबह अचानक लोगों को एक गुमनाम चिट्ठी मिलती है. उस चिट्ठी में लिखा था कि डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख बाबा राम रहीम ने अपने डेरे में कई साध्वियों के साथ बलात्कार किया है और उन साध्वियों में से एक वो खुद है. चिट्ठी में उस साध्वी ने अपने नाम की जगह नीचे बस इतना लिखा था- एक दुखी अबला. बस इस एक गुमनाम चिट्ठी के सहारे आगे जो कुछ होता है, वो वाकई किसी भी इंसाफ पसंद देश के लिए एक मिसाल है. आइए, आपको बताता हूं कि 17 साल पहले लिखी गई एक चिट्ठी ने किस तरह बाबा राम रहीम को बलत्कारी और खूनी दोनों साबित कर दे दिया.

फ़रवरी 2002, कुरुक्षेत्र

कुरुक्षेत्र ज़िले के कई गांवों में लोगों को एक गुमनाम चिट्ठी मिलती है. ये चिट्ठी तबके प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम लिखी गई थी. चिट्ठी लिखने वाली ने चिट्ठी में अपना नाम पता नहीं लिखा था. नाम की जगह बस इतना लिखा था 'एक दुखी अबला.' चिट्ठी में उस अबला ने बाबा राम रहीम के डेरे के अंदर की कहानी लिखी थी. कहानी ये कि वो डेरा सच्चा सौदा में रहती है और बाबा राम रहीम ने ना सिर्फ उसके साथ बल्कि अनगिनत साध्वियों के साथ बलात्कार किया है.

कुरुक्षेत्र में ही रहने वाले बलवंत सिंह नाम के एक शख्स ने इस चिट्ठी की फोटोकॉपी करा कर आसपास के इलाके में बांटना शुरू कर दिया. बलवंत इलाके में तर्कशील के तौर पर जाना जाता था. उसके पर्चे बंटने के बाद ये चिट्ठी हिसार पहुंच गई और हिसार के एक छोटे से अखबार ने पूरी चिट्ठी छाप दी. अखबार में चिट्ठी छपते ही बलवंत सिंह पर हमला हो गया. इसके बाद वो अंडरग्राउंड हो गया था.

5 मई 2002, पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट

यही वो तारीख थी जब हाई कोर्ट को बंद लिफाफे में ये चिट्ठी मिली. कोर्ट ने चिट्ठी पढ़ने के बाद खुद ही पहल करते हुए सिरसा के तबके डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज एमएस सुलर को आदेश दिया कि वो चिट्ठी की सच्चाई की जांच कर के अपनी रिपोर्ट दें. जांच के बाद जज सुलर ने हाई कोर्ट को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट मे लिखा कि शुरुआती जांच के बाद चिट्ठी में लगाए गए इलजामों को नकारा नहीं जा सकता.

उन्होंने रिपोर्ट में ये भी कहा कि डेरा में कोई भी इस बारे में बात करने को तैयार नहीं है. यहां तक कि डेरा के अंदर उस होस्टल में भी जहां साध्वी रहती हैं, बिना राम रहीम की इजाजत के नहीं जाया जा सकता. जज एमएस सुलर ने हाई कोर्ट से इस मामले की जांच सेंट्रल जांच एजेंसी यानी सीबीआई से कराने की सिफिरिश कर दी.

24 सितंबर 2002, पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट

सिरसा के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज की सिफारिश के बाद 24 सितंबर को हाई कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी.

12 दिसंबर 2002, चंडीगढ़

हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने 12 दिसंबर, 2002 को चंडीगढ़ में इस मामले में केस दर्ज कर लिया और जांच शुरू कर दी. पर जांच आसान नहीं था. डेरा ने स्टे ऑर्डर लेकर करीब डेढ़ साल तक सीबीआई की जांच रुकवा दी. यहां तक कि सीबीआई की टीम को डेरा में घुसने तक नहीं दिया गया. मगर सीबीआई की कोशिश जारी रही. और इसी कोशिश के तहत डेरा में रहने वाली करीब 200 लड़कियों से सीबीआई ने संपर्क साधा.

बाद में 18 लड़कियों ने सीबीआई को बयान भी दिए. मगर कोर्ट सिर्फ दो लड़कियां ही आईं. दो लड़कियों के बयान के आधार पर आखिरकार सीबीआई ने जुलाई, 2007 में बाबा राम रहीम के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 यानी बलात्कार और 506 यानी आपराधिक साजिश के तहत चार्जशीट दाखिल कर दिया.

6 सितंबर, 2008 को स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने बाबा राम रहीम के खिलाफ दायर आरोप पत्र को मंजूर करते हुए मुकदमे की सुनवाई शुरू कर दी. 9 साल चली लंबी सुनवाई के बाद आखिरकार 25 अगस्त को सीबीआई की सपेशल कोर्ट ने बाबा राम रहीम को बलात्कार का दोषी करार दे दिया था. जिसके बाद उसे 20 साल कैद की सजा सुनाई गई. और अब वो रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहा है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay