एडवांस्ड सर्च

डेथ मिस्ट्री: हत्या और आत्महत्या के बीच उलझी रही सिल्क स्मिता की मौत

दक्षिण भारतीय सिनेमा में 1970 के दशक के आखिर से 1990 के शुरू तक सिल्क स्मिता का जादू दर्शकों के सिर चढ़ कर बोलता था. अभिनेत्रियों जैसी रत्ती भर भी कोई बात न होने के बावजूद वह बॉक्स ऑफिस पर भारी भीड़ खींचने का एक बड़ा औजार बनीं.

Advertisement
aajtak.in
मुकेश कुमार नई दिल्ली, 06 April 2016
डेथ मिस्ट्री: हत्या और आत्महत्या के बीच उलझी रही सिल्क स्मिता की मौत दक्षिण भारत सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री सिल्क स्मिता

मौत एक सच है. लेकिन असमय मौत कई सवाल खड़े करती है. यही मौत जब रहस्य बन जाए, तो मुसीबत बन जाती है. भारत में भी कई लोगों की मौत आज भी रहस्य है. सियासी हस्तियों से लेकर फिल्मी सितारों तक, कई ऐसे नाम हैं, जिनकी मौत के रहस्य से आज तक पर्दा नहीं उठ सका है. aajtak.in कुछ ऐसी घटनाओं पर एक सीरीज पेश कर रहा है. इस कड़ी में अब तक आपने फिल्म अभिनेत्री दिव्या भारती से लेकर जिया खान तक के बारे में जाना. आज पेश है मशहूर अभिनेत्री विजयलक्ष्मी यानी सिल्क स्मिता की कहानी.

दक्षिण भारतीय सिनेमा में 1970 के दशक के आखिर से 1990 के शुरू तक सिल्क स्मिता का जादू दर्शकों के सिर चढ़ कर बोलता था. वह बॉक्स ऑफिस पर भारी भीड़ खींचने का एक बड़ा औजार बन गई थीं. तमिल और तेलुगु की कई ऐसी फिल्में, जिनमें नामी हीरो होने के बावजूद कोई उन्हें खरीदने को तैयार न था, उनमें यदि सिल्क का एक अदद कैबरे डांस डाल दिया जाता, तो वह हाथों-हाथ बिक जाता था. लेकिन महज 36 साल में सिल्क स्मिता की मौत ने दक्षिण से लेकर उत्तर भारत तक लोगों को स्तब्ध कर दिया था.

23 सितंबर, 1996 को विजयलक्ष्मी उर्फ सिल्क स्मिता अपने घर में पंखे से लटकी हुई मिलीं. उनकी मौत की जांच कर रही पुलिस को इस बात के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिल सके कि यह हत्या थी या आत्महत्या. फॉरेंसिक जांच में जहर की कोई बात सामने नहीं आई. तेलुगु में एक सुसाइड नोट मिला था, लेकिन उसे भी समझा नहीं जा सका. आखिरकार उसकी मौत एक मिस्ट्री बनकर रह गई. मौत से ठीक पहले वह एक सीरियल कर रही थी, जिसमें बाथटब में डूब एक युवती को दिखाया गया था. यहां पूछा गया था कि यह कत्ल है या खुदकुशी.

जन्म से ही सखी सरीखी थी गरीबी
2 दिसंबर, 1960 को आंध्र प्रदेश के एलुरू के पास एक गांव में उनका जन्म हुआ था. जन्म से ही गरीबी एक सखी सरीखी उनके साथ हो ली. उम्र जैसे-जैसे बढ़ी, उनका शरीर भी भरने लगा, तो वे अपने पास-पड़ोस सहित दूरदराज के पुरुषों के अवांछित आकर्षण का केंद्र बनने लगीं. उनकी मां ने एक बैलगाड़ीवाले से उनकी शादी तय कर दी, जिसे स्मिता में कमाई का एक जरिया नजर आया. सिल्क अपने शहर में आने वाली फिल्मों के पोस्टर देखकर खासी रोमांचित हुआ करती थीं. एक सुबह उसने मद्रास के लिए ट्रेन पकड़ी और कॉलीवुड निर्माताओं के दर दस्तक देने लगीं.

नौकरानी से बनीं मेक-अप असिस्टेंट
सिल्क ने एक छोटी अदाकारा के घर में नौकरानी के रूप में काम शुरू किया. उसके बाद जल्द ही वह उसकी मेक-अप असिस्टेंट बन गईं. एक दिन एक निर्माता अपनी चमचमाती कार में उस अदाकारा के घर आया. सिल्क उसे देख एकदम हतप्रभ रह गई. उनकी मालकिन ने कटाक्ष किया कि क्या वह भी उस तरह की कार में बैठकर सैर करने का सपना देखने लगी है? सिल्क ने उसी पल जवाब दिया कि एक दिन जरूर वह ऐसी ही कार में उनके घर आकर उनको आदाब करेंगी. उस समय उस ढलती अदाकारा के लिए वह वाकई हैरत में डालने वाला लम्हा था.

मादक अंदाज में मटकना मन मोहा
युवा विजयलक्ष्मी के भीतर इतनी जबरदस्त महत्वाकांक्षा और चाहत थी कि उसने अपने सपनों को साकार करने के लिए नेमत में मिली कुदरती खूबियों-गदराई देह, कशिश भरा चेहरा, और इन सबसे ऊपर कातिलाना नजर का इस्तेमाल करने में संकोच नहीं किया. एक मलयालम फिल्म इनाय तेडी (1979) में काम करने के बाद उन्होंने अपनी दूसरी ही फिल्म वंडी चक्रम (1979), जो तमिल में उनकी पहली फिल्म थी, में दर्शकों को हिलाकर रख दिया. इस फिल्म में उन्होंने शराब की दुकान चलाने वाली एक लड़की का किरदार निभाया था. इसमें वह निहायत मादक अंदाज में मटककर चलती हैं.

विजयलक्ष्मी ऐसे बन गई सिल्क स्मिता
इस चाल का बाकायदा नाम पड़ गयाः सिलुक्कारतु. वंडी चक्रम के लेखक वीनू चक्रवर्ती ने इस किरदार को सिलुक्कू नाम दिया था. यह बाद में फिल्म की कामयाबी के बाद सिल्क बन गया. इसके बाद में इस अदाकारा के पूरे करियर के दौरान यह नाम जुड़ा रहा. परदे पर उनका नाम स्मिता ही दिया जाता था. क्लब डांस या कैबरे डांस के नाम से जाने जाने वाले उनके डांस-गीत जैसे-जैसे दक्षिण भारतीय फिल्मों की खुराक बनते गए, उन्होंने एक-एक गाने के लिए 50 हजार रुपये तक लेने शुरू कर दिए. इसके बाद भी फिल्म निर्माता उस रकम को हाथ में लिए उनके पास खड़े रहते थे.

डॉक्टर से स्मिता ने रचाई थी दूसरी शादी
स्मिता के लिए परदे पर शर्मो-हया का कहीं कोई नामोनिशान तक न था. एक मलयालम फिल्म में तो वे पांव के अंगूठे की मदद से अपना पेटीकोट उतार देती हैं. यह दृश्य दर्शकों की आंखों में समा जाता है. मद्रास में, स्मिता ने दूसरी शादी की. इस बार एक डॉक्टर से उनकी गांठ बंधी, जिसने उन्हें प्रोडक्शन में हाथ आजमाने को राजी किया. पर उनका पैसा डूब गया और वह अवसाद में डूब गईं. उनकी कामयाब तमिल फिल्मों में से एक ऐंद्रु पेता मझाई (1989) अशोक कुमार ने निर्देशित की थी. फिल्म बनने के दौरान ही स्मिता ने अशोक कुमार से कहा कि वे मर जाना चाहती हैं.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें. डाउनलोड करें
Advertisement
Advertisement

संबंधित खबरें

Advertisement

रिलेटेड स्टोरी

No internet connection

Okay