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दोहरी हत्याः पुलिस और जेल प्रशासन की चूक

मंगलवार की शाम तिहाड़ जेल में जो कुछ हुआ उस वारदात की कहानी पहले ही लिखी जा चुकी थी. नीतू बावोदिया और नीरज बवाना गैंग के बीच यह दुश्मनी लगभग दस साल पुरानी है. बाहरी दिल्ली में नीतू दाबोदिया की तूती बोलती थी. नीतू की ताकत बढ़ती जा रही थी. उसने हरियाणा और पंजाब में भी अपने पांव पसार लिए थे. जबरन वसूली और ठेके पर हत्या करना नीतू गैंग का शगल बन गया था. बात बढ़ी तो उस पर सात लाख का इनाम घोषित किया गया.

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हिमांशु मिश्रा [Edited by- परवेज़ सागर]नई दिल्ली, 21 September 2015
दोहरी हत्याः पुलिस और जेल प्रशासन की चूक पुलिस वैन में ही नीरज और उसके साथियों ने पारस और प्रदीप को मौत के घाट उतार दिया (फाइल फोटो)

मंगलवार की शाम तिहाड़ जेल में जो कुछ हुआ उस वारदात की कहानी पहले ही लिखी जा चुकी थी. नीतू बावोदिया और नीरज बवाना गैंग के बीच यह दुश्मनी लगभग दस साल पुरानी है. बाहरी दिल्ली में नीतू दाबोदिया की तूती बोलती थी. नीतू की ताकत बढ़ती जा रही थी. उसने हरियाणा और पंजाब में भी अपने पांव पसार लिए थे. जबरन वसूली और ठेके पर हत्या करना नीतू गैंग का शगल बन गया था. बात बढ़ी तो उस पर सात लाख का इनाम घोषित किया गया.

इस दौरान बाहरी दिल्ली में नीरज बवाना गैंग तेजी से उभरने लगा. नीरज भी वसूली करने लगा. यह बात नीतू के गले नहीं उतरी. बस इसी बात पर दोनो के बीच दुश्मनी हो गई. जब भी मौका मिलता ये दोनों गैंग एक-दूसरे के लोगों की जान लेने लगे. कुछ दिन पहले ही दोनो तरफ के बदमाशों के बीच सुभाष प्लेस इलाके में सरेआम गोलीबारी हुई थी. एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में कई बादमाश मारे भी गए. स्पेशल सेल ने करीब दो साल पहले 24 अक्टूबर 2013 की रात वसंत कुंज में ग्रांड होटल के पास नीतू को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया था.
 
नीतू पर दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में हत्या, वसूली, लूटपाट, हत्या का प्रयास और कार चोरी जैसे करीब 50 मामले दर्ज थे. दिल्ली पुलिस के हवलदार रामकिशन की हत्या के बाद स्पेशल सेल ने उसे मोस्ट वांटेड अपराधी की सूची में शामिल कर दिया था. लेकिन नीतू के मारे जाने के बाद भी गिरोह का दबदबा कम नहीं हो रहा था. पानीपत के बदमाश पारस ने गिरोह की कमान संभाल ली. और अब वो जेल के अंदर से ही गिरोह का संचालन कर रहा था. ये बात नीरज को लगातार खटक रही थी.

पुलिस और जेल प्रशासन इस गैंगवार से अच्छी तरह वाकिफ था. फिर भी मंगलवार को जेल प्रशासन और पुलिस ने नीरज को एक ऐसा मौका दे दिया, जिसकी उसे कई साल से तलाश थी. कैदियों को ले जाने वाली वैन में कुल 9 लोग सवार थे. जिसमें सात नीरज गैंग के जबकि दो नीतू गैंग के थे. जिसमें नीतू गैंग का सरगना पारस भी शामिल था. नीरज ने जेल से कोर्ट जाते वक्त ही पारस और उसके साथी प्रदीप को खत्म करने की साजिश रच डाली थी.

नीरज ने उस वक्त अपनी साजिश को अंजाम दे डाला जब वे कोर्ट से वापस जेल लौट रहे थे. लौटते समय पारस ऊर्फ गोल्डी और प्रदीप की बेरहमी से हत्या कर दी गई. यहां तक कि हमलावरों ने दोनों की आंखे तक अंदर घुसा दी. अब ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब पुलिस और जेल प्रशासन को नीरज और नीतू गैंग के बीच चली आ रही दुश्मनी का पता था. तो उन्होंने उन्हें एक साथ वैन में क्यों कोर्ट भेजा. पुलिस और जेल प्रशासन को शक की निगाह से देखा जा रहा है. इसके पीछे एक बड़ी साजिश की बू आ रही है.

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