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नामुमकिन है रंजीत डॉन को पकड़ना!

गरीबी और मुफलिसी की जिंदगी जीने को मजबूर बोधनगर गांव के शिवदानी मंडल का बेटा रंजीत मंडल जरायम की दुनिया में आने के बाद देखते ही देखते करोड़पति बन गया. कुछ वक्त बाद ही वो रंजीत डॉन कहलाने लगा. अब उसके पास गाड़ी है, बंगला है, और वो सब कुछ है जो एक शानदार जिंदगी के जीने के लिए ज़रूरी होता है. अब वो करोड़ों का मालिक है.
नामुमकिन है रंजीत डॉन को पकड़ना! पुलिस रंजीत की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है
सुजीत झा [Edited by: परवेज़ सागर]लखीसराय, 28 October 2016

डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है... अमिताभ बच्चन की फिल्म डॉन का ये मशहूर डॉयलाग बिहार के कुख्यात अपराधी रंजीत मंडल उर्फ रंजीत डॉन के लिए बिल्कुल सटीक बैठता है. बिहार के लखीसराय जिले के एक छोटे से गांव बोधनगर में पैदा हुआ रंजीत मंडल देखते-देखते बन गया अपराध की दुनिया का बेताज बादशाह.

गरीबी और मुफलिसी की जिंदगी जीने को मजबूर बोधनगर गांव के शिवदानी मंडल का बेटा रंजीत मंडल जरायम की दुनिया में आने के बाद देखते ही देखते करोड़पति बन गया. कुछ वक्त बाद ही वो रंजीत डॉन कहलाने लगा. अब उसके पास गाड़ी है, बंगला है, और वो सब कुछ है जो एक शानदार जिंदगी के जीने के लिए ज़रूरी होता है. अब वो करोड़ों का मालिक है.

रंजीत बड़े-बड़े व्यवसायियों को उनके साथ व्यापार करने का लालच देता है. फिर उन्हें मिलने के लिए बुलाता है. और फिर फिरौती के लिए उनका अपहरण कर लेता है. यही उसका मुख्य धंधा है. रंजीत डॉन अंतर्राज्यीय अपहरण गिरोह का सरगना बन चुका है. उसका कारोबार न सिर्फ बिहार बल्कि पड़ोसी राज्य झारखंड, पश्चिम बंगाल और यूपी में भी फल-फूल रहा है.

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हाल में उसका नाम दिल्ली के बड़े मार्बल कारोबारी के दो बेटों का अपहरण करने के बाद एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया. करीब चार साल पहले रंजीत मंडल उर्फ रंजीत डॉन का नाम उस वक्त सुर्खियों में आया था, जब उसने 2012 में हरियाणा के सोनीपत लोकसभा क्षेत्र से सांसद जगवीर सिंह मल्लिक के रिश्तेदार अजय सिरोहा को अगवा कर लिया था.

मामला हाई प्रोफाइल था इसलिए राज्य सरकार ने इस घटना को चुनौती के रुप में लिया था. काफी मशक्कत के बाद अपहृत व्यक्ति को पीरीबाजार के बरियारपुर के कोड़ासी जंगल से बरामद कर लिया गया था. पुलिस ने इस मामले में रंजीत मंडल गिरोह के ग्यारह लोगों को गिरफ्तार किया था, लेकिन रंजीत मंडल उस वक्त भी भागने में सफल हो गया था.

अपहरण की इस घटना में रंजीत डॉन ने बतौर फिरौती पांच करोड़ रुपये की मांग की थी. रंजीत डॉन का ससुराल मुंगेर जिले के बरियारपुर प्रखंड के पीरीबाजार में है. यही इलाका उसके लिए अपहर्ताओं को छुपाने की जगह है. ये पूरा इलाका नक्सल प्रभावित है. रंजीत डॉन अपने अपहरण उद्योग के धंधे में नक्सलियों को भी शामिल रखता है और उनकी मदद भी लेता है.

ठीक चार साल बाद रंजीत डॉन का नाम एक बार फिर चर्चाओ में है. दिल्ली के मार्बल व्यवसायी बाबूलाल शर्मा के दो पुत्र कपिल शर्मा और सुरेश शर्मा को भी बिहार में मार्बल का बड़ा ठेका दिलाने का लालच देकर बुलाया गया. और फिर उनका अपहरण कर लिया गया.

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रंजीत डॉन ने सितंबर महीने में गोपाल गोयल बनकर इन दोनों भाइयों से मुलाकात की थी. घटना के 15 दिन पहले भी रंजीत ने दोनों भाईयों से मुलाकात की थी. तभी उसने उन्हें बिहार बुलाने का कार्यक्रम तय कर दिया था. फिर 21 अक्टूबर को जैसे ही कपिल और सुरेश पटना एयरपोर्ट पहुंचे को उन्हें वहां से अगवा कर लिया गया.

इस मामले की शिकायत बाबूलाल शर्मा ने पुलिस में दर्ज कराई थी. लिहाजा पुलिस दोनों भाईयों को तलाश रही थी. और आखिरकार अपहरण के तीन दिन बाद यानी 26 अक्टूबर को पटना पुलिस ने कारोबारी के बेटों को लखीसराय जिले के एक जंगल से बरामद कर लिया था. इस दौरान पुलिस ने रंजीत डॉन के कई गुर्गों को भी गिरफ्तार किया लेकिन एक बार फिर रंजीत डॉन फरार हो गया.

पुलिस ने कपिल और सुरेश शर्मा को सकुशल बरामद तो कर लिया. लेकिन इन तीन दिनों में उन दोनों व्यवसायी बंधुओं ने बहुत सी यातनाएं झेली. बरामदगी के वक्त उनके चेहरे पर खौफ साफ देखा जा रहा था. दोनों की बातों पर यकीन करें तो उनके साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया गया. दोनों भाई अपनी आपबीती बताते हुए रो पड़े थे. उन दोनों को बेहोश करने के बाद घसीटते हुए एक ठिकाने से दूसरे ठिकाने तक ले जाया जा रहा था.

24 घंटे में केवल दो गिलास पानी उन्हें पीने के लिए दिया गया. दोपहर के वक्त खाने के लिए चूड़ा दिया गया. उन्हें शौच के लिए भी जाने नहीं दिया गया. उन दोनों ने मौत को करीब से तब देखा, जब उनकी कनपटी पर पिस्टल सटाकर जान से मारने की धमकी दी गई. दोनों भाईयों ने जिंदा लौटने की उम्मीद छोड़ दी थी. बरामदगी के बाद दोनों भाइयों ने एक ही बात कही कि अब कुछ भी हो जाए, वे बिहार कभी नहीं आएंगे.

अब पुलिस ने अंतर्राज्यीय अपहरण गिरोह के सरगना रंजीत डॉन पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. ईडी उसकी काली कमाई जांच करने की तैयारी में है. रंजीत डॉन का आपराधिक इतिहास और उसकी अवैध कमाई से बनाई गई संपत्ति को जब्त करने का प्रस्ताव पुलिस महानिरीक्षक (आर्थिक अपराध शाखा) पटना को भेजा जा चुका है. रंजीत डॉन ने अपहरण उद्योग के जरिए काफी संपत्ति अर्जित की है.

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार रंजीत की आय का कोई दूसरा स्रोत नहीं है. अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि रंजीत मंडल के खिलाफ प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिग एक्ट 2002 के तहत अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय से अनुरोध किया गया है. इसके लिए आर्थिक अपराध इकाई पटना को अनुशंसा की गई है.

रंजीत डॉन के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले इस प्रकार हैं:

लखीसराय, कजरा थाना. अपराध संख्या - 45/16

पटना, हवाई अड्डा थाना, अपराध संख्या - 170/16

पश्चिम बंगाल, कुल्टी थाना, अपराध संख्या - 330/11

जमुई, सिकंदरा थाना, अपराध संख्या - 244/11

लखीसराय, पीरी बाजार थाना, अपराध संख्या - 19/12

लखीसराय, हलसी थाना, अपराध संख्या - 78/97

लखीसराय, रामगढ़ चौक थाना, अपराध संख्या - 275/10

लखीसराय, हलसी थाना, अपराध संख्या - 109/08

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