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जानलेवा वायरस के सामने सुपरपॉवर भी बेबस, इन देशों से हार गया कोरोना!

दुनिया में कोरोना वायरस की तबाही हर तरफ है. देश चाहे छोटा हो या बड़ा. कमजोर हो या ताकतवर कोरोना के कहर से बच नहीं पाया है. जो सुपरपॉवर कहे जाते हैं उन्हें भी कोरोना से लड़ाई में पसीने आ रहे हैं. अमेरिका से लेकर यूरोप तक और यूरोप से लेकर मिडिल ईस्ट तक. हर जगह कोविड-19 की तबाही है.

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aajtak.in
aajtak.in/ परवेज़ सागर नई दिल्ली, 14 May 2020
जानलेवा वायरस के सामने सुपरपॉवर भी बेबस, इन देशों से हार गया कोरोना! कोरोना की दवा बनाने के लिए वैज्ञानिक और डॉक्टर रात-दिन रिसर्च कर रहे हैं

  • चीन समेत दूसरे देशों से आने वाले यात्रियों पर प्रतिबंध
  • ताइवान को उम्मीद से ज्यादा तेज और अच्छे नतीजे मिले
  • सिंगापुर, हांगकांग, ताइवान और क्यूबा बने मिसाल

कोरोना का कहर दुनिया के कोने-कोने में जा पहुंचा. लेकिन कुछ देश ऐसे हैं, जो कोरोना के इस वायरस से जूझे भी. लड़े भी और जीते भी. अब ये देश दुनिया को रास्ता दिखा सकते हैं. क्योंकि आज जब बड़े-बड़े ताकतवर देश कोरोना के सामने बेबस हैं. लेकिन इन देशों ने कोरोना को हराकर मिसाल पेश की है. ऐसे में ये समझना जरूरी है कि आखिर कोरोना से दुनिया के इन देशों ने कैसे मुकाबला किया? आखिर क्या किया इन देशों ने जो कोरोना इनसे हार गया? या यूं कहे कि इन्होंने कोरोना को हरा दिया.

अमेरिका से लेकर यूरोप तक तबाही

दुनिया में कोरोना वायरस की तबाही हर तरफ है. देश चाहे छोटा हो या बड़ा. कमजोर हो या ताकतवर कोरोना के कहर से बच नहीं पाया है. जो सुपरपॉवर कहे जाते हैं उन्हें भी कोरोना से लड़ाई में पसीने आ रहे हैं. अमेरिका से लेकर यूरोप तक और यूरोप से लेकर मिडिल ईस्ट तक. हर जगह कोविड-19 की तबाही है. हर जगह लॉक डाउन है. मगर इन सबके बावजूद कोरोना से मरने वालों की तादाद कम नहीं हो रही है. दुनिया के तमाम देश मिलकर भी इसका सामना नहीं कर पा रहे हैं. पौने तीन लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. लगभग 42 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं. दुनिया की एक तिहाई आबादी घरों में क़ैद है. एक तरह से दुनिया की रफ़्तार ही थम सी गई है. बस अकेले एक कोरोना का वायरस ही है जो पूरी रफ्तार में भाग रहा है और रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है.

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कोरोना से जंग में मिसाल

इधर, ये जानलेवा महामारी अपने पांचवें महीने में दाखिल हो चुकी है और उधर, दुनिया के अलग-अलग देशों की लैब में दिन-रात इस वायरस से निपटने के लिए वैक्सीन की खोज में वैज्ञानिक माथा-पच्ची कर रहे हैं. मगर जहां बड़े बडे देश इस वायरस के आगे पस्त नजर आ रहे हैं वहीं कुछ छोटे देश ऐसे भी हैं जो दुनिया के लिए कोरोना से जंग में मिसाल बनकर उभरे हैं. इन देशों में सिंगापुर, हांगकांग, ताइवान और क्यूबा शामिल है.

कोरोना से लड़ाई में योद्धा बने ये 4 देश

कोरोना की त्रासदी से गुजर रही दुनिया के सामने जो सवाल खड़ा है. उसका जवाब लेकर दुनिया के नक्शे पर ये चार देश चमक रहे हैं. अब यही देश बताएंगे कि कोरोना का कालचक्र खत्म कैसे होगा. कैसे दुनिया के करोड़ों लोगों को क़ैद से आज़ादी मिलेगी और दुनिया की डूबती अर्थव्यस्था को कैसे मिलेगा तिनके का सहारा. जानकारों का मानना है कि कोरोना की वैक्सीन तैयार होने में 8 से 16 महीने का वक्त लग सकता है. तो ज़ाहिर है इतने वक्त तक दुनिया के चक्के को जाम तो किया नहीं जा सकता. वरना हाहाकार मच जाएगा. ऐसे में दुनिया को इन चार मुल्कों से सबक लेना होगा, जिन्होंने कोरोना के खिलाफ सबसे असरदार लड़ाई लड़ी है. इन देशों में कहीं पूरी तरह कोरोना का असर खत्म हो चुका है तो कहीं मामूली तौर पर ही बचा है.

सबसे पहले तो ये बता दें कि ये छोटे छोटे वो देश हैं. जिनमें कई तो चीन के बेहद नजदीक हैं. और उन पर खतरा सबसे ज्यादा था. लेकिन वक्त रहते उठाए गए इनके सही कदमों ने कोरोना की ताकत को ना सिर्फ कम कर दिया. बल्कि इन्हें डूबने से भी बचा लिया. तो अब सवाल ये कि इन्होंने कोरोना से लड़ाई में ऐसा कौन सा ब्रह्मास्त्र चलाया जो दुनिया के बड़े से बड़े देश नहीं चला पाए.

ऐसे हराया कोरोना वायरस को

तो आइए एक एक कर समझते हैं कि इन देशों ने कोरोना को कैसे हराया. सबसे पहले बात ताइवान की. जिसने कोरोना की खबर मिलते ही वुहान से आने वाले सभी विमानों के यात्रियों को नीचे उतारने से पहले उनकी जांच करनी शुरू कर दी थी. जैसे जैसे वैज्ञानिकों को इस वायरस के बारे में और पता चलता गया. वैसे वैसे ये सामने आया कि जिन संक्रमित लोगों के अंदर लक्षण नहीं पाए गए हैं. वो भी दूसरों में संक्रमण फैला सकता है. इसलिए कोरोना की पुष्टि के लिए टेस्ट किया जाना बेहद अहम बन गया.

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विदेशों से आने वाली यात्रियों की स्क्रीनिंग

चीन से महज 1000 किमी दूर और वुहान के सबसे नजदीक ताइवान ने वक्त रहते कोरोना के खतरे को भांप लिया था. ताइवान से लोग लगातार चीन जाते-आते रहते हैं. वहां नौकरी भी करते हैं. वुहान से ताइवान रोज दो से तीन बार हवाई सेवा आती जाती है. रिपोर्ट्स बताती है कि ताइवान के सेंट्रल एपिडेमिक कमांड सेंटर यानी CECC ने ताइवान के स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर कोरोना वायरस के देश में आने से पहले ही उस पर रोक लगाने की कोशिशें शुरू कर दी थीं. चूंकि चीन में कोरोना फैल चुका था इसलिए सबसे पहले ताइवान ने बाहर से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग करना शुरू कर दी. साथ उसी वक्त से ताइवान ने अपने देशवासियों को मास्क और दूसरी वस्तुएं मुहैय्या करा दीं. साथ ही बड़े पैमाने पर फेस मास्क और सैनिटाइजर का निर्माण करना शुरू कर दिया था. इसके साथ ही ताइवान ने किसी दूसरे देश से आने वाले सभी लोगों के लिए दो हफ्ते तक आइसोलेशन में रहना जरूरी कर दिया था.

मास्क से लेकर सैनिटाइजेशन तक

ताइवान की इन कोशिशों से उम्मीद से ज्यादा तेज और अच्छे नतीजे मिले. जब चीन में कोरोना की शुरुआत हुई थी तभी से ताइवान ने अपने सिपाहियों को उन फैक्ट्रियों में लगा दिया. जहां पर कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए चिकित्सा उपकरण जैसे मास्क, टेस्ट किट, सैनिटाइजर और दूसरे सामान बनाए जा रहे थे. इससे हुआ ये कि आम जनता को मास्क वगैहरा आसानी से मुहैय्या हुए और सुरक्षा बल भी सेफ रहे. जबकि बाकी देशों में ऐसे हालात पर सुरक्षा बलों को लॉकडाउन और शटडाउन को सफल बनाने की जिम्मेदारी दी जाती है. इतना ही नहीं ताइवान ने स्मार्टनेस दिखाते हुए डिजिटल थर्मामीटर, मास्क और वेंटिलेटर के निर्यात पर बैन लगा दिया और 75% तक अल्कोहल सैनिटाइजेशन का प्रोडक्शन कराया ताकि देश में इसकी आगे कमी न पड़े.

स्वाइन फ्लू की तबाही से सीखा सबक

इसके अलावा ताइवान के बड़े लीडरों ने खुद मोर्चा संभाला. उपराष्ट्रपति चेन चिएन-जेन जो कि खुद एक महामारी रोकने के विशेषज्ञ हैं. उन्होंने कोरोना के शुरुआती मामले सामने आने के बाद ही चीन और हांगकांग सहित दूसरे देशों से आने वाले यात्रियों पर प्रतिबंध लगा दिया. ऐसा नहीं है कि ताइवान में किसी को कोरोना के संक्रमण ने छुआ ही नहीं. ताइवान में अबतक करीब 300 लोग इस वायरस का शिकार हुए और 5 लोगों की मौत भी हुई. लेकिन मरने वालों में ऐसे उम्रदराज लोग शामिल हैं जो पहले से कई बीमारियों से जूझ रहे थे. मगर चीन के सबसे निजदीकी पड़ोसी होने की वजह से ताइवान के कोरोना की जद में आने की जैसी आशंका थी वैसा नहीं हुआ. इसकी बड़ी वजह ये है कि इस देश ने साल 2003 सार्स और 2009 में स्वाइन फ्लू की तबाही से सीख लिया था कि कैसे इन बीमारियों को फैलने से बचाना है.

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