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ड्रैगन के खिलाफ एकजुट हुए दुनिया के कई देश, WHO को पास करना पड़ा ये प्रस्ताव

दुनिया के कई देश हैं जो दुनिया में फैली इस महामारी के लिए चीन को ही कटघरे में खड़ा कर रहे हैं. मगर इनमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान खुलकर कोरोना के लिए चीन पर हमलावर हैं. ट्रंप खुद कई बार इसे चीनी वायरस कह चुके हैं.

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aajtak.in/ परवेज़ सागर नई दिल्ली, 21 May 2020
ड्रैगन के खिलाफ एकजुट हुए दुनिया के कई देश, WHO को पास करना पड़ा ये प्रस्ताव कोरोना वायरस की शुरुआत चीन के वुहान शहर से ही हुई थी

  • चीन से ही क्यों फैलती है महामारी
  • वर्ल्ड हेल्थ एसेंबली ने मजबूरन पास किया प्रस्ताव

चीन के खिलाफ जांच की मांग को लेकर करीब-करीब दुनिया के सभी देश एकजुट हैं. इनमें वो देश भी शामिल हैं जो अभी तक खामोशी अख्तियार किए हुए थे. मगर अब वो भी ड्रैगन के खिलाफ खड़े हो गए हैं. दुनिया भर के देशों की इसी सोच को देखते हुए डब्लूएचओ यानी वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन की वर्ल्ड हेल्थ एसेंबली की भी मजबूरन एक प्रस्ताव पास करना पड़ा है. इस प्रस्ताव के तहत कोरोना का सच जानने के लिए चीन के खिलाफ एक स्वतंत्र जांच को मंजूरी दी गई है.

दुनिया के कई देश हैं जो दुनिया में फैली इस महामारी के लिए चीन को ही कटघरे में खड़ा कर रहे हैं. मगर इनमें अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान खुलकर कोरोना के लिए चीन पर हमलावर हैं. ट्रंप खुद कई बार इसे चीनी वायरस कह चुके हैं. साथ ही अमेरिका पुरज़ोर तरीके से ये आवाज़ उठा रहा है कि चीन और वुहान लैब की जांच होनी चाहिए. ऑस्ट्रेलिया और जापान भी ये मांग कई बार दोहरा चुके हैं.

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हालांकि अभी तक यूरोपियन यूनियन इस मसले पर खामोश था. वो इसलिए क्योंकि यूरोपियन यूनियन अपनी औद्योगिक मामलों के लिए काफी हद तक चीन पर निर्भर है. मगर अब जब डब्लूएचओ की वर्ल्ड हेल्थ एसेंबली ने वायरस के सोर्स का पता लगाने के लिए स्वतंत्र जांच का एक प्रस्ताव पास किया है तो अब यूरोपियन यूनियन भी उसके समर्थन में आ गया. पर ये स्वतंत्र जांच है क्या और ये होगी कैसे. हम आपको बताते हैं कि इस जांच के कुछ पैमाने हैं.

चीन से ही क्यों फैलती है महामारी?

आखिर चीन से ही क्यों ये बीमारियां निकलती हैं और वैश्विक महामारी बन जाती हैं. ये पहली बार नहीं हुआ है. इससे पहले साल 2003 में चीन से निकलकर सार्स वायरस ने भी दुनिया के कई देशों में तबाही मचाई थी. और उस वक्त भी चीन पर आरोप लगे थे कि उसने सार्स से जुड़ी जानकारियों को दुनिया से छुपाया था.

चीन ने क्यों छुपाई जानकारी?

दिसंबर में कोरोना चीन में फैल चुका था. मगर 20 जनवरी तक उसने इसकी जानकारी दुनिया से छुपाए रखी. इतना ही नहीं कोरोना के महामारी बनने के बाद आज भी चीन इससे जुड़ी जानकारियां छुपा रहा है. ये शक़ इसलिए पैदा हुआ क्योंकि काफी वक्त पहले चीन ने अपनी डोमेस्टिक फ्लाइट की आवाजाही तो बंद कर दी थी. मगर अंतरराष्ट्रीय उड़ाने जारी रखीं. जब चीन को कोरोना के फैलने का खतरा था. तो फिर उसने अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को रद्द क्यों नहीं किया. और एक आंकड़े के मुताबिक जब तक वुहान में लॉकडाउन की घोषणा हुई. तब तक वहां से 50 लाख लोग बाहर निकल चुके थे.

वायरोलॉजी लैब में होने वाली तमाम रिसर्च पर रोक?

कोरोना के मामले में अपनी गर्दन फंसता देख चीनी सरकार ने देश की तमाम रिसर्च लैब्स को ये निर्देश जारी कर दिए हैं कि फिलहाल रिसर्च का काम रोक दिया जाए. और अब जो भी रिसर्च होगी वो चीनी सरकार की जानकारी और निर्देश पर होगी. वहीं चीन ने दुनिया के कई देशों की उस मांग को ठुकरा दिया है. जिसमें वो चीन से लाइव वायरस की मांग कर रहे थे. उम्मीद थी कि इससे उसके ओरिजन यानी उत्पत्ती का पता लगाया जा सके. इसके बाद अमेरिका के इस बयान ने तो आग ही लगा दी कि उनके पास ऐसे तमाम सबूत हैं जिनसे ये साबित होता है कि कोरोना का वायरस वुहान लैब से ही निकला है.

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चीन ने क्यों आयात किए मेडिकल इक्वेपमेंट?

मार्च में डब्लूएचओ ने कोरोना को पैनडेमिक यानी महामारी घोषित किया. मगर चीन जनवरी से ही दुनिया के तमाम देशों से पीपीई किट और मास्क इम्पोर्ट करने लगा था. अकेले जनवरी के आखिरी हफ्ते में चीन ने कई देशों से साढ़े 5 करोड़ से भी ज़्यादा पीपीई किट, रेस्प्रेट्री सिस्मटम और मास्क इम्पोर्ट करवा लिए थे और सबसे ज़्यादा ये निर्यात अमेरिका और यूरोपीय देशों से ही किए गए थे. जहां महामारी फैलने के बाद इन चीज़ों की कमीं पड़ गई और अब उन्हीं पीपीई किट, रेस्प्रेट्री सिस्मटम और मास्क को मदद के तौर पर भेजकर चीन मसीहा बनने की कोशिश कर रहा है.

सरकार के खिलाफ मामलों को दायर करने इनकार क्यों?

वुहान के ज़िंदा बचे लोग इस महामारी से हुए नुकसान के लिए सरकार से ना सिर्फ हर्जाने की मांग कर रहे हैं बल्कि प्रशासन की लापरवाही के लिए उन्हें सज़ा देने की भी मांग कर रहे हैं. मगर चीनी प्रशासन वुहान के ऐसे सभी लोगों पर शिकंजा कस रही है. जो इस तबाही का जवाब मांग रहे हैं. इतना ही नहीं चीनी प्रशासन ने वकीलों तक को ऐसा कोई केस ना लेने की चेतावनी दे रखी है. कोरोना की महामारी के बाद सच्चाई को बाहर लाने वाली तमाम वेबसाइट, अखबार, पत्रकार, डॉक्टर और समाजसेवकों को बंद किया जा रहा है. कईयों को या तो गायब करवा दिया गया या मरवा दिया गया.

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