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देवभूमि में सुरक्षित नहीं महिलाएं, जानें अपराध के चौंकाने वाले आंकड़े

देवभूमि उत्तराखंड में महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अपराध के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं. आंकड़े बताते हैं कि हर साल महिलाओं पर अपराधों की संख्या में इजाफा हो रहा है.

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aajtak.in
दिलीप सिंह राठौड़ देहरादून, 19 October 2019
देवभूमि में सुरक्षित नहीं महिलाएं, जानें अपराध के चौंकाने वाले आंकड़े महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध (फाइल फोटो- Aajtak)

  • उत्तराखंड में महिला अपराध का ग्राफ
  • तीन साल में 6,000 मामले आए सामने

देवभूमि उत्तराखंड में महिलाओं के खिलाफ हिंसा और अपराध के आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं. आंकड़े बताते हैं कि हर साल महिलाओं पर अपराधों की संख्या में इजाफा हो रहा है. बलात्कार से लेकर छेड़खानी और घरेलू हिंसा के मामले उत्तराखंड में लगातार बढ़ रहे हैं.

उत्तराखंड पुलिस के आंकड़े ही इस बात की तस्दीक कर रहे हैं और बताते हैं कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की दर लगातार बढ़ रही है. हालंकि, सरकार और पुलिस महकमा दावे जरूर कर रहा है, लेकिन आंकड़ों के पीछे जो भयानक मंजर है, वो तो जस का तस है.

प्रदेश में साल दर साल अपराध के आंकड़े-  

2016- रेप के 278, जबकि 46 हत्या के मामले

2017- 304 रेप और 47 हत्या के मामले  

2018- 394 रेप और हत्या के 38 मामले

वहीं, साल 2019 में अब तक रेप का आंकड़ा 419 के पार पहुंच गया है, वहीं 46 हत्याएं भी हो चुकी हैं.

इसके अलावा 2019 में अब तक दहेज मृत्यु के 42 और अपहरण के 240 मामले सामने आ चुके हैं. कुल मिलकर अगर साल 2019 में सभी महिला अपराधों को जोड़ें तो यह आंकड़ा 2136 तक पहुंच गया है, जो देवभूमि में बढ़ते अपराध को दर्शाता है.

इनमें से ज्यादातर आपराधिक वारदातें देहरादून, हरिद्वार और उधमसिंह नगर से हैं. राजधानी देहरादून के हालात तो इस कदर हो चले हैं कि यहां अपराधियों और मनचलों को पुलिस का कोई खौफ नहीं दिखता है.

इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा घटनाएं

मुख्यमंत्री आवास, सचिवालय, विधानसभा और कई मुख्यालयों में पुलिस की गस्त होने के बाद भी सुरक्षा के लिहाज से यहां महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं. महिलाओं की मानें तो आये दिन छेड़छाड़ और अश्लील हरकत करने वालों की तादाद दिनोंदिन बढ़ रही है.

वहीं, महिलाओं पर हो रही हिंसा पर आवाज उठाने वाली समाजसेवी भी कहती हैं, 'आज दूरस्थ क्षेत्रों में महिलाओं के साथ लगातार अत्याचार हो रहा है, लेकिन महिलाओं की आवाज न तो कानून सुनता है और न कानून के रखवाले. ऐसे में वो खुद आगे आकर पीड़ित महिलाओं की आवाज उठा रही हैं. कुल मिलाकर तीन साल में महिलाओं से उत्पीड़न के 6000 मामले सामने आए हैं.'

'सोशल मीडिया है अपराध का कारण'

प्रदेश में अपराध और कानून व्यवस्था संभाल रहे डीजी अशोक कुमार खुद स्वीकारते हैं कि प्रदेश में रेप की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है, इसका सबसे बड़ा कारण सोशल मीडिया है जहां पर पहले दोस्ती, प्यार और फिर रेप की घटनाएं सामने आती हैं.

साथ ही अशोक कुमार ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा बताया कि प्रदेश में रेप की 93 प्रतिशत घटनाएं जान पहचान में हो रही हैं, जबकि 7 प्रतिशत घटनाओं को बाहरी आरोपी द्वारा अंजाम दिया जा रहा है, लेकिन पुलिस ने हर घटना के अपराधी को पकड़ा है.

वहीं, प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि उन्होंने पुलिस विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस तरह की आपराधिक प्रवृति और मनचलों पर सख्त कार्रवाई हो.

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