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दिखावे के लिए हथियार का इस्तेमाल करने वालों के शस्त्र लाइसेंस वापस लेगी UP सरकार

उत्तर प्रदेश के बीजेपी की तरफ से सभी जिला मुख्यालयों से इस बात की जानकारी मांगी गई है कि किस बाहुबली और अपराधी के पास और उसके परिवार वालों के पास कितने शस्त्र लाइसेंस हैं. इस रिपोर्ट में यह भी मांगा गया है कि क्या इन शस्त्र लाइसेंसों का दुरुपयोग हुआ है या फिर कभी इन शस्त्रों का इस्तेमाल किसी अपराधिक गतिविधियों में भी किया गया है.

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aajtak.in
शि‍वेंद्र श्रीवास्तव लखनऊ, 25 August 2019
दिखावे के लिए हथियार का इस्तेमाल करने वालों के शस्त्र लाइसेंस वापस लेगी UP सरकार मिसयूज कर रहे 'शस्त्र लाइसेंस' को वापस लेगी यूपी सरकार

उत्तर प्रदेश में शस्त्र लाइसेंसों के दुरुपयोग को रोकने के लिए गृह विभाग ने माफिया और बाहुबलियों के लाइसेंसों का ब्यौरा जुटाना शुरू कर दिया है. इस बारे में उन लोगों के लाइसेंस की समीक्षा की जायेगी जिन पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं या फिर सिर्फ दिखावे के लिए उन्होंने शस्त्र लाइसेंस ले रखे हैं. इसमें मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद सहित कई बाहुबली और यूपी के कई बड़े अपराधी भी शामिल हैं.

उत्तर प्रदेश के बीजेपी की तरफ से सभी जिला मुख्यालयों से इस बात की जानकारी मांगी गई है कि किस बाहुबली और अपराधी के पास और उसके परिवार वालों के पास कितने शस्त्र लाइसेंस हैं. इस रिपोर्ट में यह भी मांगा गया है कि क्या इन शस्त्र लाइसेंसों का दुरुपयोग हुआ है या फिर कभी इन शस्त्रों का इस्तेमाल किसी आपराधिक गतिविधियों में भी किया गया है.

इसके अलावा प्रदेश भर में तमाम बिजनेसमैन, छुटभैया नेताओं, पत्रकारों और दूसरे लोगों को दिए गए सुरक्षा के लिए दी गई व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है. जानकारी के मुताबिक प्रदेश में बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्होंने सुरक्षा के नाम पर सरकारी गनर की व्यवस्था ले रखी है लेकिन या तो उनका सही इस्तेमाल नहीं किया गया है या फिर उनका दुरुपयोग किया जा रहा है.

कई मामलों में यह भी पता चला कि यह लोग सरकारी गनर्स का इस्तेमाल सिर्फ अपना रुतबा दिखाने के लिए करते हैं.  लिहाजा गृह विभाग ने सभी जिलों के कप्तानों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि पहले अपनी तरफ से जिले के तमाम लोगों को दी गई सुरक्षा के बारे में समीक्षा करें उसके बाद अपनी रिकमेंडेशन के साथ शासन को रिपोर्ट भेजें. इसके जरिए गैरजरूरी लोगों को दी गई सुरक्षा को सरकार वापस ले सके. सूत्रों के मुताबिक इस समीक्षा में जो मानदंड रखे गए हैं उसके चलते करीब 40% लोगों की सरकारी सुरक्षा वापस ली जा सकती है.

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