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पुलिस अफसर को आया था दाऊद का फोन- अरे साब! मेरा पीछा तो छोड़ दो

बात जून 2013 की है. दिल्ली के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर को एक कॉल आई. उधर से आवाज आई, 'अरे साब. अब तो आप रिटायर्ड हो रहे हो. अब तो मेरा पीछा छोड़ दो.' वो पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार थे. फोन पर नंबर नहीं था. लेकिन उस शख्स से पहले बात हो चुकी थी. इसिलए पहचान लिए. वो शख्स कोई और नहीं अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम था.

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शम्स ताहिर खान [Edited by: मुकेश कुमार गजेंद्र]नई दिल्ली, 13 November 2017
पुलिस अफसर को आया था दाऊद का फोन- अरे साब! मेरा पीछा तो छोड़ दो पूर्व पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम

बात जून 2013 की है. दिल्ली के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर को एक कॉल आई. उधर से आवाज आई, 'अरे साब. अब तो आप रिटायर्ड हो रहे हो. अब तो मेरा पीछा छोड़ दो.' वो पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार थे. फोन पर नंबर नहीं था. लेकिन उस शख्स से पहले बात हो चुकी थी. इसिलए पहचान लिए. वो शख्स कोई और नहीं अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम था.

दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार के नेतृत्व में ही दिल्ली पुलिस ने क्रिकेट में स्पॉट फिक्सिंग का सनसनीखेज खुलासा किया था. इस केस में दाऊद इंब्राहिम का नाम आया था. इस केस की कड़ियां सीधे उससे जुड़ रही थीं. क्रिकेट में इतने बड़े फिक्सिंग नेटवर्क का मुखिया दाऊद ही था. मुंबई धमाकों के बाद दूसरी बार उसका नाम एक बड़े केस में आ रहा था.

दाऊद ने दी थी पुलिस अफसर को धमकी

इसी वजह से दाऊद ने नीरज कुमार को फोन किया. नीरज कुमार ने बताया, 'फोन पर दाऊद के कहने का सीधा मतलब ये था कि मैं रिटायर्ड होने वाला हूं. इसके बाद मुझे सिक्योरिटी तो मिलेगी नहीं, मेरी जान को खतरा रहेगा. ऐसे में उसने धमकी दी कि इस मामले में मैं उसका नाम लूं. वह बाद में मेरा नुकसान पहुंचा सकता है. उसने सीधे मुझे धमकी दी थी.'

तीन बार हुई थी दाऊद से फोन पर बात

37 साल पुलिस सेवा करने वाले नीरज कुमार ने 9 साल तक सीबीआई में भी काम किया है. उन्होंने साल 1993 में हुई मुंबई धमाकों की भी जांच की है. इस दौरान करीब तीन बार उनकी दाऊद इब्राहिम से बात हुई थी. दाऊद के सरेंडर के सवाल पर उनका कहना है, 'मुझे नहीं लगता कि दाऊद इब्राहिम सही मायने में सरेंडर करना चहता था या अब भी करेगा.'

इन शर्तों के साथ किया सरेंडर की बात

उन्होंने कहा, 'हां, वो शर्तों के साथ सरेंडर की बात करता था, जो भारतीय कानून के हिसाब से संभव नहीं है. उसने इसी तरह की बात वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी के साथ भी की थी. आज की स्थिति में हम लोगों ने उसको बहुत ज्यादा चर्चित कर दिया. उस पर फिल्म बनी. किताब लिखे गए. वह एक साधारण अपराधी है. हालात की वजह से वह उस मुकाम पर है.'

दाऊद ने पाकिस्तान में ले रखी है पनाह

बताते चलें कि 12 मार्च, 1993 को मुंबई में 13 जगह सीरियल ब्लास्ट हुए थे. इसमें करीब 257 लोगों की मौत हुई थी. 700 लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए थे. इन धमाकों का मास्टरमांइड दाऊद इब्राहिम को माना जाता है. तभी से भारत के लिए वह वॉन्टेड है. दाऊद ने पाकिस्तान में पनाह ले रखी है. उसका कारोबार दुनिया के कई देशों में फैला हुआ है.

'मुच्छड़' के नाम से जानते थे लोग

कई मुल्कों में उसकी संपत्ति है. दाऊद को कई नामों से जाना जाता है, लेकिन मुंबई अंडरवर्ल्ड में लोग उसे 'मुच्छड़' के नाम से जानते थे. भारत से भागने के बाद दाऊद लगातार अपना नाम और पहचान बदलता रहा. कहा जाता है कि हुलिया बदलने के लिए उसने कई बार अपने चेहरे की सर्जरी भी कराई. उसने नाम भी बदल लिया है. यह भारत का सबसे बड़ा मोस्ट वॉन्टेड.

मुंबई पुलिस में हवलदार थे पिता

दाऊद का उसका असली नाम शेख दाऊद इब्राहिम कास्कर है. उसके पिता शेख इब्राहिम अली कास्कर मुंबई पुलिस में हवलदार थे. स्कूल में पढ़ाई के दौरान बुरी सोहबत में पड़े दाऊद ने चोरी, डकैती और तस्करी शुरू कर दी. इससे परेशान होकर घरवालों ने उसकी शादी बीना जरीना नाम की लड़की से कर दी. लेकिन वह जुर्म की दुनिया में आगे बढ़ता गया.

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