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तबरेज मॉब लिंचिंग केसः हत्या की धारा हटाने पर परिजनों ने की CBI जांच की मांग

तबरेज अंसारी मॉब लिंचिंग केस में झारखंड पुलिस ने हत्या की धारा को हटा दिया है. पुलिस का कहना है कि डॉक्टरों की रिपोर्ट में तबरेज की मौत तनाव और कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुई थी. जिसके बाद अब तबरेज के नाराज परिजनों ने सीबीआई जांच की मांग की है.

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aajtak.in
सत्यजीत कुमार रांची, 13 September 2019
तबरेज मॉब लिंचिंग केसः हत्या की धारा हटाने पर परिजनों ने की CBI जांच की मांग तबरेज अंसारी मॉब लिंचिंग केस में हत्या की धारा पुलिस ने हटाया

  • तबरेज़ अंसारी मॉब लिंचिंग केस में हटाई गई हत्या की धारा
  • पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दिल का दौरा पड़ने से हुई तबरेज़ की मौत
  • पुलिस ने 11 आरोपियों के खिलाफ हटाए हत्या के आरोप
  • परिजनों की मांग, मामले की हो सीबीआई जांच

देशभर में सुर्खियों में रहे तबरेज़ अंसारी मॉब लिंचिंग केस ने नया मोड़ लिया है. इस साल 17 जून को कथित बैंक चोरी के आरोप में तबरेज़ अंसारी की भीड़ ने बेरहमी से  पिटाई की थी. बुरी तरह घायल तबरेज़ ने 22 जून को दम तोड़ दिया था. पुलिस ने 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर आईपीसी की धारा 302 के तहत केस दर्ज़ किया.

तबरेज़ अंसारी से जुडे मामले में विसरा रिपोर्ट का शिद्दत से इंतज़ार हो रहा था. लेकिन ये रिपोर्ट आई तो हैरान करने वाला नतीजा सामने आया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक तबरेज़ की मौत तनाव और दिल के दौरे की वजह से हुई.

17 जून की रात को झारखंड के सरायकेला जिले के कदमडीह गांव के रहने वाले तबरेज़ के साथ क्या हुआ था, ये सभी जानकारी पब्लिक डोमेन पर है और इसे देश भर के मीडिया ने कवर किया था.

आरोप है कि जब भीड़ तबरेज़ की पिटाई कर रही थी तो उससे ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ बोलने के लिए कहा गया. एक वीडियो भी सामने आया था जिसमें देखा जा सकता था कि कैसे तबरेज़ को एक खंभे के साथ बांधकर पीटे जाता रहा. सूचना मिलने पर अगले दिन सुबह पुलिस मौके पर पहुंची. चोरी के आरोप में तबरेज़ को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने से पहले मेडिकल जांच के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. तबरेज़ की हालत बिगड़ने के बाद 22 जून को उसने दम तोड़ दिया.  

पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के निष्कर्ष के आधार पर पुलिस ने सभी 11 आरोपियों के ख़िलाफ़ हत्या के आरोप हटा लिए हैं. पुलिस का कहना है कि जब मौत की वजह दिल का दौरा है तो हम कैसे धारा 302 के आरोपों में आगे बढ़ सकते हैं.

सरायकेला खरसावां के एसपी एस कार्तिक ने बताया कि धारा 302 को गैर इरादतन हत्या की धारा 304 में बदल दिया गया है. धारा 304 में भी आजीवन कारावास का प्रावधान है. लेकिन फ़र्क ये है कि आरोपियों को अब फांसी की सज़ा नहीं सुनाई जा सकेगी. हालांकि आरोपियों पर बाकी आरोप बदस्तूर जारी है. धारा 302 हटने का ये मतलब नहीं कि वो बरी हो गए हैं.  

हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले और इस केस में पीआईएल दाखिल करने वाले राजीव कुमार कहते हैं कि पुलिस का शुरू से ही आरोपियों के खिलाफ नरम रवैया रहा. ये पहली बार नहीं है कि सरायकेला में इस तरह की घटना हुई. इससे पहले भी झारखंड में मॉब लिंचिंग के 15 से ज्यादा मामले रिपोर्ट हो चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट भी मॉब लिंचिंग की घटनाओं में सख्ती से पेश आने की बात कह चुका है. हर कोई जानता है कि अगर किसी की इस हद तक पिटाई की जाए कि उसका बचना मुश्किल हो जाए तो इसे इरादतन हत्या ही माना जाएगा.

झारखंड हाईकोर्ट ने तबरेज अंसारी से जुड़ी 17 जून की घटना और फिर 5 जुलाई को मॉबलिंचिंग विरोधी रैली के बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी. कोर्ट ने सरकार को  ड्यूटी में कोताही की खामियों को लेकर चेताया था. इसके बाद सरकार की ओर से कोर्ट में सौंपे गए जवाब में कहा गया था कि सिविल सर्जन समेत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उपर्युक्त कार्रवाई की गई.

हालांकि तबरेज की पत्नी शाहिस्ता परवीन और अन्य परिवार वालों ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है. उनका कहना है कि तबरेज की बेरहमी से हत्या की गई और पुलिस ने आरोपियों के ख़िलाफ़ धारा 302 हटा ली, ऐसे में वो कैसे इंसाफ़ की उम्मीद कर सकते हैं.

झारखंड में नेता विपक्ष हेमंत सोरेन ने रिपोर्ट को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने विसरा रिपोर्ट पर भी सवाल उठाया. सोरेन ने कहा, “जब भूख से कोई मौत होती है तो ये सरकार कहती है कि बीमारी की वजह से मौत हुई. जब कोई सरकारी अनदेखी की वजह से खुदकुशी करता है तो सरकार बयान जारी कर खुदकुशी की वजह निजी समस्या बताती है. और अब जब मॉब लिंचिंग की वजह से मौत हुई तो सरकार इसके पीछे दिल का दौरा बता रही है. इस सरकार से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है.”

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