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ब्रह्मोस जासूसी कांडः दो महिला वैज्ञानिकों को ATS की क्लीनचिट

UP ATS के आईजी असीम अरुण ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों महिला वैज्ञानिकों को हिरासत में लेकर सघन पूछताछ की गई है. उनकी जांच पड़ताल के दौरान कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला.

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aajtak.in [Edited by: परवेज़ सागर]नई दिल्ली, 16 November 2018
ब्रह्मोस जासूसी कांडः दो महिला वैज्ञानिकों को ATS की क्लीनचिट पाक जासूस निशांत को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया था (फाइल फोटो)

देश को हिलाकर रख देने वाले ब्रह्मोस जासूसी कांड में फंसी कानपुर और आगरा की दो महिला वैज्ञानिकों को यूपी एटीएस की जांच टीम ने क्लीनचिट दे दी है. इस मामले में पाक जासूस निशांत अग्रवाल की गिरफ्तारी के बाद इन दो महिला वैज्ञानिकों को हिरासत में लिया गया था.

यूपी एटीएस के पुलिस महानिरीक्षक असीम अरुण ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि दोनों महिला वैज्ञानिकों को हिरासत में लेकर सघन पूछताछ की गई. उनकी जांच पड़ताल के दौरान कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला. इसलिए उन्हें इस जासूसी कांड के मामले में गिरफ्तार करने का कोई मतलब नहीं है.

बताते चलें कि यूपी एटीएस और महाराष्ट्र एटीएस के साथ मिलकर एक संयुक्त ऑपरेशन के तहत बीते 8 अक्टूबर को नागपुर से निशांत अग्रवाल को गिरफ्तार किया था. वह कानपुर का रहने वाला है. एटीएस को निशांत के घर और पर्सनल लैपटॉप से अतिसंवेदनशील और गोपनीय रिकॉर्ड मिले थे. कानून वो सब निशांत के लैपटॉप में नहीं होने चाहिए थे.

आरोप है कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के इंजीनियर निशांत अग्रवाल ब्रह्मोस मिसाइल से जुड़ी जानकारियां पाकिस्तान और अमेरिका को दे रहा था. असीम अरुण के मुताबिक निशांत का भंडाफोड़ होने के बाद आगरा और कानपुर के रक्षा प्रतिष्ठानों में तैनात दो महिला वैज्ञानिकों को हिरासत में लिया गया था. उनसे कड़ी पूछताछ की गई. उनकी जांच पड़ताल की गई लेकिन दोनों के पास कुछ संदिग्ध नहीं मिला.

निशांत पर ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट की जानकारी लीक करने का आरोप लगा था. अब निशांत के बारे में नया खुलासा हुआ है. निशांत अग्रवाल को सिर्फ हनीट्रैप का ही शिकार नहीं बनाया गया था, बल्कि उसके कंप्यूटर पर जासूसी के लिए स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर भी अटैच कर दिया गया था.

यह स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर उसको ईमेल लिंक के जरिए भेजा गया था. इसके बाद रिमोट एक्सेस से उसके पूरे लैपटॉप को ही हैक कर लिया गया था. यानी निशांत के लैपटॉप में जितना डाटा था और जो भी वह काम करता था, उसकी जानकारी स्पाइवेयर भेजने वाले पहुंच गई थी.

निशांत से लंबी पूछताछ के बाद उसे जेल भेज दिया गया है. नियमों के मुताबिक किसी भी अधिकारी के लिए निजी कंप्यूटर पर ऐसे ऑफिशियल दस्तावेजों को रखना गैरकानूनी है. अब तक की पूछताछ में निशांत अग्रवाल ने कई लोगों के नाम का खुलासा किया है.

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